जानिए भारत-पाक के बीच मौजूद एलओसी और बॉर्डर में क्या अंतर है?
नई दिल्ली। भारत और पाकिस्तान के बीच सीमा पर तनाव बढ़ता ही जा रहा है। कई लोग जहां युद्ध की आशंका से इनकार नहीं कर रहे हैं तो वहीं कुछ लोग मान रहे हैं कि दोनों देशों की सेनाएं इस समय पूरी तरह से तैयार हैं।

इन सारी खबरों के बीच ही आपको अक्सर अंतराष्ट्रीय सीमा या इंटरनेशनल बॉर्डर और एलओसी या लाइन ऑफ कंट्रोल जैसे शब्द सुनाई देते होंगे।
क्या आप जानते हैं कि इंटरनेशनल बॉर्डर और एलओसी दोनों ही अलग-अलग शब्द होते हैं और इन दोनों का ही मतलब भी अलग होता है। आइए आज हम आपको बताते हैं कि क्या होता है इंटरनेशनल बॉर्डर और क्या है एलओसी।
अंतराष्ट्रीय सीमा या इंटरनेशनल बॉर्डर (आईबी)
- इंटरनेशनल बॉर्डर उस लाइन को कहा है जाता है जो दोनों को अलग करती है और जिसे दुनिया ने स्वीकृति दी है।
- आईबी रेडक्लिफ लाइन पर स्थित है और यह भारत को पाकिस्तान के चार प्रांतों से अलग करता है।
- बॉर्डर जिन चार प्रांतों से भारत-पाक अलग हैं वह हैं कश्मीर, वाघा, पाकिस्तान का पंजाब और भारत का पंजाब।
- एक जीरो प्वाइंट भी है जो भारत के गुजरात और राजस्थान और पाकिस्तान के सिंध को अलग करता है।
- दोनों देशों के बीच 2,900 किमी का बॉर्डर है और इसे दुनिया सबसे ज्यादा संघर्ष वाली सीमा मानती है।
- भारत, पाक के अलावा म्यांमार, बांग्लादेश और भूटान के साथ भी इंटरनेशनल बॉर्डर साझा करता है।
क्या है एलओसी
- एलओसी यानी लाइन ऑफ कंट्रोल वह लाइन है जिसे अंतराष्ट्रीय समुदाय नहीं मानता है लेकिन दोनों देश इसे स्वीकारते हैं।
- दोनों देशों के बीच संघर्ष के बाद एलओसी को शुरू किया गया।
- वर्ष 1947 में दोनों देशों के विभाजन के बाद लगातार सीजफायर हुआ और फिर एलओसी अस्तित्व में आई।
- इस वर्ष पाक सेना की ओर से समर्थित आतंकी कश्मीर घाटी में दाखिल हुए और इन्हें इंडियन आर्मी ने खदेड़ा।
- इसके बाद 1948 में एलओसी यानी एक लाइन ऑफ कंट्रोल को शुरू किया गया।
- वर्ष 1971 में दोनों देशों के बीच जंग हुई और फिर 1972 में भारत और पाक के बीच शिमला समझौता हुआ।
- इस समझौते में ही दोनों देशों ने एलओसी को औपचारिक तौर पर स्वीकार किया।
- एलओसी कोई भी आधिकारिक सीमा नहीं है लेकिन सैन्य नियंत्रण वाला वह हिस्सा होता है जो विवादित हिस्सों से दूर रहता है।












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