चंदा को 'मामा' ही क्यों कहते हैं, चाचा, ताऊ, फूफा... क्यों नहीं?
नई दिल्ली। 16 तारीख को रात में चांद को ग्रहण लगने वाला है, हालांकि ये ग्रहण भारत में नहीं लगेगा लेकिन खूबसूरती की इस मिसाल पर काली छाया यूरोप, दक्षिण अमेरिका, अटलांटिक और अंटार्कटिका में पड़ेगी। ये एक खगोलीय घटना है जो कि होनी निश्चित है लेकिन आज हम इस बात का जिक्र करते हैंं कि आखिर चांद को मामा क्यों कहा जाता है?
सूरदास के पदों से लेकर कहानी की हर किताब में हम चंदा को प्यारे-प्यारे मामा ही कहते आए हैं। बरसों से हर मां अपने बच्चे को चंदा मामा की लोरी सुनाती आ रही है लेकिन क्या कभी आपने सोचने की कोशिश की आखिर चंदा को मामा ही क्यों कहते हैं, चाचा, ताऊ, फूफा... क्यों नहीं?
तो चलिए आज हम आपको इसका राज बताते हैं। दरअसल पौराणिक कथाओं के अनुसार जिस समय देवताओं और असुरों के बीच में समुद्र मंथन हो रहा था, उस समय समुद्र से बहुत सारे तत्व निकलेंं थे जिसमें मां लक्ष्मी, वारुणी,चन्द्रमा और विष भी थे।
मां लक्ष्मी के छोटे भाई हैं चंद्रमा
लक्ष्मी जी भगवान विष्णु के पास चली गईं, इसलिए उनके बाद जो भी तत्व निकलें वो उनके छोटे भाई और बहन बन गए। चंद्रमा उनके बाद समुद्र से निकले थे इसलिए वो उनके छोटे भाई बन गए और चूंकि लक्ष्मी को हम अपनी माता मानते हैं ना इसलिए उनके छोटे भाई हमारे मामा बन गये। इसी कारण चंदा को मामा कहा जाता है। चूंकि ये सभी समुद्र के मंथन से निकले थे, इस कारण समुद्र ही इन सबके पिता कहलाते हैं।
धरती माता के भाई हैं चंद्रमा
चंदा को मामा कहनेे की कहानी के पीछे दूसरा कारण ये भी बताया जाता है कि चंद्रमा, पृथ्वी के चारों ओर चक्कर लगाता है और दिन-रात उसके साथ एक भाई की तरह रहता है, अब चूंकि धरती को हम 'मां' कहते हैं इसलिए उनके भाई हमाारे मामा हुए इसलिए चंदा को मामा कहा जाता है।














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