गुजरात हाईकोर्ट ने मोरबी हादसे पर लिया स्वत: संज्ञान, नोटिस जारी कर गृह मंत्रालय सहित इनसे मांगा जवाब
बीते दिनों गुजरात के मोरबी में ओवरब्रिज गिरने की वजह से 135 लोगों की मौत हो गई थी। जबकि कई लोग घायल हो गए थे। इस हादसे में जांच चल रही है और पुल की मरम्मत करने वाले ओरेवा कंपनी और उसकी सहयोगी कंपनी से पूछताछ जारी है। लेकिन इस बीच मामले में गुजरात हाईकोर्ट ने स्वत संज्ञान लिया है। हाईकोर्ट ने नोटिस जारी करते हुए गृह विभाग, शहरी आवास विभाग, मोरबी नगर पालिका, राज्य मानवाधिकार सहित राज्य के अन्य अधिकारियों से जवाब मांगा है। कोर्ट की तरफ से मामले में एक सप्ताह में जवाब मांगा हो गया है। कोर्ट की तरफ से कहा गया है कि 14 नवंबर को होने वाली अगली सुनवाई के दौरान हर हाल में विस्तृत रिपोर्ट चाहिए।

मीडिया रिपोर्ट के आधार पर हाईकोर्ट के मुख्य न्यायधीश ने लिया संज्ञान
गुजरात हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश कुमार ने 31 अक्टूबर को टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट पर स्वत: संज्ञान लेते हुए रजिस्ट्रार (न्यायिक) को टेलीफोन पर निर्देश देने के बाद एक जनहित याचिका पर सुनवाई शुरू की। मुख्य न्यायाधीश ने निर्देश देते हुए कहा कि दीवाली की छुट्टियों के कारण अदालतें बंद होने के कारण, रजिस्ट्रार (न्यायिक) को टेलीफोन पर निर्देश जारी किया गया था कि वे उक्त रिपोर्ट को आवश्यक औपचारिकताओं के बाद तदनुसार दर्ज करके स्वत: जनहित याचिका के रूप में मानें।
स्वत: संज्ञान की याचिका पर सुनवाई मामले में खंडपीठ में न्यायमूर्ति आशुतोष शास्त्री भी शामिल हैं। उन्होंने सोमवार को गृह विभाग, शहरी आवास विभाग, मोरबी नगर पालिका, राज्य मानवाधिकार सहित राज्य के अन्य अधिकारियों से जवाब मांगा है। मामले में अब सुनवाई 14 नवंबर को होगी। आपको बता दें कि पुल की मरम्मत करने में जमकर भ्रष्टाचार किया गया। मीडिया रिपोर्ट में दावा किया या है कि ओरेवा ग्रुप की तरफ से पुल बनाने के लिए 2 करोड़ रुपए का ठेका लिया गया था, लेकिन पैसे कमाने की लालच में सिर्फ 12 लाख रुपए ही खर्च किए गए थे। मरम्मत के नाम पर सिर्फ पेंटिंग सहित कुछ ही सतही काम किए गए थे, जिसकी वजह से पुल टूट गया।
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