Harami Nala Explained: 'हरामी नाला' भारत की सबसे खतरनाक पोस्ट! यहीं से घुसा था कसाब, कैसे पड़ा गाली पर नाम?

Harami Nala Explained: कुछ जगहों के नाम और उनकी लोकेशन अक्सर उन्हें दुनिया के नक्शे पर खास बना देती हैं। ऐसी ही एक जगह है भारत-पाकिस्तान बॉर्डर (India-Pakistan Border) के पास 'हरामी नाला (Harami Nala)’। ये नाला एक बार फिर चर्चा में आ गया है। दरअसल देश के गृहमंत्री Amit Shah इन दिनों गुजरात के दो दिनों के दौरे पर हैं। इसमें वे हरामी नाला भी जाएंगे। ऐसे में जानना जरूरी हो जाता है कि आखिर इस नाले का नाम एक गाली पर क्यों हैं, इसका इतिहास क्या है, गृहमंत्री यहां क्यों जा रहे और भारत-पाकिस्तान के बीच ये हमेशा क्यों विवादित रहा।

सबसे पहले- हरामी नाला क्यों जा रहे गृहमंत्री?

अधिकारियों के मुताबिक अमित शाह 28 और 29 मई को इस इलाके का निरीक्षण करेंगे। वे यहां लगे एडवांस निगरानी कैमरों और कंट्रोल रूम की फुटेज भी देखेंगे। उनका यह दौरा इसलिए अहम माना जा रहा है क्योंकि हरामी नाला लंबे समय से पाकिस्तान से होने वाली घुसपैठ और तस्करी का बड़ा रूट रहा है।

कहां है हरामी नाला?

अगर आप गूगल मैप चलाते हैं तो हरामी नाला जैसी कोई जगह आपको नहीं मिलेगी। दरअसल ये हरामी नाला गुजरात के कच्छ जिले के भुज इलाके के पास स्थित है। यह भारत-पाकिस्तान सीमा का एक दलदली समुद्री चैनल (Creek Area) है। यह इलाका इतना कठिन और खतरनाक है कि यहां लगातार निगरानी रखना सुरक्षा बलों के लिए बहुत बड़ी चुनौती बन जाता है। भारत और पाकिस्तान के बीच कुल 3,323 किलोमीटर लंबी इंटरनेशनल सीमा है जो जमीन और और समुद्र दोनों के बीच बंटी है, जिसकी सुरक्षा Border Security Force यानी BSF करती है। इसी सीमा का सबसे कठिन हिस्सा हरामी नाला माना जाता है।

Harami Nala Explained

अगर आप इसे सर्च कर ढूंढना चाहते हैं तो आपको Sir Creek देखना होगा और उसके पास ही हरामी नाला आपको उसकी फोटो के हिसाब से ढूंढना होगा, जो हमने इस खबर के कवर में लगा दी है।

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सबसे बड़ा सवाल- क्यों कहते हैं 'हरामी नाला’?

नाम सुनकर लोगों को अजीब लग सकता है, लेकिन इसके पीछे एक लंबा इतिहास है। हरामी नाला करीब 22 किलोमीटर लंबा समुद्री चैनल है, जिसका बड़ा हिस्सा हमेशा समुद्री पानी में डूबा रहता है। लगभग 8 किलोमीटर इलाका दलदली जमीन का है, जहां चलना तक मुश्किल होता है। यह इलाका सालों से पाकिस्तान से घुसपैठ, तस्करी और जासूसी के लिए इस्तेमाल होता रहा है। आतंकवादी और तस्कर अक्सर इस रास्ते से भारत में दाखिल होने की कोशिश करते थे। इसी वजह से स्थानीय लोगों के बीच यह हरामी नाला के नाम से मशहूर हो गया।

26/11 मुंबई हमलों से भी जुड़ा है कनेक्शन

हरामी नाला का नाम 2019 में काफी चर्चा में आया था, जब खुफिया एजेंसियों ने यहां से पाकिस्तानी आतंकवादियों की घुसपैठ की चेतावनी दी थी। लेकिन इसका सबसे बड़ा कनेक्शन 2008 के 26/11 मुंबई हमलों से जुड़ा माना जाता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक 26/11 हमलों को अंजाम देने वाला आतंकवादी गुट, जिसमें Ajmal Kasab भी शामिल था, भारतीय जलक्षेत्र में इसी इलाके के जरिए घुसा था। इसके बाद से इस क्षेत्र में सुरक्षा और ज्यादा बढ़ा दी गई।

निगरानी करना इतना मुश्किल क्यों है?

हरामी नाला का भूगोल लगातार बदलता रहता है। यहां ज्वार-भाटा (tides) के कारण पानी का स्तर बदलता रहता है। कई बार पूरा इलाका समुद्र में डूब जाता है और कई बार दलदली जमीन बाहर आ जाती है। इस इलाके में स्थायी चौकियां बनाना आसान नहीं है। BSF यहां अस्थायी पोस्ट, फ्लोटिंग पोस्ट और निगरानी टावरों की मदद से सुरक्षा करती है। कई बार कम ज्वार के दौरान BSF की नावें भी कीचड़ में फंस जाती हैं।

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आतंकी नहीं समुद्री जीवों से भी खतरा

यह इलाका इतना कठिन है कि जवानों को दलदल में चलने के लिए लंबे गंबूट पहनने पड़ते हैं। कीचड़ में तेज धार वाले शेल और छोटे केकड़े पैरों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसके अलावा उड़ने वाले कीड़े, तेज हवाएं और खारा पानी जवानों की मुश्किलें और बढ़ा देते हैं। यहां आसपास कोई आबादी भी नहीं है। कई बार जवानों को घंटों तक पानी और कीचड़ के बीच खड़े रहकर निगरानी करनी पड़ती है।

सरकार अब क्या कर रही है?

मोदी सरकार इस इलाके में सुरक्षा मजबूत करने के लिए बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट पर काम कर रही है। सरकार यहां ₹106.2 करोड़ की लागत से 28.2 किलोमीटर लंबी सड़क बना रही है। इसके अलावा ₹3 करोड़ की लागत से एक एडवांस ऑब्जर्वेशन पोस्ट टॉवर भी बनाया जा रहा है। इससे BSF को 24 घंटे निगरानी में मदद मिलेगी और जवानों की मूवमेंट भी तेज होगी।

अमित शाह ने क्या-क्या लॉन्च किया?

अपने कच्छ दौरे के दौरान अमित शाह ने हरामी नाला तटरेखा पर पिलर नंबर 1164 के पास 9.5 मीटर ऊंचे ऑब्जर्वेशन पोस्ट टॉवर का उद्घाटन किया। यह टॉवर हाई-टेक कैमरों से लैस है, जो दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखने में मदद करेगा। इसके अलावा उन्होंने कोटेश्वर इलाके में रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण चिड़िया मोड़-बीआर लिंक रोड का भी उद्घाटन किया। यह सड़क BSF के ऑपरेशन्स को आसान बनाएगी। शाह ने ₹361 करोड़ की लागत वाले BSF मूरिंग प्लेस की आधारशिला भी रखी, जिससे समुद्री सुरक्षा और मजबूत होगी।

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सर क्रीक विवाद से भी जुड़ा है यह इलाका

हरामी नाला सर क्रीक इलाके का हिस्सा माना जाता है। सर क्रीक भारत और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से विवाद का विषय रहा है। पाकिस्तान इस इलाके के कुछ हिस्सों पर दावा करता रहा है। भारत इंटरनेशनल लॉ के मुताबिक थलवेग सिद्धांत (Thalweg Principle) को मानता है, जिसके तहत नेविगेबल वॉटर-वे के बीच की रेखा को सीमा माना जाता है। इसी लिए यह नाला भारत के लिए बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील प्वॉइंट है। यहां हुई एक चूक देश को मुसीबत में डाल सकती है।

इस खबर पर आपकी क्या राय है, हमें कमेंट में बताएं।

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