TikTok Data: टिक-टॉक बना ‘सिरदर्द’, भारत में बैन के 3 साल बाद खतरे में करोड़ों यूजर्स
भारत में टिक-टॉक ऐप को बैन हुए तीन साल का वक्त गुजर गया है, लेकिन इस ऐप को डेवलप करने वाली कंपनी बाइटडांस के पास अभी भी भारतीय यूजर्स के निजी डेटा का एक्सेस है।

TikTok Data: स्मार्टफोन में किसी भी ऐप को डेटा एक्सेस का परमिशन देना यूजर्स के लिए महंगा पड़ सकता है। खासतौर पर चीनी कंपनियों के ऐप्स आपके डेटा का गलत इस्तेमाल कर सकते हैं। वैसे तो भारत सरकार ने 2020 से एहतियातन कदम उठाते हुए सैकड़ों चीनी ऐप्स को बैन कर दिया था। फिर भी भारतीय यूजर्स के निजी डेटा का गलत तरीके से इस्तेमाल होने का खतरा आज भी बना हुआ है। इस बात का खुलासा फोर्ब्स की हाल में आई एक रिपोर्ट के जरिये हुआ है। दरअसल, रिपोर्ट के मुताबिक चीनी सोशल मीडिया और शॉर्ट वीडियो क्रिएटिंग ऐप टिक-टॉक भारतीय यूजर्स के निजी डेटा का गलत इस्तेमाल कर रही हैं।
जून 2020 में भारत सरकार ने आईटी एक्ट 2000 के सेक्शन 69ए के तहत टिक-टॉक समेत कई चीनी ऐप्स पर बैन लगाया था। ये ऐप्स भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताए गए थे। फिलहाल ऐप को बैन हुए तीन साल हो गये हैं लेकिन इसकी मालिक कंपनी बाइटडांस अभी भी भारतीय यूजर्स का डेटा एक्सेस कर रही है।
भारतीय यूजर्स के डेटा का गलत इस्तेमाल
फोर्ब्स की रिपोर्ट के मुताबिक टिक-टॉक की बीजिंग स्थित पैरेंट कंपनी बाइटडांस के पास अभी भी कई भारतीय यूजर्स का डेटा स्टोर है। इस रिपोर्ट में फोर्ब्स ने बताया कि हमें नहीं पता है कि भारत सरकार को यह पता भी है या नहीं कि चीन उनके नागरिकों के निजी डेटा को गलत तरीके से इस्तेमाल कर रहा है। फोर्ब्स ने बाइटडांस के एक कर्मचारी के स्टेटमेंट के आधार पर यह रिपोर्ट पब्लिश की है।
बाइटडांस और टिक-टॉक के कर्मचारी ने बताया कि कंपनी जब चाहे भारतीय यूजर्स के निजी डेटा को रिट्रीव कर लेती है। कंपनी के पास ऐसे टूल्स हैं, जो भारतीय यूजर्स के निजी डेटा को रिट्रीव करने में मदद करते हैं। यह टूल उन यूजर्स के निजी डेटा को रिट्रीव कर सकता है, जिन्होंने अपने मोबाइल डिवाइस में इस ऐप को इंस्टॉल किया था। रिपोर्ट के मुताबिक इस ऐप को जबसे भारत में बैन किया गया है, तब से चीन भारतीय यूजर्स के निजी डेटा का इस्तेमाल कर रहा है।
कैसे काम करता है टूल?
बाइटडांस का यह सोशल मैपिंग सॉफ्टवेयर किसी भी पब्लिक या प्राइवेट यूजर के निजी डेटा को रिट्रीव कर सकता है। इसके लिए कंपनी एक यूनिक आइडेंटिफायर टूल का इस्तेमाल करता है और यूजर्स के यूजरनेम के साथ-साथ उसके क्लोज फ्रेंड्स आदि की भी जानकारी निकाल लेती है। यही नहीं, यह टूल इस बात की जानकारी भी देता है कि यूजर कहां रहता है और उसके फोन के कॉन्टैक्ट्स में किनके नंबर स्टोर किए गए हैं? इसके अलावा यह टूल यूजर के सर्च आइटम्स समेत अन्य कई जानकारियां भी निकाल सकता है।
15 करोड़ यूजर्स पर खतरा
चीनी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म टिक-टॉक को जब भारत में बैन किया गया था उस समय इस ऐप के कुल 150 मिलियन यानी 15 करोड़ मंथली एक्टिव यूजर्स थे। फोर्ब्स की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि चीनी कंपनी चाहे तो भारतीय यूजर्स के निजी डेटा को किसी साइबर अपराधी या हैकर्स को बेच सकती है। अगर, यूजर का निजी डेटा हैकर्स या साइबर अपराधी के हाथ लग जाता है, तो वह इसका गलत इस्तेमाल कर सकते हैं।
इसके अलावा चीनी सरकार भारतीय यूजर्स के निजी डेटा का इस्तेमाल करके उनके बीच में फूट डालने का भी काम कर सकती है। यूजर्स के कॉन्टैक्ट का गलत तरीके से इस्तेमाल करके उनके फ्रेंडलिस्ट में शामिल लोगों को भद्दे मैसेज भेजे जा सकते हैं।
टिक-टॉक पर कई देश लगा चुके हैं बैन
चीनी सोशल मीडिया ऐप केवल भारतीय यूजर्स के लिए ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के यूजर्स के लिए खतरा बना हुआ है। पिछले दिनों अमेरिकी खूफिया एजेंसी एफबीआई (FBI) ने भी बाइडेन सरकार को एक रिपोर्ट सौंपी थी, जिसमें कहा गया था कि चीनी ऐप राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा है। इसके बाद बाइडेन सरकार ने सभी सरकारी कर्मचारियों के फोन से टिक-टॉक को अनइंस्टॉल करने का आदेश दे दिया।
बाइडेन सरकार के इस आदेश के बाद अन्य देशों जैसे कनाडा और यूके ने अपने सभी सरकारी कर्मचारियों को फोन से टिक-टॉक ऐप अनइंस्टॉल करने का आदेश जारी किया था। पहले भी यह रिपोर्ट सामने आ चुकी है कि चीनी कंपनी बाइटडांस पर चीन की कम्युनिस्ट सरकार का कंट्रोल है। अमेरिकी खुफिया एजेंसी की जांच रिपोर्ट के बाद कई और देशों ने सरकारी कर्मचारियों के फोन से टिक-टॉक को डिलीट करने के आदेश जारी किए है।
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