Indian Navy Ships: जल्द आने वाला है युद्धपोत 'महेंद्रगिरी', जानें भारतीय नौसेना से जुड़े ये पांच महत्वपूर्ण तथ

भारतीय नौसेना के बेड़े में अब नये-नवेले युद्धपोत 'महेंद्रगिरी' को शामिल करने की सभी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। एक सितंबर को उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ की मौजूदगी में उनकी पत्नी सुदेश धनखड़ इस आधुनिक युद्धपोत को लॉन्च करेंगी। यह प्रोजेक्ट 17ए के तहत सातवां और अंतिम स्टील्थ फ्रिगेट है। प्रोजेक्ट 17ए परियोजना के तहत सात जंगी जहाज बनने थे। छह लॉन्च हो चुके हैं। यह अंतिम है जिसे मुंबई के मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स पर लॉन्च किया जाना है।

दरअसल इस परियोजना के तहत चार युद्धपोत मुंबई के मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड में और बाकी कोलकाता के गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (जीआरएसई) में बनाये गए हैं। ये सभी साल 2025 के फरवरी तक भारतीय नौसेना का हिस्सा बन जाएंगे। लॉन्च किये गये अब तक के फ्रिगेट्स के नाम हैं नीलगिरी, उदयगिरी, तारागिरी, हिमगिरी, दूनागिरी और विंध्यगिरी।

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भारतीय नौसेना की ताकत
भारतीय नौसेना के मुताबिक भारतीय नौसेना का प्राथमिक उद्देश्य देश की समुद्री सीमाओं की रक्षा करना है। साथ ही अन्य सशस्त्र बलों के साथ मिलकर, युद्ध और शांति दोनों में, भारत के क्षेत्र, लोगों या समुद्री क्षेत्र से होने वाले खतरे या आक्रमण को रोकने और हराने के लिए काम करती है। वहीं रक्षा मंत्रालय की वेबसाइट के मुताबिक भारतीय नौसेना के वर्तमान बल स्तर में लगभग 150 जहाज और पनडुब्बियां शामिल हैं। वहीं समुद्र में ताकत बढ़ाने के लिए नये-नये बेड़ों और जहाजों को शामिल किया जा रहा है।

भारतीय नौसेना की वर्तमान परियोजनाएं
भारतीय रक्षा मंत्रालय के मुताबिक वर्तमान में 50 से अधिक जहाज और पनडुब्बियां निर्माणाधीन हैं। जहाजों को शामिल करने का हमारा पसंदीदा विकल्प स्वदेशी मार्ग रहा है। उदाहरण के लिए, कोलकाता स्थित जीआरएसई पहले ही सभी तीन बड़े उभयचर जहाज और दस वॉटर-जेट फास्ट अटैक क्राफ्ट वितरित कर चुका है। यार्ड वर्तमान में उन्नत पनडुब्बी रोधी कार्वेट का निर्माण कर रहा है और हाल ही में उसे एलसीयू बनाने का ठेका दिया गया है।

वहीं दक्षिण में, कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (सीएसएल) हमारे अब तक के सबसे महत्वाकांक्षी जहाज 'स्वदेशी विमान वाहक' के निर्माण में प्रगति कर रहा है। साथ ही मुंबई में हमारा प्रमुख युद्धपोत-निर्माण यार्ड मझगांव डॉक्स लिमिटेड, शिवालिक क्लास के स्टील्थ फ्रिगेट बन रहे हैं। वहीं इसके अलावा कोलकाता क्लास और पी-15बी विध्वंसक के निर्माण में लगा हुआ है। एमडीएल में स्कॉर्पीन श्रेणी की पनडुब्बियां भी निर्माणाधीन हैं। जबकि गोवा शिपयार्ड लिमिटेड जिसने नौसेना और तटरक्षक बल के लिए कई अपतटीय गश्ती जहाजों का निर्माण किया है। भारतीय नौसेना के लिए कई प्रकार के उन्नत संस्करण निर्माणाधीन हैं।

भारतीय नौसेना अपनी ताकत बढ़ाने के लिए क्या कदम उठा रही है?
निजी क्षेत्र को शामिल करना: बीते कुछ वर्षों में भारतीय नौसेना ने निजी यार्डों के अलावा अन्य शिपयार्डों को युद्धपोत-निर्माण के विशेष क्षेत्र में प्रवेश करने के लिए प्रोत्साहित किया है। इसके तहत कुछ एनओपीवी और कुछ कैडेट प्रशिक्षण जहाजों के निर्माण के लिए मेसर्स पीपावाव शिपयार्ड लिमिटेड और एबीजी शिपयार्ड के साथ अनुबंध किया गया है।

अन्य देशों के मुकाबले नौसेना को मजबूत करना
03 जून, 1972 को आईएनएस नीलगिरि के चालू होने के बाद से स्वदेशी युद्धपोतों के निर्माण ने एक लंबा सफर तय किया है। दुनिया में बहुत कम ही ऐसे देश हैं जिनके पास फास्ट अटैक क्राफ्ट से लेकर एयरक्राफ्ट कैरियर तक इतने विविध प्रकार के युद्धपोतों का निर्माण करने की क्षमता है। हालांकि, नौसेना के मास्टर प्लान में परिकल्पित क्षमताओं में अंतर को कम करने के लिए विदेशों से भी कुछ जहाजों को शामिल किया जा रहा है। इनमें वाहक विक्रमादित्य और रूस से तलवार श्रेणी के अनुवर्ती जहाज शामिल हैं।

मीडियम जहाजों को अपग्रेड करना
इसके अलावा, जहाजों के मिड-लाइफ अपग्रेड (एमएलयू) पर भी काम किया जा रहा है। उनके एमएलयू के बाद, राजपूत वर्ग के जहाज और ब्रह्मपुत्र वर्ग के जहाज भी महत्वपूर्ण अवशिष्ट जीवन के साथ 21वीं सदी के शक्तिशाली लड़ाकों के रूप में उभरेंगे।

भारत की पहली परमाणु चालित पनडुब्बी के लिए अरिहंत नाम क्यों?
रक्षा मंत्रालय के मुताबिक अरिहंत एक संस्कृत शब्द है, जिसका अर्थ है 'शत्रु का नाश करने वाला'। यह नाम परमाणु संचालित पनडुब्बी के रणनीतिक महत्व के अनुरूप है। विचार किये गये कई विकल्पों में से, 'अरिहंत' नाम को संकल्प व्यक्त करने में इसकी सूक्ष्मता और उपयुक्तता के कारण सभी स्तरों पर चुना गया और अनुमोदित किया गया था।

कारवार में एक पूर्ण नौसैनिक अड्डे के निर्माण की क्या जरूरत है?
रक्षा मंत्रालय के मुताबिक भारत में 1197 अपतटीय द्वीपों के साथ 7516 किलोमीटर की एक बड़ी तटरेखा और 2.01 मिलियन वर्ग किलोमीटर का बहुत बड़ा विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र है। जो संसाधनों से समृद्ध है। इसलिए भारत को अपने विविध समुद्री हितों की रक्षा करने और विशेष रूप से हिंद महासागर क्षेत्र में वर्तमान जियो-पॉलिटिक्स और सुरक्षा स्थिति में अतिरिक्त जिम्मेदारियां संभालने के लिए एक मजबूत और आधुनिक नौसेना की आवश्यकता है। इसलिए कारवार (कारवार हुबली से 167 किमी और बैंगलोर से 517 किमी दूर,और गोवा से 86 किमी की दूरी पर कर्नाटक के उत्तर कन्नड़ जिले का प्रशासनिक केन्द्र है) जरूरी है।

कारवार की जरूरत इसलिए भी है कि भारत के पश्चिमी तट पर दो प्रमुख नौसेना बेस, यानी मुंबई और कोच्चि पहले ही अपनी पूरी क्षमता तक पहुंच चुके हैं और इन्हें और अधिक विस्तारित नहीं किया जा सकता है। इसलिए नौसेना के नियोजित विकास को पूरा करने के लिए पश्चिमी समुद्र तट पर तीसरे नौसेना अड्डे की आवश्यकता है। जो कारवार से पूरा हो सकता है।

संपूर्ण समुद्र तट को रडार निगरानी के लिए क्या प्रयास किए जा रहे हैं?
भारतीय रक्षा मंत्रालय द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक लक्षद्वीप व मालाबार समूह के द्वीपों और अंडमान-निकोबार द्वीप सहित भारत की सभी तटरेखा पर राडार स्टेशन स्थापित किये जा चुके हैं। वहीं जहां भी तटों पर राडार स्टेशन नहीं है वहां भी यह परियोजना लगातार सरकार द्वारा चलाई जा रही है।

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