Women Empowerment: भेदभाव होता रहा तो 34 करोड़ महिलाएं भूख और गरीबी की शिकार हो जाएंगी
Women Empowerment: महिलाओं के साथ भेदभाव यूं ही जारी रहा तो साल 2030 तक 340 मिलियन यानी 34 करोड़ महिलााएं भूख और गरीबी की जद में होंगी। संयुक्त राष्ट्र संघ की जेंडर स्नैपशॉट रिपोर्ट में कहा गया है कि दुनिया की 8 प्रतिशत महिलाएं भेदभाव का शिकार होकर 2030 तक गरीबी रेखा के नीचे आ जाएंगी। हर चार में से एक को भूखमरी का भी शिकार होना पड़ सकता है। यूएन की रिपोर्ट के अनुसार बिना किसी मजदूरी के महिलाओं को पुरुषों की तुलना में रोजाना 2 से 3 घंटे अधिक काम भी करना पड़ेगा। यूएन की यह रिपोर्ट 7 सितंबर 2023 को जारी हुई थी।
इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि महिलाओं के साथ हर क्षेत्र में भेदभाव तो होता ही है, परंतु नेतृत्व के मुद्दे पर सबसे ज्यादा खराब व्यवहार महिलाओं के साथ ही होता है। यूएन ने दुनिया के सभी देशों से अपील की है कि हम सामूहिक रूप से पूरी तरह जागरूक होते हुए इस भेदभाव को मिटाएं और सभी क्षेत्रों में लड़कियों व महिलाओं को बराबर अधिकार, अवसर और साझेदारी प्रदान करें। रिपोर्ट में पाया गया है कि सबसे ज्यादा भेदभाव की भेंट उम्रदराज महिलाएं होती हैं। 2030 के सस्टेनिबल डेवलमेंट गोल यानी सतत विकास लक्ष्य के पांच सूचकों में से केवल 2 में ही महिलाओं की स्थिति लक्ष्य के मानक के करीब हैं, बाकी में उनकी स्थिति काफी खराब है। यूएन ने यह भी कहा है कि दुनिया में महिलाओं की अधिकारिता और बराबरी के लक्ष्य प्राप्त करने के लिए सालाना 360 अरब डॉलर की जरूरत है।

दुनिया में कोई ऐसा देश नहीं है, जहां महिलाओं को 100 प्रतिशत पुरूषों से बराबरी का व्यवहार होता है। जिन 10 देशों में महिलाओं की पुरुषों की तुलना में सबसे अधिक लैंगिक समानता है, उसमे आइसलैंड में 89.2 प्रतिशत, फिनलैंड में 86.1 प्रतिशत, नार्वे में 84.9 प्रतिशत, न्यूजीलैंड में 84 प्रतिशत, स्वीडन में 82.3 प्रतिशत, नामिबिया में 80.9 प्रतिशत, रवांडा में 80.5 प्रतिशत, लिथुआनिया में 80.4 प्रतिशत, आयरलैंड में 80 प्रतिशत और स्वीटजरलैंड में 79.8 प्रतिशत है। और जिन देशों में महिलाओं की पुरुषों की तुलना में समानता का अधिकार का प्रतिशत सबसे कम हैं उनमें सबसे उपर अफगानिस्तान आता है। केवल 44.4 प्रतिशत। इसके अलावा यमन में 49.2 प्रतिशत, इराक में 53 प्रतिशत, पाकिस्तान में 55.6 प्रतिशत महिलाओं को ही लैंगिक समानता का अधिकार प्राप्त है। सीरिया, ईरान, माली, चाड और सऊदी अरब में भी महिलाओ की स्थिति काफी खराब है।
भारत में भी महिलाओं के प्रति असामनता का प्रतिशत कम नहीं है। दुनिया की रैंकिंग में भारत की स्थिति महिलाओं को बराबर का अधिकार और अवसर देने में 100 से उपर ही है। हालांकि हमारे संविधान में महिलाओं को वही अधिकार प्राप्त हैं जो पुरुषों को हैं। लेकिन हमारा समाज पुरुष प्रधान होने के कारण महिलाओं को आगे आने में काफी दिक्कतें होती हैं। खासकर ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को अभी भी कई कुरीतियों और बंधनों से होकर गुजरना पड़ता है। सरकार का यह दावा है कि उसने महिलाओं को उपर उठाने के लिए बहुत सारे काम किए हैं।
भारत सरकार ने लैंगिक समानता को बढ़ावा देने और महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए विभिन्न पहल और नीतियां शुरू की हैं। बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ - लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा देने और कन्या भ्रूण हत्या के मुद्दे को संबोधित करने के लिए 2015 में शुरू किया गया एक प्रमुख कार्यक्रम है। यह कार्यक्रम लड़कियों की शिक्षा और उन्हें सशक्त बनाने के महत्व के बारे में जागरूकता पैदा करता है।
सुकन्या समृद्धि योजना - बालिकाओं की वित्तीय सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए 2015 में शुरू की गई एक बचत योजना है। यह योजना माता पिता को अपनी बेटियों के भविष्य के लिए बचत करने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए कर लाभ और जमा पर उच्च ब्याज दर प्रदान करती है।
महिला ई हाट महिलाओं की उद्यमिता को बढ़ावा देने और महिलाओं को अपने उत्पादों और सेवाओं को प्रदर्शित करने के लिए एक मंच प्रदान करने के लिए 2016 में शुरू किया गया एक ऑनलाइन मंच है। यह मंच महिला उद्यमियों को अपने उत्पाद और सेवाएं बेचने और वित्तीय स्वतंत्रता को बढ़ावा देने के लिए एक बाजार प्रदान करता है।
प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग की महिलाओं को स्वच्छ खाना पकाने का ईंधन उपलब्ध कराने के लिए 2016 में शुरू की गई एक योजना है, जिससे महिलाओं के स्वास्थ्य में सुधार होगा। यह योजना लकड़ी जैसे पारंपरिक खाना पकाने के ईंधन के उपयोग से होने वाले इंडोर वायु प्रदूषण को कम करती है।
वन स्टॉप सेंटर-हिंसा की शिकार महिलाओं को सहायता और सहायता प्रदान करने के लिए 2015 में शुरू की गई एक योजना है। ओएससी चिकित्सा सहायता, कानूनी सहायता और परामर्श सहित कई प्रकार की सेवाएं प्रदान करते हैं।
मातृत्व लाभ कार्यक्रम - गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं को वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए 2017 में शुरू की गई एक योजना है। यह योजना महिलाओं और उनके बच्चों के स्वास्थ्य और कल्याण को बढ़ावा देती है और मातृ एवं शिशु मृत्यु दर को कम करती है।
लेकिन अभी भी नेतृत्व के मामले में भारतीय महिलाओं को काफी संघर्ष करना पड़ रहा है। इस सम्बन्ध में महिला आरक्षण का उदहारण लिया जा सकता है, जो दशकों से लटका पड़ा है।












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