आखिर क्यों कश्मीर से ज्यादा सियाचिन भारत के लिए अहम
सियाचिन। पिछले एक हफ्ते से 20,000 फीट की ऊंचाई पर मौजूद सियाचिन ग्लेशियर खबरों में है। एक बर्फीले तूफान की वजह से जहां इंडियन आर्मी के नौ रणबांकुरों ने अपनी जान गंवा दी तो वहीं एक बहादुर लांस नायक हनुमनथप्पा
दिल्ली के रिसर्च एंड रेफरल अस्पताल में जिंदगी से जंग लड़ रहे हैं।
200 सैनिकों के साथ मीशा और डॉट ने बचाई हनुमंथप्पा की जिंदगी
यह पहली बार नहीं है जब इस तरह से सैनिकों ने अपनी जान गंवाई है। दुनिया के इस हाइएस्ट वॉर जोन में भारत के साथ पाकिस्तान के सैनिक हर पल तैनात रहते हैं।
आपसी जंग से ज्यादा मौसम से सैनिक जंग करते हैं। आखिर ऐसा क्या है कि इस खतरनाक जगह पर जहां आम आदमी जाने के बारे में भी नहीं सोचेगा भारत ने अपनी सेना को तैनात कर रखा है।
मां को था भरोसा बेटा जरूर आएगा वापस
सियाचिन का ऐसा क्या है रणनीतिक महत्व है कि सैनिक अपनी जान की परवाह न करते हुए भी बिना पलक झपकाए हिफाजत में लगे रहते हैं।
विशेषज्ञों की मानें तो सियाचिन, भारत के लिए कश्मीर से ज्यादा अहमियत रखता है। विशेषज्ञों का मानना है कि सियाचिन ने वर्ष 1984 के बाद से यहां पर कई घुसपैठ और कब्जे की कोशिशों को महसूस किया है।
उनका मानना है जब तक पीओके में आतंकी कैंप्स चल रहे हैं तब तक भारत सियाचिन को सिर्फ कुछ लोगों की मन की शांति के लिए कुर्बान नहीं कर सकता है।
न सिर्फ पाकिस्तान बल्कि चीन की नजरें भी हर पल सियाचिन पर रहती हैं। ऐसे में अपने आप ही इस वॉर जोन की अहमियत देश की सुरक्षा के लिए समझ में आ जाती है।
आगे की स्लाइड्स में पढ़िए इस ग्लेशियर की भारत के लिए अहमियत।

एक दिन का खर्च 10 करोड़ रुपए
कश्मीर से अलग सियाचिन भारत और पाकिस्तान के बीच पिछले तीन दशकों से जंग का मैदान बना हुआ है। यहां पर सेनाओं का तैनात रखने के मकसद से अब तक दोनों देश करीब 600 अरब रुपए तक खर्च कर चुके हैं। एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत इस जगह पर एक दिन में करीब 10 करोड़ रुपए खर्च करता है।

तीन वर्षों में 50 सैनिक शहीद
76 किमी तक फैले इस ग्लेशियर की रक्षा में भारत के करीब 846 सैनिकों ने अपनी जान गंवा दी है। लोकसभा में रक्षा मंत्री की ओर से दिए गए जवाब के मुताबिक पिछले तीन वर्षों में 50 सैनिकों ने कभी मौसम, कभी तूफान तो कभी बाढ़ की वजह से अपनी जान गंवाई है।

पाक ने कर ली थी कब्जे की तैयारी
वर्ष 1984 में पाक ने 33,000 वर्ग किमी तक फैले इस इलाके पर कब्जे की कोशिश की और अपने सैनिकों को भेजना शुरू कर दिया। इसके बाद भारत की सरकार नींद से जागी और फिर इंडियन आर्मी ने पाक सैनिकों को खदेड़ने के लिए 1 3 अप्रैल 1984 को ऑपरेशन मेघदूत लांच किया।

पाक ने यूरोप से हासिल किए कपड़े
सियाचिन में लड़ाई के लिए सभी जरूरी सामान पाकिस्तान ने बहुत पहले ही यूरोप से मंगाया लिया था। वहीं भारत के सैनिकों को ऑपरेशन की रात से एक दिन पहले यानी 12 अप्रैल को स्पेशलाइज्ड यूनिफॉर्म और सारा जरूरी सामान मिला था।

पाक सैनिकों को खदेड़ना
ऑपरेशन मेघदूत के तहत पाकिस्तानी सेना को खदेड़ का सियाचिन के सेला पास, बेलाफोंडला और ग्योंगला पास को कब्जे से वापस लेना था। सियाचिन की ऊंचाई भारत की तरफ से जहां कहीं ज्यादा है तो वहीं पाक की तरफ से यह काफी कम है। इसलिए ऑपरेशन मेघदूत की सफलता को आज तक भारतीय सेना के लिए एक मिसाल करार दिया जाता है।

फिलहाल है शांति
वर्ष 2003 में पाकिस्तान ने भारत से सीजफायर संधि की। इसके बाद से ही यहां पर शांति है। लेकिन इंडियन आर्मी ने किसी भी मुश्किल स्थिति से निबटने के लिए यहां पर अपने 3,000 सैनिकों को तैनात कर रखा है।

1987 में मुशर्रफ ने किया हमला
सितंबर 1987 में पाक के पूर्व राष्ट्रपति जो उस सम य पाक सेना की स्पेशल सर्विस ग्रुप में बतौर ब्रिगेड कमांडर तैनात थे, उन्होंने इंडियन आर्मी को पीछे भेजने के लिए बिलाफोंड ला पोस्ट पर हमला किया था। उन्हें हमले में मुंह की खानी पड़ी थी। ऐसे में साफ है कि भारत कभी भी लापरवाह नहीं हो सकता है।












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