DDU University News: अंग्रेजी विभाग में हुआ स्वरचित कविता लेखन प्रतियोगिता का आयोजन

Gorakhpur News: दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय गोरखपुर के अंग्रेजी विभाग में आज *"व्हिस्पर्स ऑफ़ द म्यूज"* स्वरचित कविता लेखन प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें स्नातकोत्तर छात्रों की रचनात्मक प्रतिभाओं का प्रदर्शन किया गया। इस प्रतियोगिता में छात्रों ने विभिन्न विषयों पर प्रतिभागियों ने हिंदी तथा अंग्रेजी में अपनी कविताएँ प्रस्तुत कीं, जो उनकी गहरी भावनाओं और अनुभवों को दर्शाती हैं।

"आइए घूम लीजिए, ऐतिहासिक मिट्टी को माथे पर लगाकर होठों से चूम लीजिए।"
थर्ड सेमेस्टर की पूजा राय की इस कविता ने गोरखपुर की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर को बेहद सुंदरता से प्रस्तुत किया। उनकी कविता, "आइए घूम लीजिए", में शहर के प्रमुख स्थलों, धार्मिक और पर्यटन महत्व की जगहों का मनमोहक वर्णन किया गया। कविता की पंक्तियाँ इस प्रकार हैं:

ddu

शीर्षक: आइए घूम लीजिए
"ऐतिहासिक मिट्टी को माथे पर
लगा होठों से चूम लीजिए।
बहुत मशहूर है ये शहर
आइए गोरखपुर घूम लीजिए।

दर्शन कीजिए गोरखनाथ मंदिर में
बाबा की महिमा अपार है।
शुद्ध, ताजा हवा और मनोरंजन के लिए
नौका विहार है।
शॉपिंग के लिए एडी, कबीर,
ओरियन और सिटी मॉल हैं।
विश्वस्तरीय शिक्षा के लिए
विश्वविद्यालय दीनदयाल हैं।"

पूजा राय की यह कविता गोरखपुर शहर की गरिमा, उसकी सांस्कृतिक धरोहर और मनोरंजन स्थलों के प्रति एक विशेष दृष्टिकोण को उजागर करती है।

एम ए तृतीय सेमेस्टर की विद्यार्थी श्वेता उपाध्याय ने अपनी कविता *"अनसीन स्टार"* में स्कूल में पढ़ रहे उन विद्यार्थियों की मनोस्थिति के बारे मे बताया जो की कुछ विषयों में ही अच्छा नहीं कर पाते हैं , जिससे कि उनकी प्रतिभा उनके मन तक ही सीमित रह जाती है।
जाह्नवी सिंह ने अपनी कविता *"काव्याग्नि"* में राम, शिव, कृष्ण और दुर्गा का उल्लेख करते हुए बताया कि इन पौराणिक कथाओं से मिली सीख उनके जीवन को कैसे प्रभावित करती है। उन्होंने प्राचीन कथाओं को आज के जीवन से जोड़कर प्रस्तुत किया।
आनंद सिंह ने अपनी कविता *"एक रोटी"* में रोटी के माध्यम से भूख, यादें और संघर्षों की गहराई को दर्शाया । जो हमें याद दिलाती है कि जीवन के सबसे सरल और सच्चे सुख अक्सर छोटे-छोटे चीजों में छिपे होते हैं।

रितिका वर्मा ने अपनी कविता *"सवाल है "* में अनकहे प्यार और उलझन का वर्णन किया। इसमें प्रेम की उन भावनाओं का चित्रण है जो बिन कहे रह जाती हैं, सवालों और मलाल के साथ, जहां दिल की बातें कही नहीं जाती लेकिन फिर भी एक अजीब कशमकश और जुड़ाव बना रहता . इसके अतिरिक्त थर्ड सेमेस्टर से सुधांश राय, आयुषी राव, सुनील कुमार, अफ़ान राशिद , कुशाग्र मिश्रा , विपिन यादव , शिवानी पटवा ने भी अपनी स्वरचित कविता प्रस्तुत की .

एम. ए प्रथम सेमेस्टर की छात्रा अंजू उपाध्याय ने अपनी कविता *प्रेम की भाषाएं* में श्री कृष्ण के जीवन का संक्षिप्त वर्णन, पारिवारिक, प्रेम संबंध, विरह, एवं आदर्श विषयों का समागम, बाल अवस्था की किलकारी, किशोर अवस्था का नटखटपन,श्री कृष्ण का गीता में संबोधन का अर्थ के बारे में वर्णन किया।

अनुष्का राय ने अपनी कविता " परिचय " में कहा " एक और निर्भया नहीं चाहिए, तुमको अब लड़ना होगा . अनुष्का ने एक अलग कविता में आभार ज्ञापित करते हुए कहा लिटरेरी टर्म्स ही नहीं ,लाइफ के प्रॉब्लम्स को भी बताया क्लास के लेक्चर्स के साथ ही प्रॉब्लम्स का सलूशन भी बताया
डरते थे हम बेंच से स्टेज तक आने में
पर अब ये कॉन्फिडेंस भी तो आपसे ही आया है"

रेशु ने अपनी कविता "वो बचपन की स्माइल लौटा दो" से खूब तालियाँ बटोरी . इसके अतिरिक्त प्रथम सेमेस्टर से नेहा गुप्ता , हबीबा, प्रांजलि मिश्रा , नीलाक्षी तिवारी , निहारिका , प्राची चौधरी , सुरभि , सुकृति सिंह , अंजलि वर्मा , स्वाति गहलोत , रेखा तिवारी ने अपनी कविताओं को पेश किया
यह कविता लेखन प्रतियोगिता, जिसे दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के अंग्रेजी विभाग द्वारा आयोजित किया गया, लगभग तीन दर्जन छात्रों की रचनात्मकता और अभिव्यक्ति का साक्षी बना। इस प्रतियोगिता में हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में कविताएँ प्रस्तुत की गईं, और विद्यार्थियों ने पौराणिकता, समाज, प्रेम, और व्यक्तिगत अनुभवों पर आधारित कई विषयों पर अपनी कविताएँ सुनाईं।

विभागाध्यक्ष प्रोफेसर अजय कुमार शुक्ला ने कहा कि इस प्रकार की साहित्यिक प्रतियोगिताएँ हमारे छात्रों को न केवल अपनी रचनात्मकता व्यक्त करने का अवसर प्रदान करती हैं, बल्कि उन्हें अपने सामाजिक और सांस्कृतिक अनुभवों को कविता के माध्यम से व्यक्त करने में भी मदद करती हैं। यह मंच छात्रों को अपने भीतर के कवि को खोजने और साहित्यिक जगत में अपनी पहचान बनाने का अवसर देता है।

DDU University News: व्हिस्पर्स ऑफ़ द म्यूज प्रतियोगिता में विद्यार्थी दिखायेंगे अपनी रचनात्मकता
उन्होंने बताया कि ये सारी गतिविधियां विद्यार्थियों के लिए तथा विद्यार्थियों द्वारा ही आयोजित की जाती हैं , इस प्रतियोगिता का संचालन प्रकृति पटेल और श्वेता उपाध्याय ने किया तथा विशेष योगदान कुशाग्र मिश्रा तथा आनंद सिंह का रहा।
कुलपति, प्रो. पूनम टंडन ने इस प्रतियोगिता की सराहना करते हुए कहा, कि यह पहल छात्रों को साहित्यिक और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। हमारे विश्वविद्यालय में इस प्रकार की गतिविधियाँ छात्रों के समग्र विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। इस प्रतियोगिता के जूरी सदस्यों में विभागाध्यक्ष प्रो. अजय कुमार शुक्ला के अतिरिक्त डॉ. आमोद राय,डॉ. पंकज कुमार सिंह, और डॉ. बृजेश कुमार शामिल थेजूरी ने छात्रों की प्रस्तुतियों की सराहना की और उनके रचनात्मक दृष्टिकोण की प्रशंसा की। सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को पुरस्कार और प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया गया।

Notifications
Settings
Clear Notifications
Notifications
Use the toggle to switch on notifications
  • Block for 8 hours
  • Block for 12 hours
  • Block for 24 hours
  • Don't block
Gender
Select your Gender
  • Male
  • Female
  • Others
Age
Select your Age Range
  • Under 18
  • 18 to 25
  • 26 to 35
  • 36 to 45
  • 45 to 55
  • 55+