इंसानियत की मिसाल: लॉकडाउन में फंसी थी आठ महीने की गर्भवती, टैक्सी ड्राइवर ने 21 दिनों तक घर में रखा

गुरुग्राम। देश में बढ़ते कोरोना संक्रमण को देखते हुए 3 मई तक के लिए लॉकडाउन को बढ़ा दिया गया। लॉकडाउन के दूसरे फेज में भी सड़क और रेल यातायात बंद है और पुलिस व प्रशासन लॉकडाउन का पालना करना में जुटा हुआ है। ऐसे में जो जहां है, वहीं फंसा हुआ है। इस बीच गुरुग्राम जिले से एक ऐसी कहानी सामने आई है, जिसने इंसानियत की नई मिसाल पेश की है। दरअसल, यहां एक ट्रैक्सी ड्राइवर ने 21 दिनों तक एक गर्भवती महिला को अपने घर में रखा क्योंकि वह लॉकडाउन में फंस गई थी।

21 दिनों तक अपने घर में रखा

21 दिनों तक अपने घर में रखा

एनडीटीवी की खबर के मुताबिक, राजस्थान के जयपुर जिसे से 8 महीने की एक गर्भवती महिला उत्तर प्रदेश के मुजफ्फनगर के लिए चली थी। वह गुरुग्राम पहुंचकर लॉकडाउन में फंस गई। महिला जिस टैक्सी में बैठी थी उसी टैक्सी के ड्राइवर संजय ने इंसानियत दिखाते हुए महिला और उसकी बेटी को 21 दिन तक अपने घर में रखा। इस दौरान संजय ने उन्हें खाना खिलाया और अस्पताल भी ले कर गया।

जयपुर से मुजफ्फरनगर जा रही थी महिला

जयपुर से मुजफ्फरनगर जा रही थी महिला

संजय ने बताया कि लॉकडाउन से ठीक पहले वो एक सवारी को छोड़कर जब जयपुर से वापस लौट रहे थे तभी उन्हें एक महिला अपनी बेटी के साथ मिली जिसे यूपी के मुजफ्फरनगर अपनी बड़ी बेटी को लेने जाना था। लेकिन लॉकडाउन लागू होने की वजह से वो रास्ते में ही फंस गई। संजय की मानें तो पहले तो वह डरें, उन्हें लगा कि महिला को देखकर उनसे सवाल पूछे जाएंगे, लेकिन फिर उन्होंने परिस्थिति को समझते हुए इंसानियत दिखाई और महिला को अपने घर ले आए।

भाई-बहन की तरह रहे दोनों

भाई-बहन की तरह रहे दोनों

बता दें कि संजय गुरुग्राम में एक छोटे से कमरे में रहते हैं, कमरे में न तो पंखा है और न ही सुख सुविधा का कोई सामान है। संजय ने बताया कि 28 साल की महिला सुहाना सिंह और उसकी बेटी 21 दिनों तक मेरे घर पर रहे, उन्हें खाना खिलाया और अस्पताल भी ले कर गए। इस दौरान संजय कर्फ्यू पास बनवाने की कोशिश भी करते रहे। संजय ने बताया कि कोई रास्ता नहीं था, मुझे लगा कि एक दिन की बात है। लेकिन संजय को अंदाजा नहीं था कि यह लॉकडाउन इतने लंबे दिनों तक चलेगा।

सुहाना को जयपुर छोड़े आए संजय

सुहाना को जयपुर छोड़े आए संजय

वहीं, सुहाना सिंह का कहना है कि ट्रैक्सी ड्राइवर ने मेरी बहुत मदद की। हम दोनों एक घर में भाई-बहन की तरह रहे। जब पैसे खत्म हो गए तो टैक्सी ड्राइवर संजय ने इलाके के निगम पार्षद से मदद की गुहार लगाई, पूरी बात जानने के बाद पार्षद ने मदद का भरोसा दिलाया और टैक्सी ड्राइवर के साथ कर्फ्यू का पास बनवाया। कर्फ्यू पास बनने के बाद गुरुवार को संजय सुहाना को उनके घर जयपुर छोड़ आए।

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