MP News: जल गंगा संवर्धन अभियान को मिला वैज्ञानिक आधार, भूजल प्रबंधन के लिए तैयार हुआ ‘अंतर्जली यात्रा’ एटलस

जल गंगा अभियान को मैपकास्ट और वीर भारत न्यास द्वारा बनाए गए भूजल एटलस के साथ एक वैज्ञानिक आधार मिला है। एनआरएससी-इसरो के मार्गदर्शन में उपग्रह इमेजरी, रिमोट सेंसिंग और जीआईएस का उपयोग करके, यह प्रमुख जिलों के लिए डेटा-संचालित निर्णयों में राज्य विभागों की सहायता करते हुए, भूजल क्षमता, गुणवत्ता और स्वास्थ्य जोखिमों का नक्शा बनाता है।

प्रदेश में जल संरक्षण और सतत पर्यावरण प्रबंधन को मजबूत बनाने के उद्देश्य से संचालित जल गंगा संवर्धन अभियान को अब वैज्ञानिक और तकनीकी आधार भी मिल गया है। वीर भारत न्यास और मैपकास्ट की पहल से भूजल संरक्षण, जल स्रोतों के पुनर्जीवन और जल गुणवत्ता आकलन के लिए आधुनिक तकनीकों पर आधारित "अंतर्जली यात्रा" भूजल एटलस तैयार किया गया है। यह एटलस उपग्रह छायाचित्रों, रिमोट सेंसिंग और जीआईएस तकनीक के माध्यम से विकसित किया गया है, जिससे भूजल प्रबंधन को अधिक प्रभावी और डेटा आधारित बनाया जा सकेगा।

Groundwater Atlas for Sustainable Water

जल गंगा संवर्धन अभियान 2026 के तहत मैपकास्ट द्वारा भोपाल, इंदौर, उज्जैन, ग्वालियर और जबलपुर जिलों के विस्तृत भूजल एटलस तैयार किए गए हैं। इन्हें संबंधित विभागों को उपलब्ध कराया जा रहा है, ताकि जल संसाधनों के संरक्षण और प्रबंधन में वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाया जा सके।

आधुनिक तकनीक से तैयार हुआ वैज्ञानिक दस्तावेज

राष्ट्रीय रिमोट सेंसिंग केन्द्र (NRSC)-इसरो, हैदराबाद के तकनीकी मार्गदर्शन में आधुनिक रिमोट सेंसिंग एवं जीआईएस तकनीकों का उपयोग करते हुए विस्तृत भूजल मानचित्र तैयार किए गए हैं। इन मानचित्रों के आधार पर "अंतर्जली यात्रा" एटलस विकसित किया गया है।

यह दस्तावेज डिजिटल एलिवेशन मॉडल, लीनियामेंट विश्लेषण और लिथोलॉजिकल डेटा के समेकित अध्ययन पर आधारित है। एटलस में भूजल संभावना मानचित्र और भूजल गुणवत्ता मानचित्र शामिल किए गए हैं, जो जल प्रबंधन से जुड़े विभागों को वैज्ञानिक तरीके से निर्णय लेने में मदद करेंगे।

जलजनित बीमारियों की पहचान में मिलेगी मदद

एटलस के माध्यम से फ्लोराइड, नाइट्रेट, रासायनिक प्रदूषण और भारी धातुओं की उपस्थिति का क्षेत्रवार विश्लेषण भी उपलब्ध कराया गया है। इससे जलजनित स्वास्थ्य समस्याओं की पहचान और उनके निराकरण में सहायता मिलेगी। विशेषज्ञों के अनुसार, यह पहल ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकती है।

नीति निर्माण और शोध कार्यों में होगा उपयोग

यह भूजल एटलस जल संसाधन, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, ग्रामीण विकास और कृषि विभाग सहित जल क्षेत्र से जुड़े विभिन्न शासकीय एवं अर्द्धशासकीय संस्थानों के लिए उपयोगी साबित होगा। साथ ही, जल विज्ञान, पर्यावरण अध्ययन और अनुसंधान के क्षेत्र में कार्यरत वैज्ञानिकों, शोधार्थियों और शिक्षाविदों के लिए भी यह एक महत्वपूर्ण संदर्भ सामग्री के रूप में काम करेगा।

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