Indian Railway: रेलवे ने 52स्टेशनों पर शुरु की यह व्यवस्था,यहां देखे पूरी डिटेल
इंडियन रेलवे ने पूर्वोत्तर रेलवे के 52 स्टेशनों पर नई व्यवस्था शुरु की है।इसके तहत अब जनरल टिकटों की बुकिंग प्राइवेट कर्मचारी करेंगे। रेलवे प्रशासन ने एनएसजी- 5 और एनएसजी-6 श्रेणी (नान सबअर्बन ग्रुप) के सभी स्टेशनों पर स
गोरखपुर,18सितंबर: इंडियन रेलवे ने पूर्वोत्तर रेलवे के 52 स्टेशनों पर नई व्यवस्था शुरु की है।इसके तहत अब जनरल टिकटों की बुकिंग प्राइवेट कर्मचारी करेंगे। रेलवे प्रशासन ने एनएसजी- 5 और एनएसजी-6 श्रेणी (नान सबअर्बन ग्रुप) के सभी स्टेशनों पर स्टेशन टिकट बुकिंग एजेंट रखने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

पूर्वोत्तर रेलवे के सीपीआरओ पंकज कुमार सिंह ने बताया कि नई व्यवस्था के तहत वाराणसी मंडल प्रशासन ने एनएसजी - 5 व 6 श्रेणी के 31 स्टेशन व जंक्शन पर 41 एसटीबीए रखने की प्रक्रिया लगभग पूरी कर ली है। लखनऊ मंडल प्रशासन ने गोरखपुर कैंट, सहजनवां, पीपीगंज, मगहर, बृजमनगंज, शोहरतगढ़ और लक्ष्मीपुर सहित 52 स्टेशनों पर एसटीबीए तैनात करने के लिए टेंडर निकाल दिया है। जानकारों के अनुसार एजेंट कमीशन के आधार पर रेलवे के जनरल टिकटों की बिक्री करेंगे।
इस व्यवस्था से स्टेशनों पर टिकट बुकिंग को लेकर आए दिन की किचकिच समाप्त होगी। रेलकर्मियों की मनमानी नहीं चलेगी। यात्रियों को समय से टिकट मिलेंगे। मानव संसाधन के नाम पर हो रहे रेलवे के खर्चों में भी कटौती होगी। वैसे भी रेलवे बोर्ड मानव संसाधन के मद में हो रहे खर्चों को कम करने और आउटसोर्सिंग बढ़ाने पर जोर दे रहा है। गोरखपुर सहित प्रमुख स्टेशनों के पूछताछ काउंटर और एनाउंस सिस्टम (सूचना व घोषणा प्रणाली) भी निजी हाथों में सौंप दी गई है।
यात्रियों की सुविधा के लिए पूर्वोत्तर रेलवे प्रशासन ने गोरखपुर और लखनऊ सहित 37 स्टेशनों के आसपास यात्री टिकट सुविधा केंद्र (वाइटीएसके) खोलने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी है। जनसाधारण टिकट बुकिंग सेवक (जेटीबीएस) की तरह वाइटीएसके भी स्टेशन के आसपास शहर और कस्बों के मोहल्लों में खाेले जाएंगे। इन केंद्रों से आरक्षित और अनारक्षित दोनों तरह के टिकट बुक किए जा सकेंगे। भारतीय रेलवे 67,415 किमी के मार्ग की लंबाई के साथ आकार में दुनिया के चौथे सबसे बड़े रेलवे नेटवर्क का प्रबंधन करता है। सरकार के आंकड़ों के अनुसार, भारतीय रेलवे को अगले 12 साल के लिए 50 लाख करोड़ रुपए की जरूरत होगी, जबकि सरकार के पास इतना रुपया केवल इस सेक्टर पर खर्च करने के लिए नहीं है। भारतीय रेलवे को केंद्र सरकार सार्वजनिक कल्याण के लिए चलाती है ना कि लाभ कमाने के उद्देश्य से। भारत में रेल किसी व्यावसायिक संगठन की तरह नहीं, एक सार्वजनिक सेवा की तरह चलती रही है।
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