2 किसान संगठन आंदोलन से अलग हुए तो सूरत के कामदार महासंघ ने किसानों को समर्थन का ऐलान किया
सूरत। केंद्र सरकार के कृषि कानूनों के खिलाफ देशभर के 30 से ज्यादा किसान-श्रमिक संगठनों ने आंदोलन छेड़ा था। हालांकि, गणतंत्र दिवस पर राजधानी दिल्ली में हुई हिंसा के बाद से यह आंदोलन खटाई में पड़ गया। तकरीबन 400 जवानों के घायल होने और करोड़ों की संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोप में दिल्ली पुलिस की ओर से 37 नेताओं पर एफआईआर दर्ज कराई गई हैं। पूरे मामले में 25 से ज्यादा केस दर्ज किए गए। जिसके चलते दो बड़े संगठन किसान आंदोलन से अलग हो गए। जिनमें राष्ट्रीय मजदूर किसान संगठन और भारतीय किसान यूनियन भानु ने खुद को आंदोलन से अलग कर लिया। मगर, इस बीच गुजरात से एक संगठन ने इस आंदोलन को समर्थन भी दिया है।

गुजरात में सूरत के किसान-मजदूर सार्वजनिक महासंघ द्वारा कहा गया है कि, उसके सदस्य सरकारी कानूनों के खिलाफ प्रदर्शनकारियों के साथ होंगे। किसान संगठनों को समर्थन जारी करते हुए इस महासंघ के पदाधिकारियों ने जिलाधीश को ज्ञापन देकर केंद्र सरकार से तीनों कृषित कानूनों को वापस लेने की मांग की। पदाधिकारी सुरेश सोनवणे ने कहा कि, किसान विरोधी तीनों कानून वापस लेने और गणतंत्र दिवस पर दिल्ली में किसानों पर हुए अत्याचार का हम उग्र विरोध करते हैं। उन्होंने कहा कि, हमारे यहां के किसानों, मजदूरों और कामदार सार्वजनिक महासंघ ने किसान आंदोलन के समर्थन में रैली का आयोजन करने का फैसला किया।
हालांकि, किसान-मजदूर सार्वजनिक महासंघ की ओर से कलेक्ट्रेट ऑफिस पर किए जा रहे विरोध-प्रदर्शन को पुलिस ने आगे नहीं बढ़ने दिया। पुलिस ने उन्हें प्रदर्शन करने की मंजूरी भी नहीं दी। इस पर संघ के पदाधिकारियों का कहना है कि, स्थानीय पुलिस राजनेताओं के इशारों पर कार्य कर रही है। एक मजूदर ने कहा कि, केन्द्र सरकार द्वारा पारित किए तीनों किसान विरोधी कानून को वापस लेने की मांग करते हुए हमारे पदाधिकारियों ने कलेक्टर को ज्ञापन दिया है। अगर जल्द से जल्द तीनों बिल वापस नही लिए जाते हैं तो आगामी दिनों में किसानों के हित में तेज आंदोलन किया जायेगा।












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