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गुजरात में 6 साल के मूक-बधिर बच्चे को मिली स्पेन की मां, विदाई पर सबकी आंखों से छलके आंसू

कच्छ। गुजरात के कच्छ महिला कल्याण केंद्र को करीब साढ़े 6 साल पहले जब एक दिन का बच्चा मिला था, तो उसके बारे में किसी ने भी नहीं सोचा था कि उसका भविष्य हजारों किलोमीटर दूर विदेश में होगा। अनाथालय में पले इस मूक-बधिर बच्चे को अब यूरोपीय देश स्पेन की एक महिला ने गोद ले लिया है। बच्चे की विदाई हुई तो यहां सबकी आंखों से आंसू छलक आए। संस्था की लड़कियां तो चुप ही नहीं हो रही थीं। उन्होंने सगी बहनों की तरह उसे इतने प्यार से पाला था कि वह एक पल के लिए भी उनसे दूर नहीं रहता था। जब उन्हें अहसास हुआ कि वह यहां से अकेले ही जा रहा था तो उनका दर्द छलक उठा।

गूंगे—बहरे बच्चे का भविष्य अब स्पेन में

गूंगे—बहरे बच्चे का भविष्य अब स्पेन में

संवाददाता ने बताया कि, यहां अनाथालय में साढ़े छह साल के उस बच्चे का नाम हर्ष रखा गया था। जब वह पैदा हुआ था तो दूसरे ही दिन उसके माता-पिता कच्छ में कहीं छोड़ गए थे। उसे अनाथालय लाया गया। जहां जन्म के 3 से 4 माह बाद पता चला कि वह गूंगा-बहरा है। तब अनाथालय में उसे कोकेल थैरेपी का सहारा दिया गया। इस तरह वह आज मशीन से सुन सकता है और थोड़ा-थोड़ा बोल भी सकता है। उसके बारे में बताते हुए कच्छ बाल कल्याण समिति की चेयरपर्सन दीपाबेन बोलीं कि, हर्ष का भविष्य अब स्पेन में होगा।'

कौन हैं हर्ष को गोद लेने वाली महिला

कौन हैं हर्ष को गोद लेने वाली महिला

दीपाबेन आगे बोलीं कि, ''कच्छ महिला कल्याण केंद्र और कारा संस्था के सहयोग से बच्चों का पालन-पोषण किया जाता है। जिस औरत ने हर्ष को गोद लिया है, वह स्पेन की नोर्मा मार्टिनीस है। नोर्मा मार्टिनीस ने काफी समय पहले हमसे संपर्क किया था, लेकिन लॉकडाउन के चलते वह करीब 6 महीने बाद इंडिया आ सकीं। उन्होंने हर्ष को कानूनी रूप से गोद लिया है। वह स्पेन की सिंगल मदर हैं। उन्होंने हर्ष को गोद में लेकर कहा- थैंक्यू इंडिया, मुझे इस बच्चे का मातृत्व देने के लिए।

'जिंदगी में ऐसा पहली बार देखा'

'जिंदगी में ऐसा पहली बार देखा'

इस मौके पर नोर्मा मार्टिनीस ने आश्रम के हरेक व्यक्ति से मिलकर आभार जताया। वहीं, इस दौरान कच्छ के पुलिस अधिकारी सौरभ सिंह भी भावुक हो गए और बोलते-बोलते रुक गए। उन्होंने कहा कि जिंदगी में ऐसा पहली बार देखा।'

आखिरी पलों में लिपटकर रोया

आखिरी पलों में लिपटकर रोया

बता दें कि, जब संस्था ने हर्ष को उनकी नई मां नोर्मा के सौंपने की तैयारी की तो आखिरी पलों में वह अपनी बहनों से लिपटकर रोने लगा। उसे रोता देख संस्था की सभी लड़कियां रोने लगीं।

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