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Rohingya: जानिये वह महत्वपूर्ण कारण जिसके चलते भारत रोहिंग्याओं को अपनाने से करता है इंकार

रोहिंग्या शरणार्थी भारत सहित दुनियाभर के लिए एक बड़ी समस्या बन गये हैं। हालात यह है कि आज इन्हें कोई भी देश अपनाने के लिए तैयार नहीं हैं।

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Rohingya: भूखे और कमजोर दिख रहे तकरीबन 58 रोहिंग्या कई हफ्तों की समुद्री यात्रा के बाद इंडोनेशिया के असेह प्रांत के तट पर पहुंचे। दरअसल तकरीबन एक महीने पहले बांग्लादेश के शरणार्थी कैंप से भागकर रोहिंग्याओं के 190 लोगों का दल एक नाव पर सवार होकर म्यामांर, भारत, थाइलैंड और इंडोनेशिया जैसे देशों के लिए निकला। कुछ दिनों बाद संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी ने एक बयान में कहा कि जहाज पर सवार लोग करीब एक महीने से पर्याप्त भोजन और पानी के बिना गंभीर स्थिति में समुद्र में फंसे हुए हैं। इस जहाज में कई महिलाएं और बच्चे भी सवार हैं। इसमें से कुछ के रास्ते में भी मारे जाने की खबर हैं।

ऐसा पहली बार नहीं है जब रोहिंग्या शरणार्थियों को ले जा रही नाव समुद्र में भटक गई थी। 8 दिसंबर साल 2022 को वियतनाम के एक जहाज ने अंडमान से एक नाव पर सवार 154 लोगों को बचाया और बाद में उन्हें म्यांमार को सौंपा गया। श्रीलंका की नौसेना ने भी 18 दिसंबर को 104 शरणार्थियों को बचाया। वहीं भारतीय जहाजों ने भी कई बार अंडमान क्षेत्र में इनकी जान बचाई हैं।

कौन हैं रोहिंग्या?

रोहिंग्या मुसलमानों का एक समुदाय है। म्यांमार के रखाइन प्रांत में रोहिंग्या मुसलमानों की एक बड़ी आबादी रहती है। रखाइन, म्यांमार के उत्तर-पश्चिमी छोर पर बांग्लादेश की सीमा पर बसा एक बड़ा प्रांत है, जो 36 हजार 762 वर्ग किलोमीटर में फैला है। रोहिंग्या मुसलमान दावा करते हैं कि वे म्यांमार के मुस्लिमों के वंशज हैं। जबकि म्यांमार का कहना है कि वे बांग्लादेशी प्रवासी हैं।

25 अगस्त 2017 को इसी इलाके में रोहिंग्याओं ने म्यामांर के उत्तर रखाइन में पुलिस पोस्ट पर हमला कर 12 सुरक्षाकर्मियों को मार दिया था। हमले के बाद सेना ने इनके खिलाफ एक अभियान चलाया और तब से ही म्यांमार से रोहिंग्या मुसलमानों का पलायन जारी है। इन सैन्य ऑपरेशनों के बाद वे पड़ोसी देश बांग्लादेश भाग आये। एक आंकड़े के मुताबिक बांग्लादेश के कॉक्स बाजार में लगभग 1,000,000 रोहिंग्या शरणार्थी शिविरों में रह रहे हैं, जिन्हें बांग्लादेश ने अपनाने से इंकार कर दिया है।

जर्मनी की मीडिया एजेंसी डॉयचू वेला (DW) की एक रिपोर्ट के मुताबिक सितंबर 2020 में सऊदी अरब ने कहा था कि अगर बांग्लादेश इन शरणार्थियों को अपना पासपोर्ट जारी करता है तो सऊदी अरब इन्हें अपने यहाँ स्थान दे सकता है। दरअसल, नागरिकता विहीन लोगों को सऊदी अरब अपने यहाँ शरण नहीं देता है। रोहिंग्या लोगों के पास किसी देश की नागरिकता नहीं है।

रिफ्यूजी मामला - भारत ने नहीं किया कोई हस्ताक्षर

भारत दुनिया के उन कुछ देशों में शामिल है, जहां सरकार की तरफ से न तो कोई शरणार्थी कैंप है और न ही कोई आव्रजन नीति (Immigration Policy)। भारत ने अभी तक यूएन रिफ्यूजी कन्वेंशन-1951 या उसके 1967 के प्रोटोकॉल पर साइन नहीं किए है और न ही 1954 के यूएन कन्वेंशन ऑन स्टेटलेस या 1961 के यूएन कन्वेंशन ऑन रिडक्शन ऑफ स्टेटलेसनेस की पुष्टि की है। इसलिए भारत बाध्य नहीं है कि शरणार्थियों को उक्त संधियों में तय अधिकार अथवा नागरिकता दे।

बावजूद इसके, पिछले साल 10 अगस्त को गृह मंत्रालय ने लोकसभा में बताया था कि अवैध प्रवासी गैरकानूनी और अवैध दस्तावेजों के गुपचुप तरीके से देश में आ जाते हैं। इसलिए इनके सटीक आंकड़े मौजूद नहीं हैं। जबकि अगस्त 2017 में राज्यसभा में सरकार ने बताया था कि देश में 40 हजार रोहिंग्याओं के होने का अनुमान हैं। संयुक्त राष्ट्र (UN) की रिफ्यूजी एजेंसी के अनुसार जम्मू, दिल्ली, जयपुर, महाराष्ट्र, नूह (हरियाणा), हैदराबाद और उत्तर प्रदेश में रोहिंग्या कैंप हैं। शरणार्थियों को संयुक्त राष्ट्र की ओर से आईडी कार्ड दिया जाता है। भारत में रह रहे लगभग 21 हजार रोहिंग्याओं को यह आईडी कार्ड मिला है।

भारत सरकार ने बताया सुरक्षा के लिए खतरा

गृहमंत्री अमित शाह ने एक इंटरव्यू के दौरान कहा था कि भारत अवैध घुसपैठ को बढ़ावा नहीं दे सकता है। वे (रोहिंग्या) भारत की जिम्मेदारी और जवाबदेही नहीं हैं, क्योंकि भारत की एक अपनी परिभाषित सीमा है। अगर इस तरह हर कोई देश में आता रहेगा तो ये देश की सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करेगा।

रोहिंग्या का है कोई आतंकी कनेक्शन?

साल 2017 में केंद्र सरकार ने कहा था कि रोहिंग्या मुसलमान देश की सुरक्षा के लिए खतरा हैं और इस समुदाय के लोग आतंकी संगठनों से भी जुड़े हो सकते हैं। उसी साल बांग्लादेश सरकार की ओर से कहा गया था कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई, अराकान रोहिंग्या साल्वेशन आर्मी (ARSA) का इस्तेमाल कर उनके देश में आतंकी गतिविधियों को बढ़ावा दे सकती है।

आतंकी मसूद अजहर कई बार रोहिंग्या का समर्थन चुका है। मसूद अजहर ने रोहिंग्या को लेकर कहा था कि इस मुद्दे पर दुनिया के सभी मुस्लिमों को एक साथ आना चाहिए, हमें जल्द ही कुछ करना चाहिए।

साल 2018 में बॉर्डर सिक्योरिटी फोर्स (BSF) के DG केके शर्मा ने था कि देश में अवैध रूप से रोहिंग्या का बड़ी संख्या में आना देश की सुरक्षा के लिए खतरा है। रोहिंग्या के आतंकी संगठनों से लिंक की संभावना को खारिज नहीं किया जा सकता है।

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    कई रिपोर्ट्स के मुताबिक रोहिंग्या छोटी-मोटी चोरियों से लेकर लूटपाट, हत्या और डकैती जैसे बड़े अपराधों में भी शामिल रहते हैं। वहीं साल 2020 में दिल्ली में शाहीनबाग और जफराबाद में हुए CAA प्रोटेस्ट के दौरान हजारों की संख्या में रोहिंग्या मुसलमानों ने हिस्सा लिया था और सड़कों को जाम कर रखा था।

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