कृषि कानून के विरोध में किसानों ने ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे किया जाम, करें वैकल्पिक रास्तों का प्रयोग

कृषि कानून के विरोध में किसानों ने ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे किया जाम, करें वैकल्पिक रास्तों का प्रयोग

गाजियाबाद। केंद्र सरकार द्वारा बनाए गए तीनों कृषि कानूनों के खिलाफ किसान पिछले काफी महीनों से दिल्ली बॉर्ड पर डटे हुए है। लेकिन केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार सड़क पर बैठे इन अन्नदाताओं की तरफ कोई ध्यान नहीं दे रही है। तो वहीं, अब किसानों का धैर्य भी जवाब देने लगा है। शनिवार (10 अप्रैल) को बड़ी संख्य में किसान गाजियाबाद के डासना इलाके में ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे पहुंच गए और हाईवे को जाम कर दिया।

Eastern Peripheral Expressway blocked by farmers protesting against the three farm laws

हाईवे पर जाम लगा रहे किसानों का कहना है कि वो पिछले चार महीने से अपनी मांगों को लेकर धरना पर बैठे हुए हैं, लेकिन सरकार उनकी तरफ ध्यान नहीं दे रही है। किसानों ने कहा कि लगता है केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार गहरी नींद में सोई हुई है। अब सरकार को गहरी नींद से जगाने का वक्त आ गया है। सरकार को नींद से जगाने के लिए किसान नेताओं ने ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेसवे को शनिवार सुबह 8 बजे जाम कर दिया। बता दें कि ये जाम रविवार सुबह 8 बजे तक रहेगा।

किसान नेता जगतार सिंह बाजवा की अगुवाई में किसान नेता केएमपी पर जुटे हुए हैं। इसकी वजह से कई किलोमीटर लंबा जाम लगना शुरू हो गया है। हालात संभालने के लिए पुलिस ने कई जगहों से ट्रैफिक को दूसरी सड़कों पर डाइवर्ट करना शुरू कर दिया है। एसपी ट्रैफिक, गाजियाबाद ने जानकारी देते हुए कहा किसानों ने केएमपी जाम कर दिया है। हम लोग जल्दी ही इसे खाली कराने के लिए बात कर रहे हैं ताकि लोगों को असुविधा न हो। लोग अपने वैकल्पिक रूट पर जा रहे हैं। जो भी उपयुक्त स्थान है वहां से डायवर्जन किया जा रहा है। लोग वहां से अपने गंतव्य की तरफ जा रहे हैं।

वहीं, ईस्टर्न पेरिफेरल एक्सप्रेस-वे पर धरने पर बैठे किसानों का कहना है कि सरकार किसानों की बातों को अनदेखा कर रही है। जबकि किसान देश की रीढ़ की हड्डी माना जाता है और इस अन्नदाता कहा जाता है। लेकिन अन्नदाता का सरकार द्वारा घोर अपमान किया जा रहा है। पिछले चार महीने से भी ज्यादा किसानों को धरने पर बैठे हुए हो चुके हैं, लेकिन किसी का भी इस तरफ कोई ध्यान नहीं है। किसान नेताओं ने कहा कि किसान अब ये मन बनाए हुए हैं कि जब तक उनकी मांग पूरी नहीं होती, वह घर वापसी नहीं करेगा।

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