क्या गुजरात कांग्रेस में अलग-थलग पड़ गए हैं हार्दिक पटेल? पिता के निधन के बाद सामने आया दर्द
अहमदाबाद, जून 20: गुजरात कांग्रेस के अध्यक्ष अमित चावड़ा और कांग्रेस विधायक दल (सीएलपी) के नेता परेश धनानी के इस साल के शुरू में स्थानीय निकाय चुनावों में पार्टी की करारी हार के बाद इस्तीफा दे दिया था, जिसके बाद अब वरिष्ठ सदस्य गुजरात कांग्रेस में शीर्ष पदों के लिए पैरवी कर रहे हैं। हालांकि पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष हार्दिक पटेल अपनी नियुक्ति के एक साल बाद भी खुद को अलग-थलग महसूस कर रहे हैं। पटेल का कहना है कि इस साल मई में कोविड-19 के कारण पिता के निधन के बाद गुजरात कांग्रेस का कोई भी नेता उनके घर नहीं आया।

द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक हार्दिक पटेल ने बताया कि मुझे अपनी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और गुजरात और देश भर के अन्य दलों के शोक संदेश मिले, लेकिन मेरे पिता के निधन के बाद गुजरात का कोई भी वरिष्ठ कांग्रेसी नेता मेरे घर नहीं आया। बता दें कि साल 2019 में कांग्रेस में शामिल हुए पटेल को जुलाई 2020 में गुजरात प्रदेश कांग्रेस कमेटी (GPCC) का कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया गया था।
इंटरव्यू के दौरान कही यह बात
इस साल फरवरी में द इंडियन एक्सप्रेस को दिए एक इंटरव्यू में पटेल ने कहा था कि उन्हें लगता है कि पार्टी के कुछ नेता हो सकते हैं जो मुझे नीचे गिराना चाहते हैं। यहां तक की पीसीसी की ओर से उनके लिए स्थानीय चुनावों के दौरान एक भी जनसभा आयोजित नहीं की गई थी। यह पूछे जाने पर कि क्या वह 2022 के विधानसभा चुनाव से पहले कुछ जिम्मेदारी चाहेंगे, पटेल कहते हैं, इससे बेहतर कुछ नहीं। पटेल ने कहा कि मुझे किसी पद या शक्ति की जरूरत नहीं हैं, मुझे बस काम चाहिए ताकि मैं अपने लोगों की सेवा करना जारी रख सकूं।
बेरोजगारी और खेती के मुद्दों पर फोकस
वहीं पार्टी में अधिक अलगाव महसूस करने के सवाल पर उन्होंने कहा कि मेरा परिवार बहुत बड़ा है और हर परिवार की तरह मामूली तर्क और नोक झोक होती हैं। मुझे किसी पद या सीट की इच्छा नहीं है... अगर पार्टी चाहती है कि मैं 250 किलोमीटर चलूं, तो मैं खुशी-खुशी ऐसा करूंगा। फिलहाल मैं ग्रामीण क्षेत्रों पर ध्यान लगा रहा हूं और मेरी टीम बेरोजगारी और खेती के मुद्दों को उठा रही हैं। कोविड महामारी के दौरान प्रत्येक गांव में कम से कम 10-15 मौतें हुईं और गुजरात में 16,000 से अधिक गांव हैं। आप अनुमान लगा सकते हैं कि कितना भयानक विनाश हो सकता है।
इस बार AAP को मिला फायदा
आपको बता दें कि पाटीदार आंदोलन के बाद पटेल को भी पुलिस मामलों का सामना करना पड़ रहा हैं, जिसमें 2015 में उनके खिलाफ दर्ज 2 राजद्रोह के मामले भी शामिल हैं। जहां कांग्रेस को 2017 के विधानसभा चुनावों में पाटीदार आंदोलन से फायदा हुआ, वहीं 2021 के स्थानीय निकाय चुनावों में उसे बड़ा झटका लगा। आम आदमी पार्टी (AAP) ने सूरत नगर निगम (SMC) चुनावों में 27 सीटें जीतीं, पाटीदार मतदाताओं के एक बड़े वर्ग ने AAP को चुनने के बाद कांग्रेस को विपक्षी दल के रूप में बदल दिया।












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