Semiconductor Chips: क्या हैं सेमीकंडक्टर चिप्स, जिनकी कमी से लाखों कारों का निर्माण अटक गया है
सेमीकंडक्टर चिप एक छोटा सा इलेक्ट्रॉनिक सर्किट होता है जोकि इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट्स का एक प्रमुख भाग होता है। इसका इस्तेमाल कंप्यूटिंग, कम्युनिकेशन, ऑटोमोबाइल, और रिन्यूएबल एनर्जी जैसे क्षेत्रों में किया जाता है।

Semiconductor Chips: भारत की सबसे बड़ी कार कंपनी, मारुति सुजुकी के CFO अजय सेठ ने हाल ही में कहा कि सेमीकंडक्टर चिप्स की कमी होने से कार मैन्युफैक्चरिंग प्रभावित हो रही है। उन्होंने कहा कि हमारी सप्लाई चैन, इंजीनियरिंग, प्रोडक्शन और सेल्स टीमें उपलब्ध सेमीकंडक्टर चिप्स से उत्पादन बढ़ाने की कोशिश कर रही हैं।"
फाइनेंसियल एक्सप्रेस के मुताबिक देश की सबसे बड़ी कार कंपनी मारुति सुजुकी, सेमीकंडक्टर चिप्स की कमी के कारण अक्टूबर-दिसंबर में लगभग 46,000 यूनिट्स का प्रोडक्शन नहीं कर सकी। अब हालात यह हो गए हैं कि मारुति के पेंडिंग आर्डर तीसरी तिमाही के अंत में बढ़कर लगभग 3.63 लाख यूनिट्स हो गए हैं।
सेमीकंडक्टर चिप्स का इस्तेमाल
सेमीकंडक्टर ऐसा मैटेरियल होता है जो कांच और सिरेमिक जैसे इंसुलेटर से तो ज्यादा बिजली को कंडक्ट करता है लेकिन किसी कंडक्टर जैसे कॉपर और एल्यूमिनियम) के मुकाबले बिजली का कम कंडक्ट करता है। अपने इस तकनीकी गुण के चलते इसका दैनिक जीवन में कहीं न कहीं इस्तेमाल जरुर होता है।
सेमीकंडक्टर चिप्स आजकल के इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादों में एक आवश्यक पार्ट हैं। इसका उपयोग कंप्यूटर और लैपटॉप में डेटा को स्टोर करने सहित स्मार्टफोन उपकरणों में संचार एवं डेटा स्टोरेज के लिए किया जाता हैं। एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में, सेमीकंडक्टर चिप्स का उपयोग डिजिटल कैमरा, टीवी और अन्य उपकरणों में उनकी कैपेसिटी एवं परफॉरमेंस को बढ़ाने के लिए किया जाता है। ऑटोमोटिव इंडस्ट्री में भी इन चिप्स का उपयोग वाहनों में कंट्रोल और कम्युनिकेशन सिस्टम को बढ़ाने के लिए किया जाता है।
आकड़ों से समझें इसकी उपयोगिता
● सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री एसोसिएशन के आंकड़ों के मुताबिक नवम्बर 2022 में वैश्विक सेमीकंडक्टर सेल्स $45.5 बिलियन हुई और अक्टूबर 2022 में $46.9 बिलियन की बिक्री हुई।
● 2022 में सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री की वैश्विक बिक्री कुल $580.1 बिलियन थी जबकि 2021 में $555.9 बिलियन थी।
● अलाइड मार्केट रिसर्च के मुताबिक वैश्विक सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री के वर्ष 2031 तक $1033.5 बिलियन तक होने की संभावना है।
● दुनिया में सेमीकंडक्टर बनाने वाले टॉप 5 देशों में ताइवान, चीन, जापान, दक्षिण कोरिया और अमेरिका शामिल हैं।
● 2022 में सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री ने कुल 1.15 ट्रिलियन सेमीकंडक्टर चिप्स बेचीं थी।
● सैमसंग दुनिया की सबसे बड़ी सेमीकंडक्टर चिप बनाने वाली कंपनी है, जिसने 2021 कुल $83.09 बिलियन की सेमीकंडक्टर चिप्स बेची।
● फिलहाल सेमीकंडक्टर चिप्स की सबसे ज्यादा मांग चीन में है।
भारत में सेमीकंडक्टर चिप्स का प्रोडक्शन
भारत में सेमीकंडक्टर चिप्स बनाने वाली कई कंपनियां हैं जिनमें NXP और टाटा एलेक्सी के नाम प्रमुख हैं। सितम्बर 2022 तक तीन और कंपनियों ने भारत में सेमीकंडक्टर चिप्स के उत्पादन की तैयारी शुरू कर दी हैं। जिसमें, कर्नाटक में ISMC, तमिलनाडू में IGSS वेंचर्स और गुजरात में वेदांता-फॉक्सकॉन अपने-अपने प्लांट बना रही हैं। साल 2021 में आई इंडिया इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर एसोसिएशन की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत का सेमीकंडक्टर मार्केट $27.2 बिलियन का था और इसके वर्ष 2026 तक 19 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ $64 बिलियन तक होने की संभावना है। गौरतलब है कि भारत ने 2021 में कुल $24 बिलियन के सेमीकंडक्टर चिप्स का विदेशों से इम्पोर्ट किया और यह आंकड़ा हर साल लगभग 15 प्रतिशत से बढ़ रहा है।
भारत सरकार द्वारा प्रोत्साहन
सेमीकंडक्टर चिप्स प्रोडक्शन को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार लगातार प्रयासरत है। दिसम्बर 2021 में भारत सरकार ने सेमीकंडक्टर और डिस्प्ले मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स के लिए ₹76,000 करोड़ की इंसेंटिव स्कीम को मंज़ूरी दी थी। सितम्बर 2022 में भारत सरकार ने 'मेक इन इंडिया' स्कीम के तहत $10 बिलियन का इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) भी लॉन्च किया जिसके तहत भारत में सेमीकंडक्टर फैब्स की स्थापना के लिए प्रोजेक्ट कॉस्ट का 50 प्रतिशत फाइनेंसियल इंसेंटिव दिया जायेगा। भारत सरकार ने ISM के तहत कंपाउंड सेमीकंडक्टर फैसिलिटीज को सेटअप करने के लिए भी स्कीम बनाई है।
केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री राजीव चंद्रशेखर ने कहा कि "हमें विश्वास है कि ISM से कंपनियों की रुचि इस क्षेत्र में और बढ़ेगी और नए प्रस्ताव भी तैयार होंगे जो पिछले चार या पांच महीनों से हमारे साथ विचार-विमर्श कर रहे हैं और हमारे देश को भारत के सेमीकंडक्टर मिशन के करीब ले जाएंगे।"
2020 का सेमीकंडक्टर चिप्स शोर्टेज
2020 COVID-19 महामारी के चलते सेमीकंडक्टर चिप्स की भारी कमी हो गयी, जिसने ग्लोबल सप्लाई चैन को एकदम तहस-नहस कर दिया। सेमीकंडक्टर चिप्स की शॉर्टेज जिन कारणों से हुई उन कारणों में वर्क फ्रॉम होम, ऑनलाइन क्लासेज आदि की वजह से इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट्स की अचानक बढ़ी मांग, और सेमीकंडक्टर चिप्स बनाने वाले प्लांट्स का शटडाउन जैसे कारण शामिल थे। इस सेमीकंडक्टर चिप्स की शोर्टेज ने ऑटोमोबाइल, कंज्यूमर इलेक्ट्रॉनिक्स और कंप्यूटर जैसे विभिन्न उद्योगों को बहुत बुरी तरह प्रभावित किया था। उस समय पर सेमीकंडक्टर चिप्स की शोर्टेज के करण इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट्स की कीमतों में बहुत भारी उछाल भी आया था। हालांकि, 2021 और 2022 में स्थिति में सुधार हुआ, और अब इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट्स के लिए चिप की कमी नहीं रही, लेकिन विशेषज्ञों और कई कंपनियों का मानना है कि अब भी ऑटो इंडस्ट्री के लिए सेमीकंडक्टर चिप्स की शॉर्टेज चल रही है, जिसके कारण मारुति जैसी कार कंपनियों को कार उत्पादन धीमा करना पड़ा है।
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