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General Motors: 77 सालों तक ऑटोमोबाइल इंडस्ट्री पर राज करने वाली जनरल मोटर्स अब भारी घाटे में

शेवरले, ब्यूक, जीएमसी और कैडिलैक जैसे लोकप्रिय कारों की निर्माता जनरल मोटर्स 1931 से 2008 तक दुनिया की सबसे बड़ी वाहन निर्माता कंपनी थी। अब घाटे के चलते भारत सहित दुनियाभर में बेच रही है अपनी संपत्ति।

US based automobile company General Motors suffered huge losses

General Motors: हाल ही में अमेरिका की लोकप्रिय ऑटोमोबाइल कंपनी जनरल मोटर्स (जीएम) के तलेगांव (महाराष्ट्र) स्थित मैन्युफैक्चरिंग प्लांट का हुंडई ने अधिग्रहण कर लिया। एक जमाना था जब भारत में मारुति सुजुकी के बाद जनरल मोटर्स एक लोकप्रिय ब्रांड था। इस कंपनी ने भारत के ऑटोमोबाइल बाजार में लगभग 21 वर्षों तक व्यापार किया लेकिन 2017 में जनरल मोटर्स ने अपने हाथ खींच लिये।

जनरल मोटर्स की शुरुआत

जनरल मोटर्स, अमेरिका की कार निर्माता कंपनी है। इसकी शुरुआत 16 सितंबर 1908 को विलियम सी. डुरंट ने एक होल्डिंग कंपनी के रूप में की थी। गौरतलब है कि 1931 से लेकर 2008 तक यह दुनिया की सबसे बड़ी वाहन निर्माता कंपनी थी। उस समय कंपनी की अमेरिका के वाहन बाजार में लगभग 50 प्रतिशत हिस्सेदारी हुआ करती थी।

इस बीच 1990 में जनरल मोटर्स को पहला भारी नुकसान हुआ। तब कंपनी को अपने कई संयंत्रों (कारखानों) को बंद करना पड़ा और कर्मचारियों की भी छंटनी करनी पड़ी। कुछ समय बाद जनरल मोटर्स ने अपने वाहन निर्माण पर ध्यान केंद्रित करने के लिए अपनी अन्य सहायक कंपनियों जैसे कंप्यूटर सेवाएं और रक्षा एयरोस्पेस को बेच दिया। साल 1996 में इलेक्ट्रॉनिक डेटा सिस्टम्स व 1997 में ह्यूजेस इलेक्टॉनिक्स कंपनी को बेचकर जनरल मोटर्स ने बड़ी रिकवरी की।

वैश्विक स्तर पर जनरल मोटर्स

शेवरले, ब्यूक, जीएमसी और कैडिलैक मुख्यतः इसके कार ब्रांड हैं। कंपनी ने अमेरिका में 1998 में 46 लाख से अधिक वाहनों की बिक्री की। फिर 2007 में यह नाममात्र की गिरावट के साथ नंबर वन के स्थान पर कायम रही। मगर अगले ही साल कंपनी की बिक्री में भारी गिरावट दर्ज की गयी। दरअसल 2008 में जनरल मोटर्स ने दुनियाभर में मात्र 29 लाख के आसपास ही कारें बेची। इस प्रकार 77 सालों बाद जनरल मोटर्स से दुनिया की नंबर-1 कंपनी का तमगा छिनकर टोयोटा के पास आ गया।

प्रतिस्पर्धा के बीच जनरल मोटर्स ने हार नहीं मानी और 2016 में दुनियाभर में लगभग 1 करोड़ वाहनों की बिक्री की। मगर 2021 में यह फिर से घटकर 62.9 लाख रह गयी। कोविड महामारी के कारण जनरल मोटर्स कंपनी को 2020 की दूसरी तिमाही में $758 मिलियन डालर का घाटा हुआ।

एक गलती कंपनी पर भारी

साल 2014 में कंपनी को एक बड़ा झटका लगा। तब पता चला कि कंपनी पिछले 10 वर्षों से इग्निशन बटन में एक भारी कमी को छिपा रही थी। इस कमी के चलते सैकड़ों लोगों की मौतें हो गयी थी। अतः अमेरिकी राष्ट्रीय राजमार्ग यातायात सुरक्षा व्यवस्थापन (एनएचटीएसए) ने कंपनी पर $35 मिलियन का जुर्माना लगा दिया। साथ ही साथ कंपनी को 124 मौतों का मुआवजा और 79 ग्राहक मुकदमों का भी सामना करना पड़ा।

इसी बीच इग्निशन बटन में कमी के चलते दुनियाभर से लगभग 26 लाख कारें कंपनी को वापस लेनी पड़ी। जिसके चलते 2017 में कंपनी को अपनी लगभग $2 बिलियन की संपत्ति बेचनी पड़ गयी। कंपनी का मुनाफा भी गिरकर $108 मिलियन रह गया। कंपनी के शेयर भी 16 प्रतिशत तक गिर गये।

भारत में कंपनी सफर

जनरल मोटर्स ने 1928 में शेवरले कारों, ट्रकों और बसों को भारत में असेंबल करना शुरू किया। फिर 1952 में किन्हीं कारणों से यह असेंबली का काम बंद कर दिया। साल 1994 में जनरल मोटर्स और हिंदुस्तान मोटर्स ने मिलकर वाहनों का उत्पादन और बिक्री के लिए एक संयुक्त उद्यम 'जीएमआईपीएल' बनाया। जिससें दोनों की हिस्सेदारी 50-50 प्रतिशत थी। साल 1999 में जनरल मोटर्स ने हिंदुस्तान मोटर्स की हिस्सेदारी को भी खरीद लिया।

साल 2000 में जनरल मोटर्स ने अपना मुख्यालय गुड़गांव में शुरू किया। दो साल बाद बैंगलोर में तकनीकी केंद्र भी स्थापित किया गया। साल 2006 में तलेगांव (महाराष्ट्र) में वाहनों की असेंबली के लिए एक नया संयंत्र बनाया गया। इस प्लांट से सितंबर 2008 में शेवरले वाहनों का उत्पादन शुरू हुआ। इस संयंत्र की क्षमता प्रति वर्ष 13 लाख कारें व 16 लाख इंजन बनाने की थी।

यह वह दौर था जब भारत में शेवरले की मॉडल कार - क्रूज, शेवरले ऑप्ट्रा, शेवरले एवेयो, शेवरले स्पार्क, शेवरले टवेरा, शेवरले एसआरवी, शेवरले बीट, शेवरले कैप्टिवा, शेवरले सेल को पसंद किया गया।

भारत में सफर का अंत

अब अमेरिका में कंपनी को जो घाटा हुआ उसका असर कंपनी के वैश्विक व्यापार पर होने लग गया था। भारत में जैसे ही कंपनी ने लोकप्रियता हासिल की उसी के साथ जनरल मोटर्स ने अपनी 50 प्रतिशत हिस्सेदारी अपने चीन व्यापार सहयोगी 'शंघाई ऑटोमोटिव इंडस्ट्री कॉरपोरेशन' को बेच दी। जनरल मोटर्स ने फिर हार नहीं मानी और ग्रोथ कर अक्टूबर 2012 में अपने चीनी व्यापार सहयोगी की 43 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदकर अपनी हिस्सेदारी 93 प्रतिशत कर ली।

फिर जुलाई 2013 में जनरल मोटर्स इंडिया का बुरा दौर शुरू हो गया। दरअसल, तब कंपनी को अपनी लोकप्रिय टवेरा ब्रांड की 114,000 कारों को वापस लेना पड़ा। एक आंतरिक जांच से पता चला था कि जीएम इंडिया भारतीय परीक्षण मापदंडों का उल्लंघन कर रही थी। इस जांच में पाया गया कि जीएम इंडिया के कुछ कर्मचारी उच्च उत्सर्जन वाले इंजनों को प्रयोग में ला रहे थे, जो पहले ही परीक्षण में विफल हो चुके थे। इस घटना के बाद 25 कर्मचारियों को निकाल दिया गया। जीएम इंडिया पर भी $358,000 का जुर्माना भी लगाया गया।

इन्हीं कारणों के चलते भारत में जनरल मोटर्स कारों की बिक्री कम होने लगी। आखिरकार कंपनी ने दिसंबर 2017 में शेवरले वाहनों को भारत में बेचना बंद कर दिया। कुछ दिनों तक तलेगांव संयंत्र में असेम्बलिंग का काम चलता रहा लेकिन यह भी 24 दिसंबर 2020 को बंद कर दिया गया।

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