Gorakhnath Mandir: राजनीति की दिशा व दशा तय करता गोरक्षपीठ, ऐसा अभेद्य किला जहां विरोधियों की एक न चली
Political Importance of GorakhNath temple of Gorakhpur: उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में स्थित गोरखनाथ मंदिर नाथ संप्रदाय का विश्व प्रसिद्ध मंदिर है। यह सनातन धर्म मानने वालों के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र हैं। देश ही नहीं विदेशाें में भी इस मठ में आस्था रखने वाले लोग हैं। आध्यात्म के साथ ही साथ यह राजनीति का भी प्रमुख केंद्र हैं। इस पीठ के पीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री हैं। इतना ही नहीं सीएम बनने से पहले वह गोरखपुर संसदीय सीट से लगातार पांच बार सांसद थे। इससे पहले इनके गुरु महंत अवैद्यनाथ इसी सीट से चार बार सांसद रहे थे। इतना ही नहीं राजनीति में पीठ का महत्व महंत दिग्विजय नाथ के समय से ही चलता चला आ रहा है। लेकिन इसे बुलंदियों पर ले जाने का कार्य वर्तमान पीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ ने किया।

महंत दिग्विजयनाथ निर्दल उम्मीदवार के रूप में चुनाव मैदान में उतरे
1967 के चुनाव में महंत दिग्विजयनाथ निर्दल उम्मीदवार के रूप में चुनाव मैदान में उतरे और कांग्रेस के प्रत्याशी को हार का मुंंह देखना पड़ा। वह दो साल बाद ही ब्रम्हलीन हो गए। इसके बाद वर्ष 1969-70 के उपचुनाव में गोरक्षनाथ मठ के महंत दिग्विजयनाथ के उत्तराधिकारी महंत अवैद्यनाथ ने निर्दल पर्चा भरा और चुनाव जीत गए। लेकिन इसके अगले चुनाव में वर्ष 1971 में कांग्रेस ने यह सीट फिर से कब्जे में कर ली। इस बार यहां से कांग्रेस के नरसिंह नारायण पांडेय ने जीत हासिल की और निर्दलीय महंत अवैद्यनाथ को इस चुनाव में हार मिली। वर्ष 1977 चुनाव में भारतीय लोक दल से हरिकेश बहादुर और कांग्रेस के नरसिंह नारायण पांडेय के बीच मुकाबला हुआ। इस चुनाव में महंत अवैद्यनाथ मैदान में नहीं उतरे। वह मीनाक्षीपुरम में हिन्दूओं की धर्मांतरण की घटना से इतने दुखी हुए कि सक्रिय राजनीति से संन्यास लेने की घोषणा कर दी।
Recommended Video
महंत अवैद्यनाथ ने दोबारा राजनीति में अपनी सक्रियता बढ़ाई राजनीति से संन्यास लेने के बाद एक दौरान ऐसा आया जब महंत अवैद्यनाथ ने दोबारा राजनीति में अपनी सक्रियता बढ़ाई। समय था वर्ष 1989 का जब हिन्दू महासभा के टिकट पर दूसरी बार अवैद्यनाथ सांसद बने। वर्ष 1991 के चुनाव में महंत अवैद्यनाथ बीजेपी में शामिल हो गए। इस बार भी वह सांसद बनने में कामयाब रहे। 1996 के चुनाव में भी बीजेपी ने उन्हें उम्मीदवार बनाया और वह विजयी हुए।
Gorakhpur News: लोकसभा चुनाव की व्यस्तताओं के बीच गोरखनाथ मंदिर में गौ सेवा करते CM Yogi, देखें Video
जब राजनीति में योगी आदित्यनाथ की हुई एंट्री
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री और गोरक्षपीठाधीश्वर की राजनीति में एंट्री वर्ष 1998 के चुनाव में हुई। वह बीजेपी के टिकट पर पहली बार सांसद बने। इसके बाद योगी आदित्यनाथ 1999, 2004, 2009 और 2014 में लगातार पांच बार गोरखपुर से सांसद निर्वाचित होते रहे। वर्ष 2017 में यूपी का सीएम बनने के कारण उन्हें सांसद पद से इस्तीफा देना पडा।
पिछले तीन दशकों से अधिक समय से पीठ का है दबदबा
इसके बाद वर्ष 2018 के उपचुनाव में बीजेपी के प्रत्याशी को यहां हार का सामना करना पडा इस सीट से सपा के प्रवीण निषाद को जीत हासिल हुई लेकिन वर्ष 2019 के चुनाव में भाजपा ने यहां से भोजपुरी अभिनेता रविकिशन को प्रत्याशी बनाया जिसके बाद यह सीट फिर बीजेपी के खाते में चली गई। अब इस चुनाव में भी भाजपा ने रविकिशन को ही पार्टी ने उम्मीदवार बनाया है। इस तरह पिछले तीन दशकों से अधिक समय से गोरक्षपीठ का दबदबा कायम है।












Click it and Unblock the Notifications