#YogaDay: योग का वैज्ञानिक आधार; क्या कहते हैं जानकार
अब तक हमने योग को केवल एक धार्मिक दृष्टी से देखा है पर साथ ही हम यह भी जानते हैं की इस धार्मिक क्रिया का प्रभाव हमारे शरीर पर बड़े ही सकारात्मक तौर पर होता है लेकिन देश के वैज्ञानिक अब तक इस उधेड़बुन में हैं की किसी धार्मिक क्रिया कलाप से किस प्रकार शरीर में भौतिक बदलाव आते हैं ।
ये जानने की कोशिश कर रहे हैं कि आखिर योग के पीछे का विज्ञान क्या है, इंसानी शरीर और बायोकेमिस्ट्री योग के प्रति कैसे रिएक्ट करते हैं?
सेना भीषण परिस्थितियों में भी करती है योग
हमने ये देखा की पिछले वर्ष योग दिवस पर न केवल गाँवों और शहरों में लोगों ने योग को अपनाया बल्कि हमारी तीनो सेनाओं ने भी योग के माध्यम से खुद में बेहतरी महसूस की | सियाचिन की बर्फीली चोटियों से लेकर थार की रेतीली आँधियों तक हर जगह योग ने अपने पाँव पसार लिए| आज की तारीख में भारतीय सेना फिटनेस के लिए हिमायल से लेकर समंदर में मौजूद जंगी जहाजों तक योग का अभ्यास करती है| लेकिन इससे पहले की वे इसे अपने रोजमर्रा की रूटीन में लाये वैज्ञानिक इस पर गहन अध्ययन कर रहे हैं।
शोध भी साबित करते है योग का लाभ
डिफेंस इंस्टीट्यूट ऑफ फिजियोलॉजी एंड एलाइड साइंसेज के वैज्ञानिक ने शोध के बाद उन आसनों की पहचान की है जिसकी मदद से ऊंचे हिमालय के माहौल का सामना किया जा सके। रक्षा विशेषज्ञों ने खास तरह के प्राणायामों का एक क्रम तय किया है जिससे सियाचिन में पाकिस्तानी खतरे का सामना कर रहे सैनिकों के फेफड़े की क्षमता में बढ़ोतरी होती है।
रेगिस्तान में भी किया जा सकता है योग
इसके अलावा योग के कुछ चुने हुए आसनों की मदद से थार रेगिस्तान सरीखे किसी बेहद गर्म जगह में खुद को उसके मुताबिक ढालने में भी आसानी होती है। वैज्ञानिकों की टीम जवानों के बायोकेमिकल मापदंडों की जांच के बाद इस नतीजे पर पहुंची कि सही तरीके से योग करने पर खून में फायदेमंद हारमोन्स का स्तर भी बढ़ जाता है।
डॉक्टर्स की मानें तो
योग को मैडीकल साईंस ने भी स्वास्थ्य के लिए वरदान माना है। मैक्स हॉस्पिटल, नई दिल्ली के डॉ. प्रदीप चौबे के अनुसार योग की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता शरीर व मन का समन्वयन करना है। योग का रोगों की रोकथाम में सर्वाधिक महत्व है। योग तनाव से मुक्ति पाने का सशक्त माध्यम है।
दैहिक और मानसिक नियन्त्रण के लिए जरूरी है योग
नियमित योग करने से रक्तचाप और मधुमेह जैसी बिमारियों को सहजता से नियंत्रित किया जा सकता है। केजीएम यूनिवर्सिटी, लखनऊ के डॉ. सूर्यकांत कहते हैं कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) ने सन 1947 में स्वास्थ्य को इस प्रकार परिभाषित किया था, ''दैहिक, मानसिक, सामाजिक और आध्यात्मिक रूप से पूर्णत: स्वस्थ होना ही स्वास्थ्य है।"
उद्देश्यों को प्राप्त करने का सशक्त माध्यम
योग इन उद्देश्यों को प्राप्त करने का सशक्त माध्यम है। केजीएम यूनिवर्सिटी और लखनऊ विश्वविद्यालय के एक शोध के अनुसार यदि प्रतिदिन 30 मिनट योग किया जाये तो अस्थमा के मरीजों के जीवन स्तर में सुधार आता है तो योग करें और निरोगी रहें।













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