TikTok के खिलाफ फ्रांस सरकार का बड़ा एक्शन, चीनी एप के इस्तेमाल पर लगाई लगाम, जासूसी का शक
टिकटॉक के सीईओ शौ जी च्यू ने गुरुवार को अमेरिकी कांग्रेस के सामने गवाही दी है। इस दौरान च्यू को पांच घंटे से भी अधिक समय तक हाउस एनर्जी एंड कॉमर्स कमेटी के कई कड़े सवालों का सामना करना पड़ा।

France action against TikTok: चीनी सरकार की जासूसी के खिलाफ दुनियाभर में अब कड़े कदम उठाए जा रहे हैं और अब फ्रांस ने भी चीनी सोशल मीडिया एप टिकटॉक के खिलाफ कड़ा एक्शन लिया है। एनएचके वर्ल्ड की रिपोर्ट के मुताबिक, फ्रांस सरकार ने गोपनीयता और साइबर सुरक्षा से संबंधित जोखिमों को देखते हुए सरकारी उपकरणों में टिकटॉक के इस्तेमाल पर प्रतिबंध लगा दिया है। रिपोर्ट में कहा गया है, कि फ्रांस की सरकार ने सरकारी उपकरणों पर चीनी वीडियो-शेयरिंग एप्लिकेशन टिकटॉक पर प्रतिबंध लगा दिया है।
टिकटॉक पर फ्रांस में एक्शन
आपको बता दें, कि अमेरिका में भी टिकटॉक को लेकर हंगामा मचा हुआ है और एक दिन पहले टिकटॉक के सीईओ से अमेरिकी सांसदों ने काफी सख्त पूछताछ की है। वहीं, इसका भी पता चला है, कि खुद चीन में टिकटॉक का इस्तेमाल नहीं किया जाता है। लिहाजा, टिकटॉक को लेकर शक बढ़ता जा रहा है। भारत पहले ही टिकटॉक पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा चुका है और अब फ्रांस सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र के कर्मचारियों के वर्क फोन पर टिकटॉक पर प्रतिबंध लगा दिया है। शुक्रवार को, फ्रांसीसी लोक सेवा मंत्री स्टानिस्लास गुएरिनी ने घोषणा की है, कि चीन के स्वामित्व वाले वीडियो-शेयरिंग सॉफ़्टवेयर टिकटॉक को अब सिविल सेवकों के फोन में इस्तेमाल करने की इजाजत नहीं दी जाएगी। उन्होंने ट्वीट करते हुए कहा, कि "हमारे प्रशासन और सिविल सेवकों की साइबर सुरक्षा की गारंटी के लिए, सरकार ने लोक सेवकों के प्रोफेसनल फोन पर टिकटॉक जैसे मनोरंजक एप्लिकेशन पर प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है।"

न्यूजीलैंड भी लगा चुका है प्रतिबंध
फ्रांस के अलाना न्यूजीलैंड ने भी टिकटॉक के खिलाफ एक्शन लिया है और ऑकलैंड स्थित दैनिक समाचार पत्र, न्यूजीलैंड हेराल्ड ने बताया है, कि सुरक्षा चिंताओं के बीच, वीडियो-शेयरिंग सोशल नेटवर्किंग सेवा, टिकटॉक को 17 मार्च से न्यूजीलैंड के सांसदों के फोन पर प्रतिबंधित कर दिया गया है। न्यूजीलैंड हेराल्ड के मुताबिक, संसदीय सेवा के मुख्य कार्यकारी राफेल गोंजालेज-मोंटेरो ने कहा, कि "जोखिम स्वीकार्य नहीं हैं।" उन्होंने कहा, कि सोशल मीडिया सेवा के संबंध में टिकटॉक के खिलाफ पूरी दुनिया में सख्त कार्रवाई की जा रही है। इस बात को लेकर व्यापक चिंता है, कि टिकटॉक के डेटा से समझौता किया जा सकता है और उसे चीन भेजा जा सकता है। न्यूजीलैंड की ये कार्रवाई अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोप की कार्रवाई के बाद की गई है। भारत ने भी गोपनीयता और सुरक्षा चिंताओं को लेकर 2020 में मैसेजिंग ऐप वीचैट सहित टिकटॉक और दर्जनों अन्य चीनी ऐप पर देशव्यापी प्रतिबंध लगा दिया था।
चीन कंपनी बाइटडांस का है प्रोडक्ट
आपको बता दें, कि टिकटॉक की चीनी मूल कंपनी बाइटडांस के माध्यम से चीनी सरकार उपयोगकर्ताओं के स्थान और उसके संपर्क डेटा तक पहुंचने की क्षमता के बारे में विश्व स्तर पर चिंताएं बढ़ गई हैं। पिछले दिनों आई एक रिपोर्ट में कहा गया था, कि चीन में ऐसा कानून है, कि चीन के अंदर या चीन के बाहर काम करने वाली कोई भी चीनी कंपनी या चीनी नागरिक, देश में सूचनाएं भेजने के लिए बाध्य हैं, अगर उनसे ऐसा कहा जाएगा। हालांकि, टिकटॉक का कहना है, कि वो टिकटॉक का डेटा चीन से शेयर नहीं करता है, लेकिन टिकटॉक अभी तक कोई भी पुख्ता तथ्य नहीं दे पाया है। कंपनी के सीईओ शौ ज़ी च्यू को गुरुवार को अमेरिकी द्विदलीय सांसदों से फटकार का सामना करना पड़ा है। अमेरिकी सांसदों के सामने टिकटॉक के सीईओ ने इस बात को माना, कि उपयोगकर्ताओं के डेटा को चीनी मूल कंपनी द्वारा एक्सेस किया जा सकता है और उन्होंने ये भी कबूला, कि चीन में कर्मचारियों के पास वर्तमान में उपयोगकर्ताओं की जानकारी देखने की क्षमता है।
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चीनी कानून से बंधा है टिकटॉक
इसके अलावा, टिकटॉक चीन के राष्ट्रीय खुफिया कानून से बंधा हुआ मोबाइल एप है, जो प्रत्येक चीनी नागरिक और कंपनी को चीनी कम्युनिस्ट पार्टी को सभी डेटा सौंपने और सीसीपी की ओर से सर्विलांस गतिविधियों में शामिल होने के लिए बाध्य करता है। कई अन्य सोशल मीडिया कंपनियों की तरह, टिकटॉक भी लोगों के फोन नंबर, ईमेल एड्रेस, कम्युनिकेशन एड्रेस और वाई-फाई नेटवर्क सहित उपयोगकर्ताओं की निजी जानकारियां एकत्र करता है। टिकटॉक की पैरेंट कंपनी बाइटडांस ने कहा है, कि कंपनी चीनी सरकार के साथ जानकारी साझा नहीं करती है, लेकिन अमेरिकी अधिकारियों का कहना है, कि चीनी कानून को बीजिंग में स्थित कंपनी को ऐप के डेटा को सीसीपी को उपलब्ध कराना अनिवार्य है और बाइटडांस, चीन सरकार को जानकारी देने से इनकार नहीं कर सकती है। आपको बता दें, कि अमेरिका में करीब डेढ़ करोड़ लोग टिकटॉक यूज करते हैं, लिहाजा अमेरिका को डर है, कि चीन लोगों की निजी जानकारियों का जुटा रहा है, जो देश की सुरक्षा के लिए खतरनाक साबित हो सकता है।












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