Retail Inflation: क्या है खुदरा महंगाई और इसका आपकी जेब से क्या लेना देना है?
खुदरा महंगाई को अंग्रेजी में रिटेल इन्फ्लेशन कहते है। हिंदी में इसे खुदरा मुद्रास्फीति भी कहते है। इसका बढ़ना और घटना दोनों ही किसी भी देश के नागरिकों के दैनिक जीवन को सीधे तौर पर प्रभावित करता है।

भारत सरकार के सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय ने हाल ही में रिपोर्ट जारी कर बताया कि जनवरी 2023 में भारत में खुदरा महंगाई 6.52 प्रतिशत थी। यह खुदरा महंगाई पिछले 3 महीनों में सबसे ज्यादा है क्योंकि दिसंबर 2022 में खुदरा महंगाई 5.72 प्रतिशत और उससे पहले नवंबर में 5.88 प्रतिशत थी।
खुदरा महंगाई की परिभाषा
सामान्य भाषा में समझे तो महंगाई दो तरह की होती हैं। एक रिटेल यानी खुदरा और दूसरी होलसेल यानी थोक महंगाई। खुदरा महंगाई की दर आम ग्राहकों की तरफ से दी जाने वाली कीमतों पर आधारित होती है। इसको कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) या उपभोक्ता मूल्य सूचकांक भी कहते है। वहीं, थोक महंगाई का अर्थ थोक बाजार में एक कारोबारी से दूसरे कारोबारी के बीच होने वाले कारोबार से होता है। इसे होलसेल प्राइस इंडेक्स (WPI) भी कहते है।
कंज्यूमर प्राइस इंडैक्स (CPI) पर आधारित महंगाई सामान और सेवाओं की खुदरा कीमतों में बदलाव को ट्रैक करती है, जिन्हें परिवार अपने रोजाना इस्तेमाल के लिए खरीदते हैं। महंगाई को मापने के लिए अनुमान लगाया जाता है कि पिछले साल की समान अवधि के दौरान CPI में कितने प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।
जेब पर कैसे असर डालती है
मुद्रास्फीति की गणना बेहद जटिल प्रक्रिया होती है। इसे आसान शब्दों में समझे तो मान लीजिये दिसंबर 2022 में आपने अपने घर की जरूरतों के किसी सामान को खरीदने के लिए 100 रुपये खर्च किये। ठीक एक महीने बाद, जनवरी 2023 में उसी सामान को खरीदने के लिए आपको 110 रुपये खर्चा करने पड़े। यह जो 10 रुपये की अतिरिक्त राशि खर्च हुई है उसे ही खुदरा महंगाई अथवा मुद्रास्फीति कहते है।
खुदरा महंगाई को समझने का एक और तरीका है। उदाहरण के लिए, कोई एक परिवार महीने का 5000 रुपये कमाता है और उसमें से 1000 रुपये की कीमत पर घरेलू आवश्यक वस्तुएं खरीदता हैं। फिर किसी एक महीने उन्हीं पदार्थों में किसी एक निश्चित खाद्य पदार्थ की कीमत में वृद्धि हो गयी और इससे कुल कीमतों में इजाफा हो गया। अब मान लीजिए कि वह कुल वृद्धि 100 रुपये की हुई है। अब चूंकि आपका बजट 1000 रुपए सीमित है। तो इस स्थिति में आपको या तो अपनी आवश्यक घरेलू जरूरतों में से किसी एक को कम करना होगा अथवा 1000 + 100 रुपए ज्यादा दाम देकर अपना घर चलाने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। कुलमिलाकर यह आपके मासिक बजट को प्रभावित कर सकती है।
खुदरा महंगाई कौन मापता है
खुदरा महंगाई मुख्य रूप से कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स (CPI) का उपयोग करके मापी जाती है। इसमें 299 वस्तुओं एवं सेवाओं जैसे खाना, पीना, कपड़े, रहना, ईंधन और परिवहन का विश्लेषण किया जाता हैं। इसके आकंडे सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय और श्रम मंत्रालय द्वारा अलग से एकत्र किए जाते हैं। इसकी गणना हर महीने और सालाना की जाती हैं। इस पूरी प्रक्रिया में केंद्रीय भूमिका राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (National Statistics Office) की होती है।
खुदरा महंगाई बढ़ने का कारण
खुदरा महंगाई बढ़ने के कई कारण हैं जैसे जब किसी वस्तु एवं सेवा की मांग पूर्ति से ज्यादा हो जाती है, तो कीमतें बढ़ जाती हैं। दूसरा, यदि वस्तुओं एवं सेवाओं के उत्पादन के मुकाबले लोगों के पास पैसा अधिक होगा, तो सामान की ज्यादा मांग हो जाएगी। ऐसे में उत्पादन सीमित हुआ तो खुदरा महंगाई बढ़ सकती है। तीसरा, यदि कच्चे माल या लेबर की लागत बढ़ जाती है, तो वस्तुओं एवं सेवाओं के निर्माता उस बढ़ी लागत को उपभोक्ताओं को महंगा सामान बेचकर पूरा करेगा।
चौथा, अगर घरेलू मुद्रा का मूल्य दूसरे देश की मुद्रा विशेषकर डॉलर के मुकाबले गिरता है, तो वस्तुओं की कीमत बढ़ जाएगी। पांचवां, सरकार की नीतियां भी खुदरा महंगाई बढ़ा सकती है, जैसे अगर सरकार किन्हीं वस्तुओं एवं सेवाओं पर अधिक टैक्स लगाती है, तो उसकी कीमतें बढ़ जाएगी।
खुदरा महंगाई बढ़ने के नुकसान
किसी भी देश में खुदरा महंगाई बढ़ने के कई नुकसान हैं जैसे वस्तुओं एवं सेवाओं की कीमतें बढ़ती हैं, तो उपभोक्ताओं की खरीदने की क्षमता कम हो जाती है। ज्यादा खुदरा महंगाई लोगों की बचत में कमी लाती है। खुदरा महंगाई अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता भी पैदा कर सकती है, क्योंकि इसकी वजह से कोई भी व्यापार और उपभोक्ता को वस्तुओं एवं सेवाओं की आगे की कीमतों के बारे में पता लगाना मुश्किल हो जाएगा। खुदरा महंगाई बढ़ने का एक नुकसान यह भी है कि इसे काबू करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक ब्याज दरों में वृद्धि कर सकता है।
सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में खुदरा महंगाई
दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं यानी अमेरिका, चीन, जापान और जर्मनी में से सबसे ज्यादा खुदरा महंगाई जर्मनी में है और सबसे कम खुदरा महंगाई चीन में है। जनवरी 2023 में जर्मनी की खुदरा महंगाई 8.7 प्रतिशत जबकि चीन की खुदरा महंगाई 2.1 प्रतिशत थी। वहीं, अमेरिका की खुदरा महंगाई 6.4 प्रतिशत, जापान की खुदरा महंगाई 4.3 प्रतिशत है। इसके अलावा, पड़ोसी देश पाकिस्तान की खुदरा महंगाई देखें तो जनवरी 2023 में वहां की खुदरा महंगाई 27.55 प्रतिशत थी।












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