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आखिर मर्द ही क्यों करते हैं गणेश-विसर्जन?

नई दिल्ली। अक्सर ये सवाल बच्चों और लड़कियों के दिलों में कौंधता है कि जब पूजा का अधिकार सबको है तो फिर गणेश-विसर्जन का अधिकार केवल मर्दों को ही क्यों हैं?

आईये जानते हैं विस्तार से इसके पीछे की वजह को निम्नलिखित बिंदुओं से..

  • धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक केवल गणेश-विसर्जन ही नहीं बल्कि हर मूर्ति-विसर्जन का अधिकार मर्दों को दिया गया है अब वो चाहे गणपति की मूर्ति हो या फिर मां दुर्गा की।
  • दरअसल मूर्ति-विसर्जन का संबंध अंतिम संस्कार से होता है और हिंदू रिवाजों के मुताबिक अंतिम संस्कार का हक केवल मर्दों को ही होता है इसलिए मूर्ति-विसर्जन का काम महिलाओं से नहीं कराया जाता है।
  • मूर्ति-विसर्जन के वक्त का माहौल काफी मार्मिक और गमगीन हो जाता है इसलिए वहां ऐसे लोगों की उपस्थिति होनी चाहिए जो कि थोड़े कठोर दिल के हों इसलिए महिलाओं को विसर्जन के काम से दूर रखा जाता है क्योंकि ऐसा माना जाता है कि महिलाएं कोमल हृदय की होती हैं और उनसे किसी की विदाई नहीं देखी जा सकती हैं।
  • काशी के पंडित दिवाकर शास्त्री के मुताबिक जब विसर्जन होता है तो अक्सर लोग वहां भांग या मदिरा पान भी कर लेते हैं और प्रभु की भक्ति में सुध-बुध खोकर नाचते हैं, ऐसे में सुरक्षा के दृष्टिकोण से भी महिलाओं और लड़कियों को वहां नहीं होना चाहिए।
  • दूसरा अहम कारण ये भी है कि ऐसे स्थानों पर लोग अक्सर जादू-टोने के शिकार होते हैं, महिलाएं या लड़कियां जल्दी ही इन चीजों का निशाना बन जाती हैं इसलिए भी बड़े-बुजुर्ग उन्हें वहां जाने से रोकते हैं।
  • हालांकि आज वक्त बदल चुका है, लोगो की सोच बदल रही है इसलिए प्रथाएं भी बदल रही हैं लेकिन जो लोग धर्म-पुराणों को मानते हैं वो जरूर विसर्जन के काम से लड़कियों और महिलाओं को दूर रखने की कोशिश करते हैं, इसके पीछे कोई जाति विशेष से प्रेम या उपेक्षा कारण नहीं है।
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