कौन हैं बंगाल के 35 नए मंत्री? क्या है जाति? कितनी महिला बनीं मिनिस्टर, सुवेंदु कैबिनेट की पूरी कुंडली
West Bengal Cabinet Minister Profile: पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत हो चुकी है। राज्य में सत्ता परिवर्तन के बाद अब सुवेंदु अधिकारी सरकार ने अपने मंत्रिमंडल का पहला और सबसे बड़ा विस्तार कर दिया है। सोमवार (01 जून) को राजभवन में आयोजित एक भव्य और हाई-प्रोफाइल कार्यक्रम में राज्यपाल आरएन रवि ने 35 नए विधायकों को मंत्री पद की गोपनीयता की शपथ दिलाई। इस ऐतिहासिक मौके पर खुद मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी भी मौजूद रहे।
इस नए विस्तार में जहां 13 दिग्गज नेताओं को कैबिनेट मंत्री बनाया गया है, वहीं 3 को राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और 19 विधायकों को राज्य मंत्री के तौर पर टीम में शामिल किया गया है। इस मेगा विस्तार के बाद अब बंगाल सरकार में मंत्रियों का आंकड़ा बढ़कर 41 हो गया है, जो राज्य की नई सियासी दिशा को तय करेगा। आइए समझते हैं कि सुवेंदु की इस नई टीम का पूरा गणित क्या है।

9 मई की कोर टीम और अब का मेगा विस्तार
इस पूरी कहानी को समझने के लिए हमें थोड़ा पीछे जाना होगा। बंगाल चुनाव के नतीजों के बाद 9 मई को सुवेंदु अधिकारी ने अकेले मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर सरकार की कमान संभाली थी। उस समय उनके साथ सिर्फ 5 भरोसेमंद सहयोगियों ने शपथ ली थी, जिनमें दिलीप घोष, अग्निमित्रा पॉल, निशीथ प्रमाणिक, अशोक कीर्तनिया और क्षुदीराम टुडू जैसे बड़े नाम शामिल थे।
शुरुआती गठन के बाद से ही कयास लगाए जा रहे थे कि कैबिनेट का असली विस्तार कब होगा। अब 1 जून को 35 नए चेहरों की एंट्री के बाद सुवेंदु सरकार की पूरी तस्वीर साफ हो चुकी है। अब सरकार में मुख्यमंत्री सहित कुल 41 सदस्य हो चुके हैं। नियम के मुताबिक बंगाल विधानसभा की 294 सीटों के लिहाज से अधिकतम 15% यानी 44 मंत्री बनाए जा सकते हैं। इस लिहाज से सुवेंदु अधिकारी ने अभी भी 3 पद खाली रखे हैं, ताकि आने वाले समय में रणनीतिक जरूरत के हिसाब से उनका इस्तेमाल किया जा सके।
कौन हैं बंगाल के 41 कैबिनेट मंत्री (West Bengal Cabinet Ministers List 2026)

बंगाल की नई कैबिनेट में कितनी महिला मंत्री और कौन हैं?
चुनावों में महिलाओं की भूमिका हमेशा सबसे अहम होती है। बंगाल की नई कैबिनेट में पूरे 41 मंत्रियों के कुनबे में कुल 7 महिला मंत्रियों को शामिल किया गया है। सोमवार (01 जून) को हुए नए विस्तार में 6 महिला विधायकों को मंत्री पद मिला, जबकि 9 मई को शपथ लेने वाली अग्निमित्रा पॉल पहले से ही कैबिनेट का हिस्सा हैं। महिला मंत्रियों को मिले विभागों से साफ है कि यह सिर्फ सांकेतिक नहीं, बल्कि एक बड़ा राजनीतिक संदेश है:
- अग्निमित्रा पॉल (कैबिनेट मंत्री): इन्हें महिला एवं बाल विकास, समाज कल्याण और नगर निकाय जैसे बेहद महत्वपूर्ण और जमीनी विभागों की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
- मालती रावा रॉय (राज्य मंत्री - स्वतंत्र प्रभार): उत्तर बंगाल के राजबंशी और कोच समुदाय का प्रतिनिधित्व करने वाली मालती को स्वतंत्र प्रभार दिया गया है।
- राज्य मंत्री के रूप में 5 चेहरे: मौमिता बिस्वास मिश्रा, पूर्णिमा चक्रवर्ती, गार्गी दास घोष, सुमना सरकार और कलिता माझी को राज्य मंत्री बनाया गया है। इसमें कलिता माझी का नाम सबसे खास है, जिन्होंने कभी दूसरों के घरों में काम करके गुजारा किया और आज अपनी मेहनत के दम पर विधानसभा से लेकर मंत्रालय तक का सफर तय किया है।
बंगाल की नई कैबिनेट में Gen, OBC, ST/SC के कितने मंत्री?
बीजेपी ने इस कैबिनेट के जरिए बंगाल के कोने-कोने को साधने की कोशिश की है। उत्तर बंगाल से लेकर दक्षिण बंगाल और जंगलमहल तक, हर वर्ग को तराजू में तोलकर जगह दी गई है। अगर जातिगत और सामाजिक आंकड़ों पर नजर डालें तो पूरी 41 सदस्यीय टीम को चार बड़े हिस्सों में बांटा गया है:
सामान्य वर्ग (General Category - 20 मंत्री): इसमें खुद सीएम सुवेंदु अधिकारी (ब्राह्मण), डॉ. शंकर घोष, जगन्नाथ चट्टोपाध्याय, कायस्थ समुदाय से आने वाली अग्निमित्रा पॉल और स्वपन दासगुप्ता शामिल हैं। इसके अलावा अर्जुन सिंह और उमेश रे के जरिए राज्य के हिंदी भाषी और भोजपुरी वोटर्स को भी सीधा प्रतिनिधित्व दिया गया है। माहिष्य समाज से आने वाले तपस रॉय और अशोक डिंडा भी इस वर्ग का बड़ा चेहरा हैं।
अनुसूचित जाति (SC - 11 मंत्री): बंगाल में बीजेपी की जीत की बड़ी वजह मतुआ और राजबंशी समाज रहा है। इसी को ध्यान में रखते हुए निशीथ प्रमाणिक, दीपक बर्मन, आनंदमय बर्मन (राजबंशी) और अशोक कीर्तनिया, अजय पोद्दार, दिबाकर घरामी (मतुआ/नमसशूद्र) को भारी-भरकम मंत्रालयों के साथ कैबिनेट में तरजीह दी गई है।
अनुसूचित जनजाति (ST - 5 मंत्री): जंगलमहल के आदिवासी बेल्ट में पैठ मजबूत रखने के लिए खुदीराम टुडू, मनोज कुमार ओरांव, जोएल मुर्मू और अमिया किस्कू (संताल और ओरांव समुदाय) को मंत्री बनाया गया है। वहीं पहाड़ों की राजनीति यानी दार्जिलिंग हिल्स को साधने के लिए गोरखा समुदाय से विशाल लामा को टीम में एंट्री मिली है।
अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC - 5 मंत्री): ओबीसी वर्ग को साधने के लिए पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष (सद्गोप वर्ग) और पुरुलिया के कुड़मी आंदोलन का मुख्य चेहरा रहे राजेश महतो जैसे बड़े नेताओं पर भरोसा जताया गया है। साथ ही गौरी शंकर घोष और गार्गी दास घोष भी इस सूची का हिस्सा हैं।
पश्चिम बंगाल कैबिनेट: सभी 41 मंत्रियों की जाति
| क्र.सं. | मंत्री का नाम | पद | जाति / समुदाय | सामाजिक वर्ग (Category) |
| 1 | सुवेंदु अधिकारी | मुख्यमंत्री | ब्राह्मण | सामान्य (General) |
| 2 | दिलीप घोष | कैबिनेट मंत्री | सद्गोप | ओबीसी (OBC) |
| 3 | अग्निमित्रा पॉल | कैबिनेट मंत्री | कायस्थ | सामान्य (General) |
| 4 | अशोक कीर्तनिया | कैबिनेट मंत्री | मतुआ (नमसशूद्र) | अनुसूचित जाति (SC) |
| 5 | निशीथ प्रमाणिक | कैबिनेट मंत्री | राजबंशी | अनुसूचित जाति (SC) |
| 6 | खुदीराम टुडू | कैबिनेट मंत्री | संताल | अनुसूचित जनजाति (ST) |
| 7 | दीपक बर्मन | कैबिनेट मंत्री | राजबंशी | अनुसूचित जाति (SC) |
| 8 | तपस रॉय | कैबिनेट मंत्री | माहिष्य | सामान्य (General) |
| 9 | डॉ. शंकर घोष | कैबिनेट मंत्री | ब्राह्मण | सामान्य (General) |
| 10 | मनोज कुमार ओरांव | कैबिनेट मंत्री | ओरांव | अनुसूचित जनजाति (ST) |
| 11 | अर्जुन सिंह | कैबिनेट मंत्री | क्षत्रिय (हिंदी भाषी) | सामान्य (General) |
| 12 | गौरी शंकर घोष | कैबिनेट मंत्री | ग्वाला/ घोष | ओबीसी (OBC) |
| 13 | स्वपन दासगुप्ता | कैबिनेट मंत्री | कायस्थ | सामान्य (General) |
| 14 | जगन्नाथ चट्टोपाध्याय | कैबिनेट मंत्री | ब्राह्मण | सामान्य (General) |
| 15 | कल्याण चक्रवर्ती | कैबिनेट मंत्री | ब्राह्मण | सामान्य (General) |
| 16 | अजय पोद्दार | कैबिनेट मंत्री | नमसशूद्र | अनुसूचित जाति (SC) |
| 17 | सरदवत मुखर्जी | कैबिनेट मंत्री | ब्राह्मण | सामान्य (General) |
| 18 | दूध कुमार मंडल | कैबिनेट मंत्री | सद्गोप | ओबीसी (OBC) |
| 19 | अनूप कुमार दास | कैबिनेट मंत्री | पौंड्र | अनुसूचित जाति (SC) |
| 20 | डॉ. इंद्रनील खान | राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) | कायस्थ | सामान्य (General) |
| 21 | मालती रावा रॉय | राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) | रावा (कोच-राजबंशी) | अनुसूचित जाति (SC) |
| 22 | राजेश महतो | राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) | कुड़मी / महतो | ओबीसी (OBC) |
| 23 | जोएल मुर्मू | राज्य मंत्री | संताल | अनुसूचित जनजाति (ST) |
| 24 | हरे कृष्ण बेरा | राज्य मंत्री | माहिष्य | सामान्य (General) |
| 25 | आनंदमय बर्मन | राज्य मंत्री | राजबंशी | अनुसूचित जाति (SC) |
| 26 | अशोक डिंडा | राज्य मंत्री | माहिष्य | सामान्य (General) |
| 27 | नाडियार चंद बाउरी | राज्य मंत्री | बाउरी | अनुसूचित जाति (SC) |
| 28 | विशाल लामा | राज्य मंत्री | गोरखा | अनुसूचित जनजाति (ST) |
| 29 | शांतनु प्रमाणिक | राज्य मंत्री | माहिष्य | सामान्य (General) |
| 30 | मौमिता बिस्वास मिश्रा | राज्य मंत्री | ब्राह्मण | सामान्य (General) |
| 31 | उमेश रे | राज्य मंत्री | भूमिहार / हिंदी भाषी | सामान्य (General) |
| 32 | पूर्णिमा चक्रवर्ती | राज्य मंत्री | ब्राह्मण | सामान्य (General) |
| 33 | कौशिक चौधरी | राज्य मंत्री | कायस्थ | सामान्य (General) |
| 34 | भास्कर भट्टाचार्य | राज्य मंत्री | ब्राह्मण | सामान्य (General) |
| 35 | दिबाकर घरामी | राज्य मंत्री | नमसशूद्र | अनुसूचित जाति (SC) |
| 36 | अमिया किस्कू | राज्य मंत्री | संताल | अनुसूचित जनजाति (ST) |
| 37 | कलिता माझी | राज्य मंत्री | बागदी | अनुसूचित जाति (SC) |
| 38 | गार्गी दास घोष | राज्य मंत्री | ग्वाला | ओबीसी (OBC) |
| 39 | बिराज बिस्वास | राज्य मंत्री | नमसशूद्र | अनुसूचित जाति (SC) |
| 40 | दीपांकर जाना | राज्य मंत्री | माहिष्य | सामान्य (General) |
| 41 | सुमना सरकार | राज्य मंत्री | नमसशूद्र | अनुसूचित जाति (SC) |
सीएम के पास पावर, मंत्रियों को मिले अहम विभाग
सरकारों में असली ताकत विभागों के बंटवारे से पता चलती है। मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने पूरी सरकार पर अपनी मजबूत पकड़ बनाए रखने के लिए सबसे महत्वपूर्ण गृह मंत्रालय और वित्त मंत्रालय को अपने पास ही सुरक्षित रखा है। इसके साथ ही स्वास्थ्य विभाग की जिम्मेदारी भी सीधे सीएम के पास ही रहेगी। बाकी प्रमुख मंत्रियों के विभागों पर नजर डालें तो पूरी पावर कुछ इस तरह बंटी हुई है:
🔹निशीथ प्रमाणिक: इन्हें उत्तर बंगाल के विकास की कमान सौंपी गई है, साथ ही खेल और युवा कल्याण मंत्रालय भी इनके जिम्मे है।
🔹दिलीप घोष: ग्रामीण इलाकों में अपनी मजबूत पकड़ रखने वाले दिलीप घोष को ग्रामीण विकास, कृषि विपणन और पशु संसाधन विकास जैसे सीधे किसानों से जुड़े मंत्रालय दिए गए हैं।
🔹अशोक कीर्तनिया: मतुआ समाज के इस बड़े चेहरे को जनता से सीधे जुड़े खाद्य एवं आपूर्ति विभाग और सहकारिता मंत्रालय का जिम्मा मिला है।
🔹खुदीराम टुडू: आदिवासी और अल्पसंख्यक कल्याण के साथ-साथ इन्हें मदरसा शिक्षा विभाग की देखरेख की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
इस पूरे मंत्रिमंडल विस्तार और सुवेंदु अधिकारी की नई रणनीति को देखकर साफ है कि बीजेपी ने बंगाल की सत्ता पर लंबे समय तक टिके रहने के लिए अपना सबसे मास्टरस्ट्रोक फॉर्मूला चल दिया है। अब देखना यह होगा कि यह 41 मंत्रियों की टीम बंगाल की जनता की उम्मीदों पर कितनी खरी उतरती है।














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