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Snehalata Reddy: कौन थी स्नेहलता रेड्डी, जिनका संसद में जिक्र किया स्मृति ईरानी ने?

Snehalata Reddy: अविश्वास प्रस्ताव पर आज (9 अगस्त को) संसद में जबरदस्त बहस देखने को मिली। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने अविश्वास प्रस्ताव पर अपनी बात रखते हुए कहा कि मणिपुर में हिंदुस्तान की हत्या की गई। आपने मणिपुर को दो हिस्सों में बांट दिया, उसे तोड़ दिया। इन आरोपों पर केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने सरकार की तरफ से अपना पक्ष रखा। इस दौरान राहुल गांधी के आरोपों पर उन्होंने इमरजेंसी के दौरान एक महिला सामाजिक कार्यकर्ता और अभिनेत्री स्नेहलता रेड्डी की कहानी सदन में सुनाईं।

उन्होंने कहा कि स्नेहलता रेड्डी को 2 मई 1976 को इसलिए जेल में डाला गया क्योंकि वह सोशलिस्ट थी, कोई भाजपाई नहीं। तब उन्होंने जेल में झेली पीड़ा को अपनी डायरी में लिखा था, जिसे उन्होंने पढ़कर सुनाया। साथ ही कहा कि वह अस्थमा की पेशेंट थी, लेकिन उन्हें दवा तक लेने नहीं दी गई।

Who was Snehalatha Reddy whom Smriti Irani mentioned in Parliament?

कौन थीं स्नेहलता रेड्डी?

स्नेहलता रेड्डी एक सामाजिक महिला कार्यकर्ता थी। साथ ही कन्नड़ फिल्मों की अभिनेत्री भी थी। इनकी कहानी भारतीय लोकतंत्र के उन स्याह 19 महीनों के दौरान की है, जिस समय देश में आपातकाल लगाया गया था। आपातकाल के दौरान उनका कसूर बस यही था कि उनकी दोस्ती अपने समय के बड़े समाजवादी नेता जॉर्ज फर्नांडिस से थी। जिन्हें इमरजेंसी के समय केंद्र सरकार पकड़ना चाहती थी। आरोप है कि तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को लगा कि वह स्नेहलता के सहारे जॉर्ज फर्नांडिस पर काबू कर लेंगी। इसलिए 2 मई 1976 को स्नेहलता को डायनामाइट केस में शामिल होने का आरोप लगाकर गिरफ्तार कर लिया गया। इसके बाद स्नेहलता रेड्डी को बेंगलुरु जेल में डाल दिया गया।

स्नेहलता को खुले में करना पड़ता था शौच?

जेल में डालने के बाद उनके साथ ऐसी अमानवीयता की गई जिसे सुन कोई भी दंग रह जाये। जब स्नेहलता पर आईपीसी की धारा 120, 120A के तहत आरोप लगाकार जेल लाया गया तब उन्हें एक जालीदार कोठरी दी गई। उस कोठरी में एक इंसान से ज्यादा कोई रह भी नहीं सकता था। उसी कोठरी में एक किनारे पर शौचालय के लिए एक छेद कर दिया गया था। जहां उन्हें आते-जाते सुरक्षाकर्मियों के सामने ही शौच करना पड़ता था। फर्श पर ही सोना पड़ता था। वह अस्थमा से पीड़ित थी, इसके बावजूद उन्हें कोई बिस्तर नहीं दिया गया था।

जरा सोचिए कि एक मशहूर अभिनेत्री जिसने अपनी कला के कारण कई पुरुस्कार जीत रखे हों, भरतनाट्यम जैसी कला से पारंगत हों, उन्हें पूरे 8 माह तक ऐसे ही असीम प्रताड़नाएं दी गईं। हालांकि, स्नेहलता को जिन आरोपों में बंदी बनाया गया था, इनमें से कोई भी आरोप उन पर साबित नहीं हो सका था। बावजूद उन्हें मीसा (मैंनेटेनेंस ऑफ इंटरनल सिक्योरिटी एक्ट) के तहत 8 महीने तक प्रताड़ना दी गईं।

'रात को चीखा करती थीं स्नेहलता'

समाजवादी नेता मधु दंडवते जो उस समय आपातकाल के दौरान बैंगलोर जेल में थे, उन्होंने अपनी किताब 'डायलॉग विथ लाइफ' में लिखा है कि मैं रात के सन्नाटे में स्नेहलता रेड्डी की कोठरी से उसकी चीखें सुन सकता था। वह तकलीफ में थीं। उसी जेल में अटल बिहारी वाजपेयी और लाल कृष्ण आडवाणी को भी बंद किया गया था। कारावास के समय उन्हें भी किसी महिला के चीखने की आवाज सुनाई देती थी।

एक डायरी में स्नेहलता ने लिखी 'मन की बात'

जेल में रहते हुए स्नेहलता रेड्डी ने एक डायरी लिखी थी, जिसे 1977 में कर्नाटक मानवाधिकार समिति द्वारा ए प्रिजन डायरी नामक संकलन में प्रकाशित किया गया था। वहीं साल 2019 में उनकी डायरी पर आधारित एक डॉक्यूमेंट्री भी बनायी गयी थी।

अपनी डायरी में स्नेहलता लिखती हैं कि जैसे ही एक महिला जेल के अंदर लाई जाती है, उसे बाकी सभी के सामने नग्न कर दिया जाता है। जब किसी व्यक्ति को सजा सुनाई जाती है, तो उसे पर्याप्त सजा दी जाती है। क्या मानव शरीर को भी अपमानित किया जाना चाहिए? इन विकृत तरीकों के लिए कौन जिम्मेदार है? इंसान के जीवन का क्या मकसद है? क्या हमारा मकसद जीवन मूल्यों को और बेहतर बनाना नहीं है? इन्सान का उद्देश्य चाहे कुछ भी हो, उसे मानवता को आगे बढ़ाने के प्रयास करने चाहिए।

ऐसे हुई स्नेहलता की मौत

दरअसल स्नेहलता एक अस्थमा की मरीज थीं। वहीं लगातार जमीन पर सोने और खुली कोठरी में रहने के कारण उनकी बीमारी और बढ़ गयी थी। जेल में उन्हें कोई उपचार नहीं दिया गया। इस वजह से समय के साथ उनकी हालत खराब होते चली गयी। इसके बाद 15 जनवरी 1977 को उन्हें पैरोल पर रिहा कर दिया गया। रिहाई के 5 दिन बाद ही 20 जनवरी को हार्ट अटैक के कारण उनकी मृत्यु हो गयी।

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