CM Yogi Adityanath की 'पात्र देवता' के रूप में होगी पूजा, 'दंडाधिकारी' की भूमिका में आएंगे नजर

CM Yogi News Gorakhpur: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ नाथ संप्रदाय के विश्व प्रसिद्ध मंदिर गोरखनाथ के पीठाधीश्वर भी हैं। सूबे के मुखिया होने के बाद भी उन्होंने कभी भी अपनी परंपराओं का नहीं तोड़ा। एक तरफ जहां वह प्रदेश की जनता के प्रति वफादार हैं तो वहीं दूसरी तरफ नाथ संप्रदाय के लिए समर्पित। शारदीय नवरात्र के प्रारंभ से ही गोरखनाथ मंदिर में कई कार्यक्रमों का आयोजन शुरु हो जाता है। जिसका क्रम विजयदशमी तक चलता है। आज विजयदशमी है सीएम योगी ने पारंपरिक परिधान में गुरु गोरक्षनाथ की पूजा अर्चना की। शोभायात्रा में शामिल हो चुके हैं। इसके बाद रात्रि में सीएम योगी नाथ संतों के लिए दंडाधिकारी की भूमिका में नजर आएंगे।

पात्र देवता के रुप में पीठाधीश्वर होंगे प्रतिष्ठित विजयदशमी की रात पीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ सर्वप्रथम संतों द्वारा पात्र देवता के रुप प्रतिष्ठित होते हैं। उसके बाद उनकी पूजा की जाती है। पात्र पूजा अनुशासन का पर्याय मानी जाती है। पात्र देवता के सामने कोई झूठ नहीं बोलता है।

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तीन घंटे तक चलेगी अदालत पात्र पूजा के दौरान संतों की अदालत करीब तीन घंटे लगती है। इस दौरान किसी को भी पूजा परिसर से बाहर जाने की अनुमति नहीं होती।

सिर्फ ये संत ही होते हैं शामिल पूजा में केवल वही संत और पुजारी हिस्सा लेते हैं, जिन्होंने नाथ पंथ के किसी योगी से दीक्षा ग्रहण की हो। पूजा के दौरान सभी को अपने गुरु का नाम बताना पड़ता है।

दंडाधिकारी के ये हैं अधिकार संतों की अदालत में अगर किसी संत के विरुद्ध कोई शिकायत सही पाई जाती है या कोई नाथ परंपरा के खिलाफ किसी गतिविधि में संलिप्त मिलता है तो गोरक्षपीठाधीश्वर संबंधित संत पर कार्रवाई का निर्णय लेते हैं। सजा और माफी दोनों का अधिकार पात्र देवता को होता है।

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