Shri Ram Nanihal: कहां हैं श्रीराम के ननिहाल, रामलला मंदिर के लिए है भरपूर उत्साह
22 जनवरी, 2024 को अयोध्या में राममंदिर की प्राण प्रतिष्ठा के लिए देश भर में उत्साह का माहौल है। भगवान श्रीराम के ननिहाल से भी लोग इस आयोजन में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रुप से शामिल हो रहे हैं। जानते हैं कहां हैं प्रभु राम के ननिहाल, और क्या है उनका हाल।
अयोध्या के राजा दशरथ की तीन रानियां थीं। कौशल्या, सुमित्रा और कैकेयी। भगवान राम ने माता कौशल्या के गर्भ से जन्म लिया था। सुमित्रा के दो पुत्र लक्ष्मण और शत्रुघ्न थे, जबकि कैकेयी के पुत्र भरत थे। राम को तीनों माताएं बहुत प्यार करती थीं और राम भी उनका बराबर सम्मान करते थे। रामायण के अनुसार माता कौशल्या का मायका दक्षिण कोसल था जो आज छत्तीसगढ़ के नाम से जाना जाता है। जबकि माता सुमित्रा का मायका बिहार के राजगीर क्षेत्र को बताया गया है। कई जगहों पर उन्हें काशी नरेश की पुत्री भी कहा गया है। माता कैकेयी, कैकय देश के राजा अश्वपति की पुत्री थी। केकय पंजाब में गंधार का पूर्ववर्ती प्रदेश था, जो आजकल रावलपिंडी पेशावर के आसपास के प्रदेश के रूप में चिन्हित किया गया है।

माता कौशल्या और राजा दशरथ का विवाह
पुराणों के मुताबिक राजा दशरथ और कौशल देश की राजकुमारी कौशल्या का विवाह तय हो रहा था, उसी समय रावण को यह बात पता चली कि सूर्यवंश के राजा दशरथ और रानी कौशल्या के यहाँ जन्म लेने वाले श्रीराम के हाथों उसकी मृत्यु हो जाएगी। इस भविष्य की सत्यता की जांच करने के लिए रावण बह्मदेव से मिला और ब्रह्मदेव ने भी कहा कि यही सत्य है। अब रावण ने सोचा कि अगर कौशल्या के साथ दशरथ का विवाह ही ना हो तो ना राम का जन्म होगा और ना उसे कोई मार सकेगा। यह सोचकर उसने कौशल्या का अपहरण करवा लिया, लेकिन स्त्री हत्या का पाप न लगे इस विचार से कौशल्या को एक पेटी में बंदकर समुद्र में छोड़ दिया।
उधर दूसरी तरफ राजा दशरथ कौशल देश जाने के लिए परिजनों और सेना के साथ नाव में बैठकर नदी के रास्ते निकले। तभी रावण ने आकाश से शस्त्रवृष्टि कर नाव को डूबा दिया और दशरथ एक लकड़ी के सहारे एक द्वीप पर पहुंचे। वहां उन्होंने एक पेटी देखी। जिसे खोलते ही भीतर कौशल्या दिखाई दी। दोनों ने एक-दूसरे को पूरी घटना बताई। संयोग से, दोनों का यह मिलन विवाह के रूप में परिवर्तित हो गया। दोनों ने पंचमहाभूतों को साक्षी बनाकर वैवाहिक जीवन की शुरुआत की ।
कैकेयी को दिए राजा दशरथ के वचन
कैकेयी महर्षि दुर्वासा की सेवा किया करती थीं। उनकी सेवा से प्रसन्न होकर महर्षि ने कैकेयी का एक हाथ वज्र का बना दिया था और आशीर्वाद दिया था कि भविष्य में भगवान तुम्हारी गोद में खेलेंगे। समय बीतने के साथ ही कैकेयी का विवाह राजा दशरथ के साथ हुआ। कुछ सालों बाद स्वर्ग में देवासुर संग्राम हुआ। जिसमें देवराज इंद्र ने राजा दशरथ को सहायता के लिए बुलाया। तब रानी कैकेयी भी महाराज के साथ युद्ध में सारथी बनकर गयीं। इस युद्ध के दौरान महाराज दशरथ के रथ के पहिए की कील निकल गई, और रथ लड़खड़ाने लगा तब कैकेयी ने कील की जगह अपनी उंगली लगा दी और महाराज की जान बचा ली। राजा दशरथ ने उनसे खुश होकर दो वचन मांगने को कहा। तब रानी कैकेयी ने, समय आने पर मांग लूंगी, कहकर टाल दिया।
भगवान राम के ननिहाल का हाल
आज के छत्तीसगढ़ को ही पुरातन काल में दक्षिण कोसल नाम से जाना जाता था। उस समय दक्षिण कोसल में राजा भानुमंत का राज था। राजा दशरथ ने तब भानुमंत की सुपुत्री कौशल्या से विवाह किया था। इसलिए छत्तीसगढ़ को भगवान राम का असली ननिहाल कहा जाता है। माता कौशल्या का एकमात्र मंदिर छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के चंदखुरी में है, जहां भगवान राम माता कौशल्या की गोद में विराजमान है। इसके अलावा माता कौशल्या का कहीं कोई दूसरा मंदिर नहीं है। छत्तीसगढ़ के लोग भगवान राम की भांजे के रूप में पूजा करते हैं। यहां के लोग अपनी बोलचाल की भाषा में भी भगवान राम को भांजा शब्द से ही संबोधित करते हैं।
भगवान राम के ननिहाल में है 100 से अधिक तालाब
माता कौशल्या का जन्म स्थान छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से करीब 30 किलोमीटर दूर चंदखुरी गांव को माना जाता है। इस गांव में दुनिया का इकलौता मंदिर है जो तालाब के बीचों बीच है और इस मंदिर में माता कौशल्या की पूजा की जाती है। मंदिर में एक सुंदर मूर्ति है जिसमें राम लला माता कौशल्या के गोद में खेलते हुए नजर आते हैं। इस गांव में एक-दो नहीं बल्कि 100 से ज्यादा तालाब हैं। मंदिर के आस-पास लक्ष्मीनारायण के साथ साथ समुद्र मंथन की प्रतिमा भी बनाई गई है।
छत्तीसगढ़ से भेजा गया सुगंधित चावल
अयोध्या में होने वाले प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम के लिए भगवान राम के ननिहाल के लोग भी जुड़ेंगे। हाल ही में 300 मिट्रिक टन सुगंधित चावल राइस मिलर्स ने अयोध्या के लिए भेजा है। साथ ही फूल और सब्जी के व्यापारियों ने भी अपनी तरफ से भेंट अयोध्या के लिए भेजे हैं। जिनका उपयोग 22 जनवरी को होने वाले कार्यक्रम में होगा। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव ने कहा है कि भगवान श्रीराम के ननिहाल छत्तीसगढ़ मे 22 को उत्सव का माहौल रहेगा। घरों में दीपावली की तरह दीप भी प्रज्ज्वलित किए जाएंगे।
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