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क्यों नई वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन की हवाई जहाज से हो रही है तुलना ? पीएम मोदी कल दिखाएंगे हरी झंडी

गांधीनगर, 29 सितंबर: गुजरात के गांधीनगर कैपिटल स्टेशन से कल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी एक नई वंदेभारत एक्सप्रेस ट्रेन को रवाना करेंगे। ट्रेन-18 के नाम से जाने जानी वाली यह ट्रेन पीएम मोदी सरकार की महत्वाकांक्षी योजना का हिस्सा है। गांधीनगर कैपिटल स्टेशन से मुंबई सेंट्रेल के बीच चलने वाली यह ट्रेन तीसरी वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन होगी, लेकिन यह पहले से चल रही दोनों मौजूदा ट्रेनों के मुकाबले भी काफी एडवांस है। इसके बारे में कहा जा रहा है कि इसके यात्रियों को हवाई जहाज जैसा कंफर्ट मिलेगा, जबकि इसकी स्पीड भी अधिक होगी और इसमें एडवांस सुरक्षा प्रणाली भी लगाई गई है।

हवाई जहाज वाला यात्रा अनुभव मिलेगा-रेलवे

हवाई जहाज वाला यात्रा अनुभव मिलेगा-रेलवे

नई वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन इस स्वदेशी ट्रेन की अपडेटेड वर्जन है। भारतीय रेलवे की यह ट्रेन दो राज्यों गुजरात और महाराष्ट्र के बीच गांधीनगर कैपिटल और मुंबई सेंट्रल स्टेशनों के बीच चलेगी। इस नई-नवेली वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन के फीचर के बारे में वेस्टर्न रेलवे जोन के सीपीआरओ सुमित ठाकुर ने बताया, 'वंदे भारत एक्सप्रेस में बेहतरीन सुविधाओं की भरमार है, जिसमें यात्रियों को हवाई जहाज में यात्रा करने जैसा अनुभव मिलेगा और इसमें कवच टेक्नोलॉजी समेत उन्नत स्टेट ऑफ द आर्ट सुरक्षा प्रणाली भी शामिल है, जो कि (कवच) स्वदेश में विकसित ट्रेन कॉलिजन एवॉयडेंस सिस्टम है।'

आरामदायक यात्रा के साथ आनंद उठाने का मौका मिलेगा

आरामदायक यात्रा के साथ आनंद उठाने का मौका मिलेगा

ठाकुर ने कहा है कि इस ट्रेन की बोगियों में पूर्ण सस्पेंडेड ट्रैक्शन मोटर्स लगाए गए हैं, जो कि 160 किलोमीटर प्रति घंटे की ऑपरेशनल रफ्तार के लिए फिट हैं। इसके अलावा स्टेट ऑफ द आर्ट सस्पेंशन सिस्टम की वजह से बहुत ही आरामदायक और सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित की गई है, जिससे यात्रियों का कंफर्ट काफी बढ़ जाएगा। यही नहीं पूरी ट्रेन में सभी श्रेणियों में जो सीटें लगाई गई हैं, वह रीसाइक्लिंग सीटें हैं, जबकि एग्जिक्यूटिव कोचों में 180 डिग्री तक घूमने वाली सीटें लगाई गई हैं। मतलब यह ट्रेन यात्रा के साथ ही उसका भरपूर आनंद उठाने के लिए भी डिजाइन की गई है।

आपात स्थिति में यात्रियों से संपर्क कर सकते हैं गार्ड-पायलट

आपात स्थिति में यात्रियों से संपर्क कर सकते हैं गार्ड-पायलट

सीपीआरओ ने यह भी कहा है कि 'हर कोच में 32 इंच के स्क्रीन लगाए गए हैं, जिससे यात्रियौों को सूचना के साथ-साथ मनोरंज भी उपलब्ध होगा। दिव्यांग-फ्रेंडली वॉशरूम और सीट हैंडल लगे हैं, इसके साथ ही सीटों के नंबर ब्रेल अक्षरों में भी उपलब्ध होंगे।' इस ट्रेन में बढ़ाई गई सुविधाओं के बारे में वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेन के लोको पायलट केके ठाकुर ने कहा, 'इस ट्रेन में कोच के बाहर प्लेटफॉर्म की ओर चार कैमरे लगाए गए हैं, जिसमें पीछे देखने के लिए भी कैमरे शामिल हैं। यह ट्रेन भारतीय रेलवे की ग्रीन फुटप्रिंट को ध्यान में रखकर डिजाइन की गई है, जिसमें एडवांस ब्रेकिंग सिस्टम की वजह से करीब 30 फीसदी तक बिजली की बचत होती है। किसी भी आपात स्थिति में लोको पायलट और गार्ड आपस में और यात्रियों के साथ भी आसानी से संपर्क कर सकते हैं।'

कोच में शुद्ध हवा का भी होगा इंतजाम

कोच में शुद्ध हवा का भी होगा इंतजाम

इसके अलावा नई वंदे भारत ट्रेनों में ऑटोमेटिक फायर सेंसर, सीसीटीवी कैमरे,वाईफाई सुविधा के साथ ऑन डिमांड कंटेंट, तीन से चार घंटे बैटरी बैकअप और यात्रा को ज्यादा आरामदायक और सुरक्षित बनाने के लिए जीपीएस सिस्टम भी लगाए गए हैं। इंटीग्रल कोच फैक्ट्री ने अगस्त, 2023 तक 75 वंदे भारत ट्रेन के निर्माण का लक्ष्य रखा है। यही नहीं इन ट्रेनों में हवा को शुद्ध करने के लिए भी छतों में खास सिस्टम लगाए गए हैं। इस सिस्टम की मदद से जर्म्स, बैक्टीरिया और वायरस को भी रोका जा सकता है।

ट्रैक पर बाढ़ के पानी के बावजूद चलेगी ट्रेन

ट्रैक पर बाढ़ के पानी के बावजूद चलेगी ट्रेन

अभी देश में दो वंदे भारत एक्सप्रेस ट्रेनें चल रही हैं। एक नई दिल्ली से प्रयागराज होते हुए वाराणसी रूट पर और दूसरी नई दिल्ली से माता वैष्णो देवी कटरा स्टेशन तक। लेकिन, जो ट्रेन गांधीनगर कैपिटल से मुंबई सेंट्रल तक चल रही है, वह उन दोनों की तुलना में भी ज्यादा आरामदायक है। इसकी वजह ये है कि नई ट्रेन के कोच पहले के मुकाबले हल्के हैं। इस ट्रेन का वजन 38 टन घटकर 392 टन ही रह गया है और अगर ट्रैक पर दो फीट भी बाढ़ का पानी आ जाए तो यह चल सकती है। ये कोच स्टेनलेस स्टील के बने हैं। हल्की वजन के कारण यात्री ज्यादा स्पीड में भी ज्यादा कंफर्ट महसूस करेंगे।

चौड़ी खिड़कियां और ज्यादा लगेज स्पेस

चौड़ी खिड़कियां और ज्यादा लगेज स्पेस

इस ट्रेन में ऑटोमेटिक गेट हैं, जिसे पायलट ऑपरेट करेंगे। खिड़कियां चौड़ी हैं, सामान रखने के लिए ज्यादा जगह दी गई है। जो टॉयलेट लगे हैं, वह भी एडवांस हैं और ट्रेन के ज्यादातर पुर्जे मेड इन इंडिया हैं, सिर्फ कुछ छोटे पार्ट ही बाहर से मंगाए गए हैं। यह पूरी तरह से स्वदेश सेमी-हाई स्पीड ट्रेन हैं, जिसने हाल ही में शून्य से 100 किलोमीटर की रफ्तार सिर्फ 52 सेकेंड में पकड़ कर अपना ही रिकॉर्ड तोड़ा है। (इनपुट और पहली चार तस्वीरें-एएनआई और अंतिम दोनों तस्वीरें-फाइल)

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