इतिहास के पन्नों से- टाटा ग्रुप का बोम्बे हाऊस
नई दिल्ली(विवेक शुक्ला) भारत के कोरपोरेट जगत का सबसे खास हेड क्वार्टर बोम्बे हाऊस को माना जा सकता है। यहां से चलता समूचे टाटा ग्रुप का कारोबार। इधर से ही एक दौर में जेआरडी टाटा, फिर रतन टाटा और अब साइरस मिस्त्री बैठकर अपने ग्रुप को नई बुलंदियों पर लेकर जाने की रणनीति बनाते हैं। बोम्बे हाऊस से टाटा ग्रुप 1924 से काम कर रहा है। ये मुबंई के फोर्ट इलाके में फ्लोरा फाउंटेन के करीब है।ये चार मंजिला इमारत है। ये मलाड़ के पत्थर से बनी है।
डिजाइन जार्ज विटेट का
इसका डिजाइन जार्ज विटेट ने तैयार किया था। उन्होंने टाटा ग्रुप की करीब 40 कंपनियों के दफ्तर भी डिजाइन किए।टाटा ग्रुप का भारत के अलावा दुनिया के करीब दो दर्जन देशों में कारोबार फैला हुआ है। उन के चीफ इस बोम्बे हाऊस में ही बैठते है। अब आप अंदाजा लगा सकते हैं कि इसका टाटा ग्रुप में क्या स्थान है। इसी बोम्बे हाऊस में 1932 में भारत की पहली एयरलाइन को स्थापित करने का फैसला हुआ था।
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साइरस मिस्त्री का कमरा
इसकी पहली मंजिल के कार्नर रूप में साइरस मिस्त्री बैठते हैं। रतन टाटा 1991 में टाटा ग्रुप के चीफ बनने के बाद उसी कमरे में बैठते रहे जहां पर कभी जेआरडी टाटा बैठते थे। उन्होंने जेआरडी टाटा के दौर के फर्नीचर को भी नहीं बदला था। जेआरडी टाटा कई बार इधर रातभर रहकर काम करते थे। उनके साथ रूसी मोदी तथा नानी पालकीवाला जैसे उनके खासमखास भी बैठा करते थे।
टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी
टाटा ग्रुप की होल्डिंग कंपनी के सारे डायरेक्टर भी यहां पर बैठते हैं। हालांकि विभिन्न कोरपोरेट घरानों के हेड आफिस वक्त के साथ बदलते रहे, पर टाटा समूह ने बोम्बे हाउस को ही अपना हेड आफिस बनाकर रखा।
भावनात्मक संबंध
कहने वाले कहते हैं कि सारा समूह इस बोम्बे हाऊस को लेकर भावनात्मक रूप से जुड़ा हुआ है। इसलिए कभी इस बाबत सोचा ही नहीं जाता है कि टाटा समूह के हेड आफिस को कहीं और लेकर जाया जाए।













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