कोई भूखा न रहे इस मकसद से चलती है ये रोटी-बैंक, महिलाएं जुटाती हैं देशी घी वाली हजारों रोटी

राजकोट। इन दिनों कोरोना-लॉकडाउन के कारण राह में बैठे भिखारियों, गरीबों और मलिन बस्ती लोगों को दो वक्त की रोटी जुटा पाना मुश्किल हो गया है। ऐसे वक्त में कुछ एनजीओ तथा नेकदिल लोग दूसरों की मदद कर रहे हैं। कुछ दिनों पहले ही गुजरात में राजकोट के एक व्यापारी ने अपना कपड़ों का शो-रुम बंद कर 15 साथियों के साथ मिलकर रोटियां बनाने की मशीन खरीदी थी। उसके जरिए, वे प्रतिदिन 8 हजार से ज्यादा रोटियां बनाकर गरीबों में वितरित करते हैं। इसी प्रकार, राजकोट में बोलबाला ट्रस्ट के संचालक जयेश उपाध्याय 'रोटी-बैंक' चलाते हैं। उनकी रहमदिली की भी दूर-दूर तक प्रशंसा होती है।

'जो मिलता है, भरपेट खिलाते हैं'

'जो मिलता है, भरपेट खिलाते हैं'

बोलबाला ट्रस्ट के संचालक जयेश उपाध्याय का कहना है कि हम कई सालों से यह काम कर रहे हैं। इस 'बैंक' का उद्देश्य है- जो (इंसान) मिले, उसे भूखा न सोना पड़े! वह बताते हैं कि, हमारे यहां भूखे लोगों के लिए हजारों रोटियां एकत्रित की जाती हैं। ज्यादातर देशी घी वाली होती हैं। फिर उन्हें गरीबों, राह में बैठे भिखारियों और झुग्गी-झोपड़ी वाले लोगों को खिलाया जाता है। शुरूआत में 250 से 300 रोटी रोज जुटाई जाती थीं। बाद में यह संख्या बढ़ती चली गई, क्योंकि बहुत से लोग दान-पुण्य करने लगे। पिछले वर्ष की शुरूआत से ही 3000 से 3500 रोटियां आने लगीं।

मजदूरों में भी बांटी जाती हैं ये रोटी-सब्जी

मजदूरों में भी बांटी जाती हैं ये रोटी-सब्जी

उन्होंने कहा कि, सभी रोटियां जरूरतमंदों के लिए वितरित की जाती हैं। इन रोटियों को अस्पताल में भी ले जाया जाता है और मजदूरों में भी बांटी जाती हैं। महिलाए उत्साह से लाइन में खड़ी होकर रोटियां जमा करवाती हैं। रोटी बैंक शुरू करने का आइडिया जयेश को सरकारी अस्पतालों में बाहर से आने वाले लोगों को मुश्किलें देखकर आया था। जिसके चलते मरीजों एवं उनके परिजनों की भूख दूर करने पर काम शुरू किया। आमतौर पर लाइन में खड़े रहने से हिचकती महिलाएं यहां उत्साह के साथ लाइन में आकर रोटियां जमा करवाती हैं। हालांकि कुछ जगहों पर हमारे कार्यकर्ता खुद रोटियां लेने भी जाते हैं।

रोटी के साथ मिठाई भी परोसी जाती है

रोटी के साथ मिठाई भी परोसी जाती है

रोटी के साथ ट्रस्ट द्वारा सब्जी और मिठाई का इंतजाम किया जाता है और सुबह से दोपहर तक रोटी जमा कर के जरूरतमंद की भूख मिटाने का प्रयास किया जाता है। कोशिश रहती है कि गरीब और जरूरतमंदों को पौष्टिक खाना पहुंचाया जा सके। हालांकि, इतने बड़े शहर में 3000-3500 रोटियों से सबका पेट भरना तो मुश्किल है, लेकिन प्रतिदिन 1000 से ज्यादा भूखे लोगों का पेट इस रोटी बैंक द्वारा भरा जा रहा है।

10,000 से ज्यादा भूखे लोगों का पेट भरने पर फोकस

10,000 से ज्यादा भूखे लोगों का पेट भरने पर फोकस

यहां रोटी देने आने वाले लोगों का मानना है की पुण्य ही सबसे बडा फल है। अगर किसी का अच्छा करोगे तो कुदरत सबका अच्छा करेगा। जिसके चलते यहां रोटियां देने वालों की संख्या प्रतिदिन बढ़ रही है। आने वाले समय में वे 10,000 से ज्यादा भूखे लोगों का पेट भरने का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं।

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