Cloudburst: बादल कब, क्यों और कैसे फटता है? जानें बीते 10 सालों की बड़ी घटनाएं
Cloudburst: हिमाचल प्रदेश में भारी बारिश ने तबाही मचा रखी है। समाचारों के मुताबिक पूरे राज्य में जगह-जगह बादल फटने और भूस्खलन से अब तक 48 लोगों की मौत हो चुकी हैं। जबकि सैकड़ों लापता बताये जा रहे हैं। इस आपदा के कारण हिमाचल प्रदेश की 752 सड़कें बंद हैं। कालका-शिमला रेल मार्ग बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है।
इस तबाही के कारण राज्यस्तरीय स्वतंत्रता दिवस कार्यक्रम का स्थान बदलकर मनाली के बजाय शिमला कर दिया गया है। वैसे आप सोच रहे होंगे कि आखिर ये बादल फटना क्या है? कैसे बादल फटने से इतनी तबाही मच जाती है? आखिर हर साल ये बादल क्यों फटते हैं? आइए, इसे समझने की कोशिश करते हैं।

बादल फटना क्या होता है?
भारतीय मौसम विज्ञान (आईएमडी) के मुताबिक एक घंटे में 100 मिमी बारिश एक खास दायरे (एक से 10 किमी) में हो जाये तो उसे बादल फटना कहा जाता है। वहीं वैज्ञानिक भाषा में 'क्लाउडबर्स्ट' या 'फ्लैश फ्लड' भी कहा जाता है। सीधे और साधारण शब्दों में कहें तो अचानक से बहुत भारी मात्रा में बारिश होना ही बादल फटना कहा जाता है। बता दें कि कभी-कभी एक जगह पर एक से ज्यादा बादल फट सकते हैं। ऐसी स्थिति में बहुत ज्यादा नुकसान झेलना पड़ता है। जैसा कि साल 2013 में जब उत्तराखंड में बादल फटा तब भारी जान-माल का नुकसान हुआ था।
आखिर कब फटता है बादल?
बादल फटने की घटना तब होती है। जब तापमान बढ़ने से भारी मात्रा में नमी वाले बादल एक जगह एकत्र हो जाते हैं। तब पानी की बूंदें आपस में मिल जाती हैं। इससे बूंदों का भार इतना ज्यादा बढ़ जाता है कि बादल का घनत्व बढ़ जाता है। इसके बाद एक सीमित दायरे में अचानक से तेज बारिश होने लगती है। इस प्रक्रिया को ही बादल फटना कहा जाता है।
पहाड़ों में ज्यादा क्यों फटता है बादल?
धरती की सतह से 12-15 किलोमीटर की ऊंचाई पर बादल फटने की घटना ज्यादा होती हैं। हिमाचल और उत्तराखंड जैसे राज्यों में पहाड़ों की ऊंचाई के कारण बादल आगे नहीं बढ़ पाते और एक ही स्थान पर अचानक से तेज बारिश हो जाती है।
वैज्ञानिकों की मानें तो मानसून के दौरान गर्म हवाएं जब ठंडी हवाओं के संपर्क में आती है तब बड़े आकार के बादल बनते हैं। हालांकि, हिमाचल और उत्तराखंड में ऐसा पर्वतीय कारकों के कारण भी होता है। इसलिए हिमालयी क्षेत्रों में बादल फटने की घटनाएं ज्यादा होती हैं।
तो क्या नॉर्थ-ईस्ट में भी फटते हैं बादल?
देश में सबसे ज्यादा बारिश चेरापूंजी जैसे इलाकों में होती है। यहां साल भर बारिश होती है। दरअसल बंगाल की खाड़ी से नमी लेकर यहां हवाएं आती हैं। मानसून के समय में नॉर्थ-ईस्ट में भी बादल फटने की परिस्थितियां बनती हैं। हालांकि, जिन इलाकों में बादल फटने की घटनाएं होती हैं, वहां ज्यादा लोग रहते नहीं हैं। इसलिए जानमाल के नुकसान की खबरें नहीं आती हैं।
बादल फटने का पूर्वानुमान लगाया जा सकता है?
बादल फटने की घटनाएं अक्सर एक से 10 किलोमीटर की दूरी के क्षेत्र में होती हैं। इस वजह से इनका पूर्वानुमान लगाना मुश्किल हो जाता है। हालांकि, रडार से एक बड़े एरिया के लिए बहुत भारी बारिश का पूर्वानुमान मौसम विभाग लगा सकता है, लेकिन बादल फटने की घटना किस इलाके में होगी, यह पहले से बता पाना मौसम विभाग के लिए भी मुश्किल होता है।
जानें कब-कब फटा बादल?
वैसे तो हर साल बादल फटने की घटना पहाड़ों में होती है। खासकर उत्तराखंड, हिमाचल और जम्मू-कश्मीर जैसे राज्यों में। इन राज्यों में हर साल सैकड़ों लोगों की जान चली जाती है।
जुलाई 2022: अमरनाथ गुफा के पास बादल फटने से 15 श्रद्धालुओं की मौत हो गई थी। जबकि करीब 50 लोग लापता हो गये थे।
मई 2021: उत्तराखंड के देवप्रयाग में बादल फटने से कई इमारतों और दुकानों को नुकसान पहुंचा था। इससे बिजली की लाइन, पेयजल लाइन और अन्य जरूरी सुविधाएं बुरी तरह प्रभावित हुई थीं।
जुलाई 2020: उत्तराखंड के पिथौरागढ़ में बादल फटने से 3 लोगों की मौत हुई थी। जबकि 9 लोग लापता हो गये थे। इस घटना में पिथौरागढ़ के तागा गांव और गेला गांव में दर्जनों घर ढह गये थे।
मई 2018: उत्तराखंड के चमोली में बादल फटने से कई वाहन मलबे और कीचड़ में फंस गये थे।
28 मई 2016: उत्तराखंड के टिहरी जिले में बादल फटने से आधा दर्जन गांव तबाह हो गये थे। 100 से ज्यादा जानवरों की मौत हो गई थी।
अगस्त 2015: हिमाचल प्रदेश के धरमपुर में बादल फटने से 3 लोगों की मौत हो गई थी। इस बाढ़ के कारण धर्मपुर बस स्टेशन डूब गया था और आवागमन ठप हो गया था।
जुलाई 2015: कश्मीर में इस महीने लगातार बादल फटने की 8 घटनाएं हुईं थीं। जिसमें 10 लोगों की मौत हो गई थी। इस तबाही का सबसे ज्यादा असर घाटी के बड़गाम, कुपवाड़ा और गंदेरबल क्षेत्र में हुआ था।
जून 2013: उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग के केदारनाथ में बादल फटने से करीब 5 हजार लोगों की मौत हो गई थी।












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