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Gujarat Election Results 2022: कांग्रेस नेताओं की 'गाली' ने मोदी को गुजरात में बनाया महाशक्तिमान?

गुजरात विधानसभा चुनाव 2022 में भाजपा ने प्रचंड बहुमत के साथ कई रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। गुजरात चुनाव में कांग्रेस अपने प्रभाव वाले इलाकों में भी बुरी तरह हार गयी।

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Gujarat Election Results 2022: रिबेल फैक्टर, एंटी इनकम्बेंसी फैक्टर, कम वोटिंग परसेंटेज और मोरबी पुल हादसा जैसी कठिन चुनौतियों को दरकिनार कर भाजपा ने कैसे गुजरात में चमत्कार कर दिया ? जीत भी कोई ऐसी-वैसी नहीं बल्कि नया इतिहास बना दिया। जब भावनाएं प्रबल हो जाती हैं तब चुनाव के सारे समीकरण छिन्न-भिन्न हो जाते हैं। भावनाओं के तूफान में जितने भी फैक्टर थे वे तिनके की तरह उड़ गये। नरेन्द्र मोदी का वह भाषण काबिलेगौर है जिसने लोगों को भावुक बना दिया। उन्होंने पंचमहाल के कलोल की सभा में कहा था, “कांग्रेस में मुझे गाली देने की होड़ लगी है। कांग्रेस के एक नेता ने कहा, मोदी कुत्ते की मौत मरेगा, एक नेता ने कहा मोदी हिटलर की मौत मरेगा। कोई मुझे रावण कहता है, कोई राक्षस कहता है, कोई काक्रोच कहता है।” नरेन्द्र मोदी के इस कथन ने वोटरों को सेंटिमेंटल बना दिया।

अपशब्दों की प्रतिक्रिया में मोदी और मजबूत हुए

अपशब्दों की प्रतिक्रिया में मोदी और मजबूत हुए

नरेन्द्र मोदी आज भी गुजरात के लोगों के लिए आत्मगौरव का प्रतीक हैं। ये कोई मामूली बात नहीं कि गुजरात का एक साधारण आदमी आज भारत का प्रधानमंत्री है। वह भी लगातार दो जीत के साथ। गुजरात के लोग नरेन्द्र मोदी से नाखुश हो सकते हैं। नाराज हो सकते हैं। लेकिन कभी भी न तो उनका अपमान कर सकते हैं और अपमान सह सकते हैं। गुजरात के इस चुनाव में एक बार फिर नरेन्द्र मोदी को मौत का सौदागर कहा गया। ये बयान पूर्व मुख्यमंत्री शंकर सिंह बाघेला ने दिया था। वे अभी किसी दल में तो नहीं हैं लेकिन उनके पुत्र ने कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ा था। वे पहले खुद कांग्रेस में थे। बाघेला के इस बयान का काग्रेस ने भी समर्थन किया था। 2007 के चुनाव में सोनिया गांधी ने नरेन्द्र मोदी को पहली बार मौत का सौदागर कहा था। इसका क्या नतीजा निकला, इससे हर कोई वाकिफ है। सोनिया गांधी के इस एक अपशब्द की ऐसी प्रतिक्रिया हुई कि नरेन्द्र मोदी साधारण नेता से महाशक्तिमान बन गये। 2002 के बाद उन्होंने 2007 का चुनाव भी जीत लिया था। 2022 के चुनाव में कांग्रेस ने यही गलती दोहरायी। नये नवेले राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने नरेन्द्र मोदी को रावण कह दिया। नरेन्द्र मोदी के लिए जितने अपशब्दों का इस्तेमाल किया गया, वे उनकी ताकत बन गये।

हिट रहा ‘टोटल चेंज’ फारमूला

हिट रहा ‘टोटल चेंज’ फारमूला

जब कोई पार्टी दो दशक से अधिक समय तक सत्ता मे रहे तो जाहिर है जनता की कुछ न कुछ नाराजगी होगी ही। भाजपा ने सत्ता विरोधी लहर से बचने के लिए पहले ही तैयारी कर ली थी। 2021 में उसने न केवल मुख्यमंत्री को बल्कि पूरी कैबिनेट को बदल दिया। ऐसा नहीं था कि भाजपा लोगों की नाराजगी से बेखबर थी। उसने स्थिति पर पूरी मुस्तैदी से नजर रखी और समय पर फैसला लिया। भारत के इतिहास में यह पहला मौका था जब मुख्यमंत्री को तो बदला ही गया, उनकी पूरी टीम भी बदल दी गयी। चुनाव से ठीक पहले भाजपा का यह प्रयोग सफल रहा। भूपेन्द्र पटेल ने अपनी अगुवाई में भाजपा को ऐसी चुनावी जीत दिलायी कि इतिहास बन गया। भाजपा का 'टोटल चेंज' फारमूला स्थानीय निकाय चुनाव की कामयाबी से निकला था। नया चेहरा उतारोगे तो लोग पुराने चेहरों की नाराजगी भूल जाएंगे। भूपेन्द्र पटेल ने काम करने वाले नेता की छवि बनायी और साथ ही पाटीदार समुदाय को भी खुश कर दिया। लोगों का मन ऐसा बदला कि वे मोरबी हादसे के दर्द को भी भूल गये। भाजपा के कांतिलाल अमृतिया करीब 62 हजार वोटों से चुनाव जीत गये। भाजपा ने स्थानीय लोगों के आक्रोश से बचने के लिए सीटिंग विधायक और मंत्री बृजेश मेरजा का टिकट काट कर कांतिलाल को चुनाव मैदान में उतारा था। कांतिलाल ने हादसे के समय मच्छू नदी में कूद कर लोगों की जान बचायी थी।

मोदी-शाह के अलावा ये तीन चहरे भी खास

मोदी-शाह के अलावा ये तीन चहरे भी खास

भाजपा की जीत में नरेन्द्र मोदी और अमित साह के अलावा तीन और चेहरों ने प्रमुख भूमिका निभायी। इस प्रचंड जीत के बाद मुख्यमंत्री भूपेन्द्र पटेल, गुजरात भाजपा के अध्यक्ष सीआर पाटिल और गुजरात के गृहमंत्री हर्ष संघवी नये रणनीतिकार बन कर उभरे हैं। जिताऊ उम्मीदवारों के चयन में इनकी राय को अहमियत दी गयी। योग्य उम्मीदवारों के चयन और ठोस रणनीति के कारण भाजपा ने उन क्षेत्रों में भी शानदार प्रदर्शन किया जहां 2017 में कांग्रेस ने बाजी मार ली थी। सौराष्ट्र-कच्छ 54 सीटों में करीब 40 पर भाजपा ने बढ़त बनायी। कच्छ जिले की सभी छह सीटों पर भाजपा ने जीत हासिल की। कांग्रेस अपने प्रभाव वाले इलाकों में भी बुरी तरह हार गयी। चुनाव से पहले ने उन सीटों के लिए खास रणनीति बनायी थी जहां पिछले चुनाव में वह कम वोटों के अंतर से हारी थी।

यह भी पढ़ें: Gujarat Election Results 2022: कांग्रेस के साथ-साथ भाजपा के लिए भी डरा रही है आप?

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