पैसे दो, पेपर लो! CBI ने खोली मनीषा वाघमारे की एक-एक पोल, कोर्ट ने किया राहत देने से इनकार, नहीं मिली बेल
NEET UG Paper Leak Update: देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET UG से जुड़े पेपर लीक मामले में एक बार फिर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। लाखों छात्रों के भविष्य से जुड़े इस मामले में दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने मुख्य आरोपियों में शामिल मनीषा वाघमारे को राहत देने से इनकार कर दिया है। अदालत ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी, जिससे जांच एजेंसियों को बड़ी मजबूती मिली है।
सुनवाई के दौरान CBI ने कोर्ट के सामने ऐसे तथ्य और दस्तावेज रखे, जिनसे कथित पेपर लीक नेटवर्क की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े हुए। जांच एजेंसी का दावा है कि मनीषा वाघमारे इस पूरे मामले में केवल नाम मात्र की आरोपी नहीं हैं, बल्कि उनकी भूमिका काफी अहम रही है। अदालत ने भी मामले की गंभीरता को देखते हुए फिलहाल उन्हें जेल से बाहर आने की अनुमति नहीं दी।

जमानत याचिका पर कोर्ट का बड़ा फैसला
राउज एवेन्यू कोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान मनीषा वाघमारे की ओर से जमानत की मांग की गई थी। हालांकि अदालत ने मामले के तथ्यों और जांच एजेंसी द्वारा पेश की गई सामग्री पर विचार करने के बाद याचिका खारिज कर दी। कोर्ट का मानना रहा कि इस स्तर पर आरोपी को राहत देने से जांच प्रभावित हो सकती है।
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CBI ने बताई कथित भूमिका
सुनवाई के दौरान CBI ने अदालत को बताया कि मनीषा वाघमारे कथित तौर पर प्रश्नपत्रों को उम्मीदवारों तक पहुंचाने की प्रक्रिया में सक्रिय रूप से शामिल थीं। एजेंसी के मुताबिक, वह कुछ अन्य लोगों के साथ मिलकर ऐसे छात्रों की तलाश करती थीं जो परीक्षा में सफलता के लिए बड़ी रकम खर्च करने को तैयार हों। CBI का दावा है कि यह केवल सलाह या कोचिंग तक सीमित मामला नहीं था, बल्कि इसके जरिए कथित तौर पर परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने की व्यवस्था बनाई गई थी।
फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी के सवाल पहुंचाने का आरोप
जांच एजेंसी ने अदालत में कहा कि उम्मीदवारों को सामान्य अध्ययन सामग्री या संभावित प्रश्न नहीं दिए गए थे। CBI के अनुसार, उन्हें परीक्षा से पहले फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी से जुड़े वास्तविक प्रश्न उपलब्ध कराए गए थे। एजेंसी का कहना है कि यही वजह है कि मामले को बेहद गंभीर माना जा रहा है, क्योंकि इससे परीक्षा की निष्पक्षता पर सीधा असर पड़ा।
उम्मीदवारों के बयान बने अहम सबूत
CBI ने कोर्ट को यह भी बताया कि जांच के दौरान कई उम्मीदवारों के बयान दर्ज किए गए हैं। एजेंसी के अनुसार, कुछ अभ्यर्थियों ने स्वीकार किया है कि उन्हें परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र उपलब्ध कराए गए थे। जांच एजेंसी ने दावा किया कि इन बयानों में पैसों के लेनदेन का भी जिक्र है। CBI का कहना है कि उसके पास ऐसे दस्तावेज और रिकॉर्ड मौजूद हैं जो कथित तौर पर इस नेटवर्क और आर्थिक लेनदेन की ओर इशारा करते हैं।
जांच पर असर पड़ने की आशंका
सुनवाई के दौरान CBI ने अदालत से कहा कि मामले की जांच अभी भी महत्वपूर्ण चरण में है। एजेंसी का तर्क था कि यदि इस समय आरोपी को जमानत मिलती है तो जांच प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है और सबूतों पर भी असर पड़ सकता है। इन दलीलों को ध्यान में रखते हुए अदालत ने मनीषा वाघमारे को फिलहाल राहत देने से इनकार कर दिया और उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी।
देशभर में चर्चा का विषय बना मामला
NEET UG पेपर लीक मामला पिछले कई महीनों से देशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है। लाखों छात्रों और उनके परिवारों की नजर इस मामले की जांच और अदालत की कार्यवाही पर टिकी हुई है। अब मनीषा वाघमारे की जमानत याचिका खारिज होने के बाद जांच एजेंसियों की कार्रवाई और तेज होने की संभावना जताई जा रही है।
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