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क्या होता है Honey trap, जानें ऑनलाइन फ्रेंडशिप की आड़ में कैसे फंसाया जाता है?

इस बार हनीट्रैप का निशाना DRDO के सीनियर वैज्ञानिक बने हैं। देश में सैन्य अथवा अति-संवेदनशील पदों पर आसीन लोगों को हनीट्रैप में फंसाने का यह कोई पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी कई बार ऐसे मामलों का खुलासा हो चुका है।

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Honey Trap: महाराष्ट्र एंटी टेररिज्म स्क्वाड (ATS) ने हनीट्रैप के एक संदिग्ध मामले में डीआरडीओ के एक सीनियर वैज्ञानिक को गिरफ्तार किया है। महाराष्ट्र एटीएस को शक है कि वह पाकिस्तान की खुफिया एजेंसियों के साथ कथित रूप से संपर्क में थे। खबरों के मुताबिक शुरूआती जांच में यह साबित हुआ था कि वह संवेदनशील सूचनाएं लीक कर रहे थे, तब उन्हें प्रयोगशाला निदेशक के पद से हटाया गया था। उनके खिलाफ सुरक्षा एजेंसियों से सूचनाएं मिलने के बाद डीआरडीओ ने जांच शुरू की थी। फिर उन्हें अन्य ऑफिस से संबद्ध किया गया था। यह वैज्ञानिक साल 2022 से ही पाकिस्तानी खुफिया एजेंट के संपर्क में था।

सबसे पहले जानते हैं, आखिर हनीट्रैप क्या है?

हनीट्रैप दो शब्दों से मिलकर बना है 'हनी और ट्रैप'। हनी का मतलब शहद और ट्रैप का मतलब जाल होता है। सीधे कहें तो मीठे शब्दों से अपने जाल में फंसाना। ज्यादातर इस मामले में खूबसूरत महिलाओं को हनीट्रैप करने का काम सौंपा जाता है। इसमें ये महिलाएं (या कहे जासूस) सेना के अधिकारियों व संवेदनशील पदों पर बैठों लोगों को अपना शिकार बनाती हैं। उनका मकसद होता है देश या किसी खास संस्था से जुड़ी गोपनीय जानकारियां हासिल करना।

कैसे किया जाता है हनीट्रैप?

दूसरे विश्वयुद्ध के दौरान हिटलर की नाजी सेना को फंसाने के लिए भी हनीट्रैप का इस्तेमाल किया गया था। हालांकि, समय के साथ हनीट्रैप के तरीके भी बदल गये हैं। अब सोशल मीडिया के जरिए ही ज्यादातर हनीट्रैप किया जाता है। इसमें फेसबुक, व्हाट्सएप, वीडियो कॉल, मैसेंजर व अन्य माध्यमों से लोगों को शिकार बनाया जाता है।

बता दें कि हनीट्रैप की आशंका को लेकर सेना पिछले कुछ सालों से काफी सतर्क है और वह समय-समय पर सैनिकों को आदेश देती आई है कि वे अपनी ड्यूटी के दौरान सोशल मीडिया का इस्‍तेमाल नहीं करें। साथ ही संवेदनशील जगहों, गोपनीय कामों को सोशल मीडिया पर साझा ना करें।

सेना ने अब तक हनी ट्रैप से बचने के लिए क्या किया?

डायरेक्टर जनरल ऑफ मिलिट्री इटेलिजेंस ने 2020 में भारतीय सेना के अधिकारियों को हनी ट्रैप से बचने के लिए एक आदेश जारी किया था। जिसके मुताबिक भारतीय सेना में कार्यरत 13 लाख जवानों को 89 ऐप की एक लिस्ट दी गई थी, जिसे उन्हें जुलाई महीने तक अनइंस्टॉल कर देने को कहा गया था। इस लिस्ट में अमेरिकी सोशल नेटवर्किंग साइट्स फेसबुक, इंस्टग्राम, ट्रू-कॉलर भी शामिल था। साथ ही सेना ने पाकिस्तान द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे 150 ऐसे प्रोफाइल की पहचान कर जानकारी दी थी, जो हनीट्रैप के लिए इस्तेमाल किये जा रहे थे।

कुछ चर्चित हनीट्रैप केस

प्रदीप कुमार प्रजापत - मई 2022 में राजस्थान के जोधपुर में इंटेलिजेंस ने हनीट्रैप के मामले में पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी (ISI) के लिए जासूसी करने वाले आरोपी सेना के जवान को गिरफ्तार किया था। आरोपी प्रदीप कुमार प्रजापत, सेना की अति संवेदनशील रेजीमेंट में जोधपुर पोस्टेड था। इंटेलिजेंस ने जांच में पाया कि प्रदीप कुमार पाकिस्तानी महिला एजेंट से सोशल मीडिया के माध्यम से निरंतर संपर्क में था और सामरिक महत्व की सूचनाएं शेयर कर रहा था।

देवेंद्र शर्मा - 12 मई 2022 को दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने भारतीय वायुसेना के जवान देवेंद्र शर्मा को जासूसी के आरोप में गिरफ्तार किया था। दिल्ली पुलिस को संदेह था कि देवेंद्र शर्मा को पाकिस्तान ने हनी ट्रैप में फंसाकर भारतीय वायु सेना से जुड़ी संवेदनशील जानकारी हासिल करने की कोशिश की थी।

आकाश महरिया - मई, 2021 में राजस्थान पुलिस इंटेलिजेंस ने हनी ट्रैप में फंसे भारतीय सेना के एक जवान को जासूसी करने के मामले में गिरफ्तार किया। जवान आकाश महरिया पाकिस्तान की महिला एजेंट के संपर्क में था। पूछताछ में आरोपी ने स्वीकारा कि वह मोबाइल के जरिए पाक एजेंट से जुड़ा था और भारतीय सेना संबंधित सूचना महिला एजेंट को भेजी थी। आरोपी के मोबाइल में पाक महिला एजेंट के साथ कई अश्लील चैटिंग भी मिली थी।

सोमबीर - जनवरी, 2019 में राजस्थान बॉर्डर पर जैसलमेर से भारतीय सेना के जवान सोमबीर को गिरफ्तार किया गया। जांच के दौरान पता चला था कि साल 2016 में सेना में भर्ती हुआ जवान सोमबीर लगातार पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई की महिला एजेंट के संपर्क में था। सोमबीर महिला एजेंट के हनीट्रैप में फंसकर सेना की गोपनीय जानकारी साझा कर रहा था।

ग्रुप कैप्टन अरुण मारवाह - फरवरी 2018 में पाकिस्तान के लिए जासूसी करने के आरोप में वायुसेना के एक अधिकारी को गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद वायुसेना के अधिकारी ने पूछताछ में कई अहम खुलासे किये थे। जानकारी के मुताबिक, हनीट्रैप का शिकार हुए आरोपी अफसर IAF में ग्रुप कैप्टन अरुण मारवाह ने हनीट्रैप में फंसकर कई डॉक्यूमेंट्स लीक करने की बात कुबूल की थी।

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    इंडियन एयरफोर्स हनी ट्रैप केस - 30 दिसंबर 2015 को इंडियन एयरफोर्स के एक एयरमैन को भारतीय खुफिया एजेंसी ने हनी ट्रैप का शिकार बताया था। भठिंडा एयरफोर्स स्टेशन पर तैनात एक वायु सैनिक रंजीत को फेसबुक पर दामिनी नाम की अंजान महिला ने फ्रेंड रिक्वेस्ट भेज कर अपने जाल में फसाया था। महिला ने रंजीत से बेस से जुड़ी कई जानकारियां हासिल की थी। जिसके कुछ समय बाद ही पंजाब के एक एयरफोर्स स्टेशन पर आतंकियों ने हमला बोल दिया था।

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