Delhi Book Fair: दिल्ली में शुरू हुआ विश्व पुस्तक मेला, क्या है इसका इतिहास एवं उद्देश्य
लगभग तीन साल के बाद प्रगति मैदान में विश्व पुस्तक मेला ‘आजादी का अमृत महोत्सव’ थीम के साथ फिर से आयोजित हो रहा है। जो 25 फरवरी से 5 मार्च तक चलेगा। जिसमें फ्रांस अतिथि देश के रूप में रहेगा।

Delhi Book Fair: कोरोना महामारी ने भारत सहित दुनिया के लगभग सभी क्षेत्रों को प्रभावित किया। देश की राजधानी दिल्ली भी इससे अछूती नहीं रही। दिल्ली में समय-समय पर अनेक मेलों का आयोजन होता रहता है, जो सभी इस महामारी से बाधित हुए हैं। इसी क्रम में दिल्ली के प्रगति मैदान में हर वर्ष लगने वाला भारत का सबसे बड़ा पुस्तक मेला 'विश्व पुस्तक मेला' (वर्ल्ड बुक फेयर) भी 2020 के बाद से फिजिकल रूप में कोरोना महामारी के कारण बंद रहा। वर्ष 2021 व 2022 में यह वर्जुअल रूप से आयोजित किया गया था। इस वर्ष यह मेला फिजिकल रूप में दिल्ली के प्रगति मैदान में 25 फरवरी से 5 मार्च 2023 तक आयोजित हो रहा है। यह 31वां विश्व पुस्तक मेला है। जिसमें 1000 प्रकाशक और 2000 हजार स्टॉल लगने का अनुमान है।
विश्व पुस्तक मेला क्या है?
नई दिल्ली के प्रगति मैदान में लगने वाला विश्व पुस्तक मेला, कोलकाता पुस्तक मेला के बाद दूसरा सबसे पुराना बुक फेयर है। इस मेले में देश-विदेश के अनेक प्रकाशक अपनी नवीनतम प्रकाशित पुस्तकों को प्रदर्शित करते हैं। इसके अलावा सरकारी, गैर-सरकारी, देशी व विदेशी प्रकाशक भी इसमें हिस्सा लेते हैं।
जैसा कि इसके नाम से ही इसके शब्दिक अर्थ का पता चलता है - पुस्तकों का मेला। ऐसा मेला जिसमें अनेक विषयों जैसे विज्ञान, हिन्दी, साहित्य, गणित, अंग्रेजी व अन्य सभी विषयों की पुस्तकें, पुस्तक प्रेमी को अपनी रुचि अनुसार मिल जाती हैं। मेले में हिन्दी, अंग्रेजी सहित अन्य भाषाओं की पुस्तकों का भी नवीनतम एवं विशाल भंडार होता है। हम यह भी कह सकते है कि ऐसा कोई भी विषय नहीं है, जिससे संबंधित पुस्तकें इस मेले में न मिले।
विश्व पुस्तक मेला का इतिहास
भारत में विश्व पुस्तक मेले का आयोजन दिल्ली में कोलकाता पुस्तक मेले की उल्लेखनीय सफलता के बाद सर्वप्रथम 1972 (18 मार्च से 4 अप्रैल तक) में जनपथ रोड़ के विंडसर प्लेस में आयोजित हुआ था। जिसमें उस समय 200 प्रकाशकों ने भाग लिया था। इस मेले का उद्घाटन तत्कालीन राष्ट्रपति वीवी गिरि ने किया था।
वर्ष 1972 से वर्ष 2012 तक यह मेला हर दो वर्ष में आयोजित होता था। 2012 के उपरांत यह प्रतिवर्ष आयोजित होने लगा तथा इसमें प्रतिभागियों/प्रकाशकों की संख्या भी बढ़ती गई। जहां मेले के प्रारंभ में 4-5 देश ही शामिल होते थे अब इनकी संख्या बढ़कर 30-40 हो गई है।
हर वर्ष लगने वाला विश्व पुस्तक मेला एक थीम के साथ प्रारंभ होता है। इस वर्ष यह 'आजादी का अमृत महोत्सव' थीम के साथ आयोजित हो रहा है। विश्व पुस्तक मेला में विद्यार्थियों, दिव्यांगों व वरिष्ठ नागरिकों का प्रवेश निशुल्क होता है।
विश्व पुस्तक मेला को कौन आयोजित करता है
विश्व पुस्तक मेले का आयोजन राष्ट्रीय पुस्तक न्यास (नेशनल बुक ट्रस्ट - एनबीटी), भारत सरकार द्वारा आयोजित किया जाता है। एनबीटी, भारत सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्रालय के अधीन एक प्रकाशन समूह है। जिसकी स्थापना 1957 में हुई थी। 2023 के विश्व पुस्तक मेले का सह-आयोजक भारत व्यापार संवर्धन संगठन (आईटीपीओ) है।
विश्व पुस्तक मेला का उद्देश्य
निःसंदेह पुस्तकें ज्ञान का भंडार व अनमोल होती हैं। पुस्तकें हमारी सबसे अच्छी मित्र भी होती हैं। पुस्तकें हमारा मार्गदर्शन व प्रोत्साहन करती हैं। पुस्तकों द्वारा ही महापुरुषों/विद्वानों के विचार अमर हो जाते हैं। उनका ज्ञान, उपदेश सदैव जीवित रहता है।
विश्व पुस्तक मेलों का आयोजन मुख्यतः लोगों में पुस्तकों के प्रति रुचि पैदा करने के लिए होता है। जिनका हमारे जीवन में बहुत लाभ है। मेला के आयोजन से जहां पुस्तकों में रूचि रखने वालों को एक ही स्थान पर अनेकों विषयों की पुस्तकों का भंडार मिल जाता है, वहीं पुस्तक प्रकाशकों को भी अपनी पुस्तकें प्रस्तुत करने के लिए एक उचित मंच मिलता है।
इसके अतिरिक्त मेले में प्रकाशक नई पुस्तकों का विमोचन भी करते हैं। जिसमें लेखकों व पाठकों में वार्तालाप भी होता है। जिससे पाठकों को लेखकों से सीधी बात करने का अवसर भी मिलता है। वहीं नए लेखक भी मेले में आए विशिष्ट अतिथियों से अपनी पुस्तकों का विमोचन करा लेते हैं। जिससे उनका और उनकी पुस्तकों का निशुल्क प्रचार भी हो जाता है।
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