Haryana Chunav Result: BJP का यह फैसला साबित हुआ मास्टरस्ट्रोक! इसलिए हरियाणा में नहीं पलट सकी बाजी
Haryana Result in Hindi: हरियाणा में बीजेपी लगातार तीसरी बार सरकार ही नहीं बनाने जा रही है, उसे राज्य में अबतक का सबसे ज्यादा बहुमत भी मिला है। भाजपा की यह जीत इस वजह से भी ऐतिहासिक है कि आजतक राज्य में कोई भी पार्टी लगातार तीन बार चुनाव नहीं जीती थी। बीजेपी ने यहां चुनावी राजनीति में मशहूर शब्द एंटी-इंकंबेंसी थ्योरी को भी नकार दिया है। ऐसे में लगता है कि बीजेपी समय रहते नेतृत्व नहीं बदलती तो शायद उसे इतनी बड़ी जीत नहीं मिल पाती।
इस साल मार्च में जब तत्कालीन मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने अचानक इस्तीफा दिया और बीजेपी ने नायब सिंह को हरियाणा में नया मुख्यमंत्री बनाया तो लगा कि वह लोकसभा चुनावों से पहले खट्टर सरकार की 10 साल की एंटी-इंकंबेंसी से निपटना चाहती है।

खट्टर की जगह सैनी को सीएम बनाने का फैसला सफल
इसी के साथ पार्टी ने 5 साल तक अपनी सहयोगी रही तत्कालीन डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला की जननायक जनता पार्टी (JJP) से भी किनारा कर लिया। खट्टर पंजाबी समाज के हैं और सैनी ओबीसी बिरादरी से ताल्लुक रखते हैं। पार्टी का यह फैसला लोकसभा चुनावों में ही असर डालता नजर आया। दुष्यंत की पार्टी लोकसभा में भी कुछ नहीं कर सकी और विधानसभा चुनावों में उनकी सीटों भाजपा को फायदा मिल गया।
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लोकसभा चुनाव से दिखने लगा था सैनी वाला असर
कांग्रेस और आम आदमी पार्टी ने लोकसभा चुनाव में गठबंधन किया, फिर भी बीजेपी 10 में से 5 सीटें बचाने में सफल रही। तब बीजेपी ने 90 विधानसभा सीटों में से 44 पर बढ़त बनाई थी। वहीं कांग्रेस 42 और आम आदमी पार्टी 4 सीटों पर आगे रही थी।
खट्टर के भरोसेमंद पर ही पार्टी ने जताया भरोसा
बीजेपी ने खट्टर को हटाने का फैसला बहुत ही सोच-समझकर लिया था। उनके इस्तीफे के एक दिन पहले ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके साथ एक बड़े सरकारी कार्यक्रम में हिस्सा लिया था और उनपर पूरा भरोसा भी जताया था। पार्टी ने चुनावी गुणा गणित के हिसाब से उनकी जगह सैनी पर दांव लगाया, जो कि खट्टर के बहुत ही करीबी रहे हैं।
सैनी को हमेशा मिलता रहा खट्टर का साथ
लोकसभा चुनावों में मनोहर लाल खट्टर करनाल सीट से सवा दो लाख से भी ज्यादा वोटों से चुनाव जीते और पीएम मोदी ने उन्हीं अपनी कैबिनेट में आवास और शहरी मामले और ऊर्जा मंत्रालय जैसी भारी-भरकम जिम्मेदारी सौंपी। इस विधानसभा चुनाव में भी सीएम सैनी आगे से पार्टी के चुनाव अभियान का चेहरा रहे, लेकिन उनकी पीठ पर खट्टर का हाथ हमेशा रहा।
इसलिए हरियाणा में पलट गई बाजी!
जब, एग्जिट पोल के नतीजों ने राज्य में कांग्रेस को एकतरफा जीत की ओर इशारा किया तो न सिर्फ सैनी ने उन अनुमानों को बहुत ही शालीनता से खारिज कर दिया, बल्कि मनोहर लाल खट्टर ने 90 में से बीजेपी की जीत के जो आंकड़े दिए, चुनाव परिणाम उसी पैमाने पर बिल्कुल सटीक नजर आए।
अब जब हरियाणा में लगातार भाजपा तीसरी बार सरकार बनाने के लिए तैयार है तो यकीनी तौर पर कहा जा सकता है कि उसने मार्च में खट्टर की जगह सैनी को जिम्मेदारी देने की जो पहल की वह बहुत ही दूरदृष्टि वाली राजनीति से निकला निर्णय साबित हुआ है।












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