World Population Day: क्यों मनाते हैं विश्व जनसंख्या दिवस, कब हुई इसकी शुरुआत

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    World Population Day को 11th July ही क्यों मनाते है, जानें क्या है History | वनइंडिया हिंदी

    नई दिल्ली। आज विश्व जनसंख्या दिवस है, इस दिन को मनाने के पीछे कारण ,हर सेकंड बढ़ रही आबादी के मुद्दे पर लोगों का ध्यान खींचना है। इस दिन की शुरुआत संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) की शासी परिषद द्वारा पहली बार 1989 में तब हुई जब आबादी का आंकड़ा करीब पांच बिलियन के आस-पास पहुंच गया था। संयुक्त राष्ट्र की गवर्निंग काउंसिल के फैसले के अनुसार, वर्ष 1989 में विकास कार्यक्रम में, विश्व स्तर पर समुदाय की सिफारिश के द्वारा यह तय किया गया कि हर साल 11 जुलाई विश्व जनसंख्या दिवस के रूप में मनाया जाएगा।

    विश्व जनसंख्या दिवस 11 जुलाई को...

    विश्व जनसंख्या दिवस 11 जुलाई को...

    इस दिन के जरिए लोगों का ध्यान प्रजनन स्वास्थ्य समस्याओं की ओर भी दिलाना है क्योंकि खराब स्वास्थ्य दुनिया भर में गर्भवती महिलाओं की मौत का प्रमुख कारण है। भारत और चीन समेत दुनिया के कई देश आज बढ़ती जनसंख्या पर पैनी नज़र रखने लगे हैं। विकास की राह पर आगे बढ़ने की कोशिश में लगे देशों के लिए बढ़ती आबादी आज एक अहम मुद्दा है।

    इन सबके अलावा और भी कुछ कारण हैं, जिसके लिए ये दिन मनाया जाता है और वो कारण निम्नलिखित है...

    अवांछित गर्भधारण से बचने के लिए शिक्षित करना....मकसद है...

    अवांछित गर्भधारण से बचने के लिए शिक्षित करना....मकसद है...

    • युवाओं को उचित उपायों का उपयोग करके अवांछित गर्भधारण से बचने के लिए शिक्षित करना।
    • सुरक्षित यौन संबंधों के प्रति लोगों को प्रेरित करना।
    • कम उम्र और अधिक उम्र में होने वाली शादी के प्रभाव के बारे में समझाना।
    • जन्म के खतरे के बारे में जन जागरूकता बढ़ाना

      जन्म के खतरे के बारे में जन जागरूकता बढ़ाना

      • प्रारंभिक जन्म के खतरे के बारे में जन जागरूकता बढ़ाना।
      • लोगों को गर्भधारण संबंधी बीमारियों के बारे में शिक्षित करना।
      • कन्या भ्रूण हत्या से रोकना।
      • हर जगह प्रजनन स्वास्थ्य सेवायें आसानी से पहुंच सकें।
      • जनसंख्या भारत के लिए अहम चुनौती

        जनसंख्या भारत के लिए अहम चुनौती

        आंकड़ों की मानें तो केवल भारत में हर मिनट 25 बच्चे पैदा होते हैं, ये वो आंकड़ा है जो कि अस्पतालों में दर्ज है लेकिन भारत में अभी भी बहुत सारे बच्चे अस्पताल में पैदा नहीं होते हैं इसलिए उनका आंकड़ा कहीं पर मौजूद नहीं है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगर भारत ने अपनी तेजी से बढ़ रही जनसंख्या की दर कम करने के लिए जल्दी कुछ ठोस कदम नहीं उठाए तो 2030 तक वह विश्व में सबसे बड़ी आबादी वाला देश कहलाएगा।

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