Monsoon: क्या इस बार कम होगी बारिश? मानसून पर IMD के अपडेट से बढ़ी चिंता

Monsoon: मानसून का इंतजार कर रहे लोगों के लिए बुरी खबर है, भारतीय मौसम विभाग ने शुक्रवार को प्रेसवार्ता करके कहा कि इस साल मानसून वीक रहेगा और सामान्य से कम बारिश होगी। आईएमडी के मुताबिक इस साल देश में मानसून के दौरान दीर्घकालिक औसत (LPA) का करीब 90% बारिश होने की संभावना है और मानसून प्रभावी हवाओं के कमजोर पड़ने की वजह से मानसून 1 जून से ज्यादा लेट हो सकता है, आमतौर पर केरल में ये 1 जून तक पहुंचता है।

MD के DG डॉ. एम मोहपात्रा ने अपनी प्रेसवार्ता में कहा है कि पूर्वोत्तर भारत में इस बार सामान्य बारिश होने की उम्मीद है, लेकिन देश के कई अन्य हिस्सों में सामान्य से कम वर्षा दर्ज की जा सकती है। ऐसे में खेती, जलस्तर और गर्मी से राहत पर असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

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विशेषज्ञों का मानना है कि मानसून के कमजोर रहने से खरीफ फसलों की बुवाई प्रभावित हो सकती है। खासतौर पर उन राज्यों में चिंता बढ़ सकती है, जहां कृषि पूरी तरह बारिश पर निर्भर करती है।

'मानसून में बारिश का वितरण असमान रहेगा', IMD ने दिया बड़ा अपडेट

हालांकि IMD ने कहा है कि मानसून की प्रगति और क्षेत्रवार बारिश की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। मौसम विभाग के मुताबिक, मानसून के दौरान अलग-अलग क्षेत्रों में बारिश का वितरण असमान रह सकता है। कुछ राज्यों में सामान्य या उससे अधिक बारिश हो सकती है, जबकि कई इलाकों में कम बारिश की संभावना बनी हुई है।

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क्या है दीर्घकालिक औसत (LPA)?

मानसून के दौरान दीर्घकालिक औसत (Long Period Average - LPA) का मतलब किसी क्षेत्र में कई वर्षों के दौरान हुई औसत बारिश से होता है। भारत में IMD मानसून की सामान्य स्थिति तय करने के लिए LPA का इस्तेमाल करता है। जिसमें वो आमतौर पर 50 वर्षों (1971-2020) के बारिश के आंकड़ों का औसत निकालकर LPA तय करता है। दक्षिण-पश्चिम मानसून के लिए भारत का मौजूदा LPA लगभग 87 सेंटीमीटर (870 मिमी) माना जाता है।

कैसे समझें LPA का गणित?

  • अगर मानसून में 100% LPA बारिश होती है, तो इसका मतलब है कि बारिश बिल्कुल सामान्य रही।
  • 96% से 104% के बीच बारिश को सामान्य मानसून माना जाता है
  • ।90% से कम बारिश होने पर इसे सामान्य से कम यानी कमजोर मानसून माना जाता है।
  • 110% से ज्यादा बारिश होने पर इसे सामान्य से अधिक मानसून कहा जाता है।
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मानसून बारिश क्यों जरूरी है? अगर बारिश कम हुई तो क्या होगा?

भारत में मानसून केवल मौसम नहीं बल्कि अर्थव्यवस्था और जीवनरेखा माना जाता है। देश की खेती, पानी की उपलब्धता और बिजली उत्पादन तक मानसून बारिश पर ही निर्भर करते हैं। इसी वजह से इसे भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ भी कहा जाता है। मानसून के दौरान होने वाली बारिश कई कारणों से बेहद महत्वपूर्ण है।

  • कृषि के लिए सबसे बड़ा आधार: भारत की करीब 50% से अधिक खेती पूरी तरह बारिश पर निर्भर है। धान, मक्का, दालें और कपास जैसी खरीफ फसलें मानसून पर ही निर्भर करती हैं।
  • भूजल स्तर को बढ़ाना: बारिश जमीन के अंदर पानी के स्तर को रिचार्ज करती है, जिससे कुएं, हैंडपंप और नलकूपों में पानी बना रहता है।
  • पेयजल आपूर्ति: शहरों और गांवों में पीने के पानी का बड़ा हिस्सा जलाशयों और बांधों से आता है, जो मानसून बारिश से भरते हैं।
  • बिजली उत्पादन: हाइड्रोपावर (जल विद्युत) संयंत्रों के लिए पानी का स्तर बनाए रखने में मानसून अहम भूमिका निभाता है।
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