• search
गांधीनगर न्यूज़ के लिए
नोटिफिकेशन ऑन करें  

35 साल बाद गुजरात में दिखा बाघ, किया गायों पर हमला, वापस ले जाएगी मप्र सरकार

|

Gujarat News, गांधीनगर। गुजरात में 35 साल बाद बाघ होने की पुष्टि के बाद एक गांव में गायों पर हमले किए जाने की खबर आई है। मध्य गुजरात के लूणावाड़ा स्थित कोठा गांव में बाघ ने एक गाय का शिकार भी किया। जिसका शव मिलने के बाद से वन विभाग ने यहां बाघ का पता लगाने के लिए सर्वे शुरू कर दिया है। वहीं, इस बाघ के मध्य प्रदेश से गुजरात पहुंचने की जानकारी मिलने पर मप्र सरकार ने उसकी वापसी की तैयारी की है। इसके लिए बाकायदा मध्य प्रदेश वनविभाग की एक टीम गुजरात के जंगल में भेजी जा रही है, जो बाघ को पकड़कर ले जाएगी।

1983 के बाद गुजरात में अब दिखा बाघ, किया गायों पर हमला

1983 के बाद गुजरात में अब दिखा बाघ, किया गायों पर हमला

गुजरात के वन विभाग के अनुसार, महिसागर जिले के संतरामपुर के जंगल में 35 साल बाद बाघ देखा गया है। इससे पहले यहां बाघ 1983 में मिला था। बाघ दिखने के साथ ही इसी के साथ गुजरात देश का पहला राज्य हो गया, जहां के जंगलों में शेर, बाघ और तेंदुआ तीनों मौजूद हों।

बहरहाल, कोठा गाँव के पास बाघ द्वारा मालधारियों की गायों पर हमला करने जानकारी सामने आई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि बाघ ने एक गाय का शिकार किया। जिसके बाद ग्रामीण सतर्क हो गए और राज्य के वनकर्मियों को सूचित किया।

59 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में 200 जवानों का सर्च ऑपरेशन

59 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में 200 जवानों का सर्च ऑपरेशन

बाघ को लेकर एक वन अधिकारी हेमंत सुथार ने कहा, यह तो पक्का हो गया है कि गुजरात में बाघ हैं, लेकिन कितने हो सकते हैं, इसका सही अंदाजा नहीं लग पाया है। बाघ के गुजरात में होने के पीछे यह वजह होगी कि मध्य प्रदेश के वन क्षेत्रों में उन्हें अन्य पशुओं का शिकार नहीं मिल पा रहा हो। क्योंकि मध्य प्रदेश में अन्य पशुओं के शिकार की कमी हो चली है तो बाघ गुजरात की ओर बढ़ रहे हैं। ऐसे में बाघों की मौजूदगी का पता लगाने के लिए सूबे में लुणावाड़ा और संतरामपुर के 59 हजार हेक्टेयर इलाके में 200 जवानों के साथ सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है।

वीडियो में दिखा बाघ, किसान दिन-रात कर रहे चौकसी

वीडियो में दिखा बाघ, किसान दिन-रात कर रहे चौकसी

वन-विभाग कर्मियों के हाथ लगे एक वीडियो में जो बाघ दिखा है, वह गढ़ गाँव के पास स्थित कोठा गाँव में बताया जा रहा है। कोठा गांव की दूरी 40 किलोमीटर है। गायों पर हमला होने के वजह से इस गाँव के पशुपालक दिन-रात अपने पशुओं की चोकीदारी कर रहे है। दूसरी ओर, मध्य प्रदेश वन विभाग के कर्मचारियों की टीम के 3 दिन के लिए गुजरात आने की संभावना है। इस टीम पर बाघ को वापस मध्य प्रदेश ले आने की जिम्मेदारी है।

35 साल बाद गुजरात में लौटे बाघ, नाइट विजन कैमरे ने किया कैद, मौजूदगी का पता लगाने 5 टीमें जुटीं

गुजरात के शेर चाहती है मध्य प्रदेश सरकार

गुजरात के शेर चाहती है मध्य प्रदेश सरकार

वहीं, गुजरात में मध्य प्रदेश का बाघ आने की खबर के बीच मध्य प्रदेश सरकार ने केंद्र से गुजराती शेरों को मध्य प्रदेश भेजने की मांग दोहराई है। यहां की सरकार गुजरात के शेरों को अपने प्रदेश में भी लाना चाहती है, लेकिन गुजरात सरकार अपने शेरों को भेजने के लिए तैयार नहीं है। कुछ साल पहले जब दो शेर गुजरात ने मध्य प्रदेश भेजे थे, तब प्रतिकूल वातावरण की वजह से उनकी मृत्यु हो गई थी। ऐसे में गुजरात अपने शेर मध्य प्रदेश में भेजना नहीं चाहता।

गांव में घुसे 5 शेरों के झुंड ने मचाया तांडव, 67 भेड़-बकरियां मारीं, कुछ को मुंह से दबाकर जंगल भागे

मध्य प्रदेश के तर्क कि गुजरात शेर दे, हम बाघ देंगे

मध्य प्रदेश के तर्क कि गुजरात शेर दे, हम बाघ देंगे

वहीं, मध्य प्रदेश के वनविभाग का यह भी कहना है कि अगर गुजरात शेर भेजता है तो मध्य प्रदेश गुजरात को बाघ देने को तैयार है। हाल ही मध्य प्रदेश की कांग्रेस सरकार ने फैसला किया है कि जो बाघ गुजरात गया है, उसे वापस लाया जाएगा।

वनइंडिया हिंदी डॉट कॉम पर शेर, बाघ तेंदुए से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए:

1983 के बाद अब हुई गुजरात में बाघ होने की पुष्टि; शेर, बाघ, तेंदुए की मौजूदगी वाला पहला राज्य बना

जीवनसंगी की तलाश है? भारत मैट्रिमोनी पर रजिस्टर करें - निःशुल्क रजिस्ट्रेशन!

देश-दुनिया की ताज़ा ख़बरों से अपडेट रहने के लिए Oneindia Hindi के फेसबुक पेज को लाइक करें
English summary
Tiger spotted in Gujarat after 35 years, attack on cows there forest
For Daily Alerts

Oneindia की ब्रेकिंग न्यूज़ पाने के लिए
पाएं न्यूज़ अपडेट्स पूरे दिन.

Notification Settings X
Time Settings
Done
Clear Notification X
Do you want to clear all the notifications from your inbox?
Settings X
X
We use cookies to ensure that we give you the best experience on our website. This includes cookies from third party social media websites and ad networks. Such third party cookies may track your use on Oneindia sites for better rendering. Our partners use cookies to ensure we show you advertising that is relevant to you. If you continue without changing your settings, we'll assume that you are happy to receive all cookies on Oneindia website. However, you can change your cookie settings at any time. Learn more