Video: साड़ी पहनकर फुटबॉल खेल रही महिलाएं, 25 साल की भाभीयों ने मारी किक, 72 साल की दादी ने किया गोल
Gwalior Gol In Saree: ग्वालियर में गोल इन साड़ी नाम से महिलाओं का फुटबॉल टूर्नामेंट चल रहा है। जिसमें महिला खिलाड़ियों ने फुटबॉल में अपना हुनर दिखाया। ना किचन की टेंशन थी, ना ही उम्र।

Gwalior Gol In Saree: मध्य प्रदेश के ग्वालियर शहर में शनिवार से महिलाओं की अनोखी फुटबॉल प्रतियोगिता प्रारंभ हुई है। गोल इन साड़ी (Gol In Saree) नाम दिया गया है। आयोजित फुटबॉल प्रतियोगिता (football competition) में लेडीस साड़ी पहनकर स्टेडियम में उतरी हैं। साड़ी पहनकर स्टेडियम पर महिलाओं ने जमकर फुटबॉल खेला। 25 वर्षीय भाभियों ने जोरदार किक मारे। वहीं 72 वर्षीय दादी ने गोल मारी। लेडीस खिलाड़ियों ने कहा कि नारी साड़ी में भी भारी है। यहां शहर की 8 टीमों के बीच दो दिवसीय प्रतियोगिता चल रही है।
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ग्वालियर शहर के एमएलबी मैदान में महिला फुटबॉल प्रतियोगिता प्रारंभ हुई है और इस प्रतियोगिता का नाम "गोल इन साड़ी"टैगलाइन दिया गया है। यह प्रतियोगिता दो दिनों तक चलेगी और शहर की लगभग 8 से अधिक महिला टीमें इस खेल में भाग लेगी। प्रतियोगिता के पहले दिन ऑरेंज और पिंक ब्लू टीम की महिलाओं के बीच प्रतियोगिता हुई, जिसमें पिंक टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए पहला मुकाबला जीत लिया।

इस प्रतियोगिता में रंग बिरंगी साड़ियां पहनकर मिलाएं किक मारती हुई नजर आई। जिससे इस प्रतियोगिता में काफी रोमांचिक रहा। खास बात यह है कि महिलाओं के इस फुटबॉल मैच में 25 साल की भाभीयों से लेकर 72 साल की दादी तक फुटबॉल को किक मारते हुए देखी गईं। इस प्रतियोगिता को देखकर हर कोई हैरान था और ऐसा लग रहा था कि महिलाएं सिर्फ किचन तक ही सीमित नहीं हैं। बल्कि खेल मैदान में भी अपना जौहर दिखा सकती है।
इस प्रतियोगिता को कराने वाली संयोजक अंजलि बत्रा ने जानकारी दी कि लेडीस ही इस प्रतियोगिता की जिम्मेदारी संभाल रहीं हैं। इसमें ऑरेंज और पिंक ब्लू टीमें सहभागिता कर रही हैं। वहीं पहली मैच जीती पिंक पैंथर टीम की महिलाओं का कहना है कि इस मैच में हमने जीत दर्ज की है और हमने मैदान पर साड़ी में गगनचुंबी गोल मारकर यह साबित कर दिया है कि नारी साड़ी में भी भारी है।

72 वर्षीय दादी दलजीत मान ने गगनचुंबी गोल कर अपनी टीम को जीत दिलाई। दादी दलजीत ने बताया कि अपनी सेहत के लिए वह रोजाना कसरत करती हैं। जब भी मौका मिलता है तो वे स्टेडियम में फुटबॉल जरूर खेलती हैं। उनका मानना है कि महिलाएं साड़ी पहनकर सिर्फ चूल्हा-चौका तक ही सीमित नहीं हैं। वे गोल भी दाग सकती हैं।
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