क्या है 'जल्लिकट्टू महोत्सव' क्यों मचा है घमासान?
नई दिल्ली। इस समय तमिलनाडु के मशहूर बैल दौड़ यानी 'जल्लिकट्टू महोत्सव' को लेकर हाहाकार मचा हुआ है। सुप्रीम कोर्ट ने इस पर रोक लगा दी है जिसके बाद इसे लेकर तमिलनाडु में विरोध हो रहा है।
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क्या है जल्लिकट्टू महोत्सव?
- जल्लिकट्टू महोत्सव, तमिलनाडु के पोंगल पर्व पर मट्टू पोंगल के दिन होने वाला बैलों की दौड़ वाला महोत्सव है।
- इस दौड़ में बिना लगाम के बैल दौड़ते हैं जिन्हें लोग रोकने की कोशिश करते हैं।
- जो बैलों पर लगाम कस लेता है वो विजयी हो जाता है।
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क्यों लगाई रोक?
दरअसल इस महोत्सव को लेकर एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था जिसमें दिखाया गया था कि महोत्सव से पहले बैलों को शराब पिलाई जाती है।

बैलों को निर्दयता पूर्वक मारा जाता था
बैलों को मारा जाता है जिसके कारण जब दौड़ शुरू होती है तो वो गुस्से में बेतहाशा दौड़ते हैं।

रोक लगाने की मांग
इस वीडियों के बाद एनीमल वेल्फेयर बोर्ड ऑफ इंडिया, पीपुल फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनीमल्स (पेटा) इंडिया और बैंगलोर के एक एनजीओ ने इस दौड़ को रोकने के लिए याचिका दायर की।

जल्लिकट्टू महोत्सव पर रोक
जिस पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने जल्लिकट्टू महोत्सव पर रोक लगा दी है। यह रोक केवल तामिलनाडु में ही नहीं बल्कि पूरे देश में लागू होगी।
सरकार से मांगा जवाब
चूंकि इस विवादित दौड़ पर से केंद्र सरकार ने 7 जनवरी को रोक हटा दी थी इसलिए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र के आदेश को रोक दिया है और साथ ही एक हफ्ते के भीतर तमिलनाडु, महाराष्ट्र और केंद्र सरकार से जवाब मांगा है।












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