मोदी सरकार की बार बार आलोचना क्यों करते हैं रघुराम राजन?
Raghuram Rajan: हाल ही में भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के पूर्व गवर्नर रघुराम राजन से जब वर्तमान केंद्र सरकार की आलोचना के बारे में पूछा गया, तब उन्होंने जवाब दिया, "मैंने मौजूदा भाजपा सरकार के लिए भी काम किया है।" उन्होंने कहा कि लोग शायद भूल जाते हैं कि उन्होंने 28 महीनों तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ काम किया है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा, "मैं सरकार की आलोचना इसलिए करता हूं क्योंकि कोई और नहीं करता और हमें देश के लिए सबसे बेस्ट पॉलिसी के लिए देखना चाहिए।"
कांग्रेस पार्टी के करीब और राहुल गांधी के सलाहकार माने जाने वाले रघुराम राजन कई बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार की आलोचना कर चुके हैं। आईए जानते हैं उनके द्वारा मोदी सरकार की कुछ आलोचनाओं के बारे में।

2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने का सपना 'बकवास'
मार्च 2024 में रघुराम राजन ने ब्लूमबर्ग के साथ एक इंटरव्यू में कहा कि 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाने का प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सपना 'बकवास' है। राजन ने इस बात पर जोर दिया कि वर्तमान में भारत को महत्वपूर्ण चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है, खासकर शिक्षा और वर्कफोर्स में, जिनपर 'विकसित राष्ट्र' का दर्जा हासिल करने से पहले काम करने की जरूरत है।
राजन ने भारत के विकास के लिए मजबूत नींव रखने के लिए गवर्नेंस रिफॉर्म्स, शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के महत्व पर भी जोर दिया। उन्होंने देश की आर्थिक वृद्धि के बारे में फैलाई जा रही अफवाहों पर विश्वास करने के बारे में भी लोगों को चेताया।
चुनाव से पहले ईडी की कार्यवाहियां 'अनडेमोक्रेटिक'
फरवरी 2024 में जयपुर में एक कार्यक्रम में चर्चा करते हुए रघुराम राजन ने चुनाव से पहले प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा की जा रही गिरफ्तारियों और छापेमारियों की आलोचना करते हुए इसे 'अनजस्ट और अनडेमोक्रेटिक' बताया। उन्होंने उस समय मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों में झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) प्रमुख हेमंत सोरेन की गिरफ्तारी का जिक्र किया और कहा कि इस तरह की कार्रवाइयों से चुनाव के दौरान लोगों के पास विकल्प सीमित हो जाते हैं। राजन ने यह बयान जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल (जेएलएफ) के दौरान दिया।
क्या भारत की पीएलआई स्कीम हो गई फेल?
अगस्त 2023 में करण थापर को दिए एक इंटरव्यू में रघुराम राजन ने केंद्र सरकार के इस दावे में खामियां बताई कि प्रोडक्शन-लिंक्ड इंसेंटिव (पीएलआई) योजना शुरू होने के बाद भारत मोबाइल फोन एक्सपोर्टर बन गया है। राजन ने बताया कि दुनिया की बड़ी-बड़ी स्मार्टफोन कंपनियां भारत में केवल मोबाइल फोन असेंबल कर रही है, उनके पार्ट्स का प्रोडक्शन विदेश, खासकर चीन में ही होता है। आपको बता दें कि केंद्र सरकार ने मैन्युफैक्चरिंग करने और रोजगार के अवसर पैदा करने के लिए 2020 में ₹1.97 लाख करोड़ की पीएलआई योजना की घोषणा की थी, और इस योजना का मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा देने पर था।
मंदी के लिए मोदी सरकार के राजनीतिक एजेंडे को ठहराया दोषी
फरवरी 2020 में ब्लूमबर्ग टीवी के साथ एक इंटरव्यू में रघुराम राजन ने देश की आर्थिक वृद्धि में मंदी के लिए मोदी सरकार का आर्थिक मुद्दों पर ध्यान देने के बजाय अपने राजनीतिक और सामाजिक एजेंडे को पूरा करने पर ध्यान केंद्रित करने के लिए जिम्मेदार ठहराया था। राजन ने कहा कि देश के विकास की धीमी गति के पीछे नोटबंदी और खराब तरीके से लागू किए गए गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) प्रमुख कारण है। आपको बता दें कि दिसंबर 2019 में जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, दिसंबर क्वॉर्टर में भारत की जीडीपी वृद्धि दर लगभग 7 साल में सबसे कम, 4.7 प्रतिशत पर पहुंच गई थी।
जेएनयू में हमले पर मोदी सरकार की आलोचना
जनवरी 2020 में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में सीएए और एनआरसी के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान कुछ हमलावर विश्वविद्यालय में घुस गए, उत्पात मचाया, छात्रों और शिक्षकों पर हमला किया था। घटना के बाद राजन ने मोदी सरकार की आलोचना की। राजन ने लिखा कि हमलावर छात्रों और शिक्षकों पर हमला करते रहे, लेकिन फिर भी पुलिस ने उन्हें नहीं रोका। राजन ने लिखा कि विश्वविद्यालय राजधानी में स्थित होने की वजह से हमेशा हाई अलर्ट पर रहता है, फिर भी पुलिस और प्रशासन स्टैंड बाय पर रहे। इसी के साथ राजन ने छात्रों और शिक्षकों के साथ भी अपनी सहानुभूति व्यक्त की।
आलोचना को दबाने से नीतिगत गलतियां हो सकती है
सितंबर 2019 में रघुराम राजन ने लिंकडिन पर एक पोस्ट में कहा कि पॉलिसी मेकिंग में आलोचना को सहन करने की आवश्यकता होती है और इसे दबाने से गलतियां हो सकती है। राजन ने लिखा, "अगर हर आलोचक को किसी सरकारी अधिकारी का फोन आता है और उसे पीछे हटने के लिए कहा जाता है, या सत्तारूढ़ पार्टी की ट्रोल सेना द्वारा निशाना बनाया जाता है, तो कई लोग आलोचना कम कर देंगे।" राजन ने ये बात तब कही जब प्रधानमंत्री मोदी की आर्थिक सलाहकार परिषद (पीएमईएसी) के दो सदस्यों को हटा दिया गया था, जिन्होंने सरकार की नीतियों पर अपनी चिंता व्यक्त की थी।
सत्ता का 'एक्सेसिव सेंट्रलाइजेशन'
नवंबर 2018 में कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय में संबोधन देते समय रघुराम राजन ने मोदी सरकार में राजनीतिक निर्णय लेने में सत्ता के 'एक्सेसिव सेंट्रलाइजेशन' के बारे में चिंता व्यक्त की। उन्होंने इसे एक प्रमुख मुद्दे के रूप में बताया, जो भारतीय अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव डाल रहा है।
राजन ने यह भी कहा कि सिर्फ निर्णय लेने की प्रक्रिया ही नहीं बल्कि विचार और योजनाएं भी प्रधानमंत्री या प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) में बैठे लोगों के छोटे से समूह से निकलती है। उन्होंने कहा कि यह सब चीज राजनीतिक पार्टियों में चलती है लेकिन आर्थिक सुधार के लिए यह कारगर नहीं है।
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