'दीदी किसी की सुनती हैं', 17 साल तक TMC में साथ रहीं शताब्दी रॉय क्यों हुईं बागी? ममता पर पहली बार खुलकर बोलीं

TMC MP Satabdi Roy: पश्चिम बंगाल की राजनीति में मचा घमासान थमने का नाम नहीं ले रहा है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के अंदर भड़की बगावत की आग अब पूरी तरह से बाहर आ चुकी है। पार्टी के बड़े चेहरों, सुखेंदु शेखर रे और काकोली घोष दस्तीदार के बाद अब टीएमसी की बेहद सीनियर नेता मशहूर एक्ट्रेस और चार बार की लोकसभा सांसद शताब्दी रॉय ने भी खुलकर बगावत का बिगुल फूंक दिया है। साल 2009 से ममता बनर्जी के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलने वाली शताब्दी रॉय ने साफ-साफ कह दिया है कि अब पानी सिर से ऊपर जा चुका है।

उन्होंने एक इंटरव्यू में इमोशनल लेकिन तल्ख लहजे में कहा, "दीदी बदल गई थीं।"यह सिर्फ एक व्यक्तिगत टिप्पणी नहीं मानी जा रही, बल्कि इसे टीएमसी के भीतर बढ़ती नाराजगी की सार्वजनिक अभिव्यक्ति के रूप में देखा जा रहा है। आइए समझते हैं कि आखिर 17 साल पुराना यह मजबूत रिश्ता क्यों टूटा और शताब्दी रॉय ने बगावत के पीछे कौन से बड़े कारण बताए हैं।

TMC MP Satabdi Roy

🔷'दीदी बदल गई थीं': शताब्दी रॉय का वो दर्द जो बगावत बन गया

शताब्दी रॉय ने साफ किया कि ममता बनर्जी के साथ उनका एक गहरा इमोशनल रिश्ता रहा है, लेकिन राजनीति में सिर्फ भावनाओं से काम नहीं चलता। उन्होंने बताया कि पिछले कुछ सालों में ममता बनर्जी के काम करने और बातचीत करने के तरीके में बहुत बड़ा बदलाव आ गया था। शताब्दी के मुताबिक, पार्टी के भीतर अब आम सांसदों और नेताओं की बात सुनना बिल्कुल बंद कर दिया गया था।

पार्टी छोड़ने की सबसे बड़ी वजह बताते हुए उन्होंने कहा कि टीएमसी के भीतर अब सिर्फ गिने-चुने लोगों की ही चलती है। केवल कुछ खास नेताओं को ही ममता बनर्जी से मिलने और फैसले लेने की छूट थी, जबकि बाकी सभी सांसदों को पूरी तरह किनारे कर दिया गया था। जब भी कोई नेता अपनी बात रखने की कोशिश करता, तो उसे चुप रहने के लिए कह दिया जाता था। हालत यह हो गई थी कि ममता सरकार के मंत्री तक सांसदों के फोन नहीं उठाते थे और न ही उनसे मिलने का वक्त देते थे।

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🔷टाइमिंग पर सवाल: हार के बाद ही क्यों खुली आंख?

जब शताब्दी रॉय से यह सवाल पूछा गया कि जब तक टीएमसी बंगाल की सत्ता में थी, तब तक सब चुप क्यों थे? पार्टी के कमजोर होते ही सबने बोलना क्यों शुरू किया? इस पर उन्होंने बहुत ही सीधा और बेबाक जवाब दिया। शताब्दी ने कहा कि चीजें अब बिल्कुल साफ हो चुकी हैं। जब टीएमसी सरकार में थी, तब जो कुछ भी अंदरखाने चल रहा था, उसे हम देख रहे थे।

अब स्थिति को समझने के बाद उन्हें अपने क्षेत्र की जनता के हित में यह कड़ा फैसला लेना पड़ा है। उनके मुताबिक, पार्टी के भीतर की दिक्कतें कई सालों से धीरे-धीरे जमा हो रही थीं, जो अब इतनी बढ़ गईं कि उन्हें अनदेखा करना नामुमकिन हो गया था।

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🔷TMC में फैले भ्रष्टाचार को लेकर क्या बोलीं शताब्दी रॉय?

शताब्दी रॉय ने केवल नेतृत्व पर ही सवाल नहीं उठाए, बल्कि पार्टी में फैले भ्रष्टाचार को लेकर भी बड़ा हमला बोला। उन्होंने कहा कि टीएमसी में नीचे से लेकर ऊपर तक बहुत ज्यादा भ्रष्टाचार हो रहा था, जिसे देखकर उन्हें बहुत निराशा हुई।

उन्होंने गर्व से कहा कि राजनीति में अपनी साख बचाने के लिए उन्हें किसी पार्टी के प्रोटेक्शन या धोबी पछाड़ की जरूरत नहीं है। उनकी छवि जनता के बीच बिल्कुल साफ-सुथरी है और वो बेदाग रहकर ही लोगों के लिए काम करना चाहती हैं। बगावत करने वाले एक और सीनियर नेता सुखेंदु शेखर रे ने भी उनके सुर में सुर मिलाते हुए कहा कि पार्टी में सीनियर नेताओं की कोई इज्जत नहीं बची थी, उन्हें बिल्कुल 'फालतू आदमी' समझ लिया गया था।

🔷बागी गुट की बड़ी तैयारी: डिप्टी लीडर बनीं शताब्दी रॉय

यह बगावत सिर्फ बयानों तक सीमित नहीं है, बल्कि दिल्ली में इसके लिए बाकायदा एक नया मोर्चा तैयार कर लिया गया है। इस बागी गुट में शताब्दी रॉय को एक बड़ी जिम्मेदारी दी गई है, उन्हें इस गुट का डिप्टी लीडर चुना गया है। वहीं काकोली घोष दस्तीदार को इस ग्रुप का चीफ व्हिप बनाया गया है।

काकोली घोष का दावा है कि उनके साथ टीएमसी के 28 में से 20 लोकसभा सांसदों का समर्थन है। इन सभी सांसदों ने दिल्ली में बीजेपी के बड़े नेता और केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के घर पर एक अहम बैठक भी की थी।

इस बैठक की एक तस्वीर भी सामने आई है, जिसमें सुखेंदु शेखर रे, अबू ताहिर, असित माल, अरूप चक्रवर्ती, कालीपदा सरेन, जगदीश बसुनिया, प्रसून बनर्जी और शर्मिला सरकार जैसे बड़े चेहरे शताब्दी रॉय के साथ नजर आ रहे हैं। इसके बाद बागी सांसदों ने शुभेंदु अधिकारी के साथ शताब्दी रॉय के दिल्ली वाले घर पर भी करीब 40 मिनट तक लंबी चर्चा की, जिसके बाद शुभेंदु अधिकारी ने बाहर आकर जीत का इशारा भी किया।

🔷व्हिप की कानूनी लड़ाई: संसद में अब क्या होगा?

इस बगावत के बाद संसद के भीतर एक दिलचस्प कानूनी जंग शुरू हो गई है। एक तरफ बागी गुट का दावा है कि काकोली घोष दस्तीदार ही लोकसभा में पार्टी की असली चीफ व्हिप हैं और उन्होंने 20 सांसदों के दस्तखत वाली चिट्ठी स्पीकर ओम बिरला को भेजकर संसद में एक अलग ब्लॉक के रूप में बैठने की मांग की है। यह रणनीति इसलिए अपनाई गई है ताकि सांसदों पर दल-बदल विरोधी कानून न लागू हो सके।

दूसरी तरफ, ममता बनर्जी के खेमे ने इस दावे को पूरी तरह खारिज कर दिया है। टीएमसी के सूत्रों का कहना है कि ममता बनर्जी ने 20 मई को ही एक ऑफिशियल लेटर भेजकर काकोली घोष को पद से हटा दिया था और उनकी जगह कल्याण बनर्जी को नया चीफ व्हिप बना दिया था, जिसकी रिसीविंग स्पीकर ऑफिस से 29 मई को मिल चुकी है। अब देखना यह होगा कि लोकसभा स्पीकर इस मामले में क्या फैसला लेते हैं।

बंगाल विधानसभा में पहले ही 80 में से 58 विधायकों ने बगावत करके ऋतब्रत बनर्जी को अपना नेता चुन लिया था। अब लोकसभा और राज्यसभा में भी सांसदों के इस तरह बागी होने से साफ है कि ममता बनर्जी अपनी राजनीतिक जिंदगी के सबसे बड़े संकट से गुजर रही हैं।

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