कभी शहाबुद्दीन के आतंक से डरा रहा सिवान, क्या है इस सीट का सियासी इतिहास
Siwan Lok Sabha Seat: कभी देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद, डॉ. सैय्यद मोहम्मद, मौलाना मजरूल हक जैसे महान स्वतंत्रता सेनानियों के नाम से पहचान रखने वाला सिवान। 90 के दशक से बिहार की हॉट लोकसभा सीटों में से एक रहा है। क्योंकि, यह लोकसभा सीट बाहुबली से सांसद बने शहाबुद्दीन के आतंक को लेकर हमेशा से सुर्खियों में रहा करती थी।
हालांकि, अब बीते 15 सालों से सिवान लोकसभा पर एनडीए गठबंधन (बीजेपी व जदयू) का कब्जा है। दाहा नदी के किनारे बसे सिवान जिला का नाम मध्यकाल में राजा शिवमान के नाम पर रखा गया था। वैसे बिहार में सिवान को डॉलर इकोनॉमी वाला जिला कहा जाता है। क्योंकि, यहां के लोग बड़ी संख्या में विदेश खासकर खाड़ी के देशों में काम करते हैं। विदेशी पैसे की वजह से ही जिले के बाजारों में भी रौनक देखने को मिलती है।

2024 में त्रिकोणीय होगा मुकाबला?
सिवान लोकसभा की बात करें तो वर्तमान में यहां की सांसद जद(यू) की कविता सिंह हैं। वैसे लोकसभा 2024 के चुनाव में त्रिकोणीय मुकाबला देखने को मिलेगा। एनडीए गठबंधन की ओर से जद(यू) ने पूर्व विधायक रमेश कुशवाहा की पत्नी विजय लक्ष्मी को अपना उम्मीदवार बनाया है। वहीं राजद के पूर्व सांसद दिवंगत शहाबुद्दीन की पत्नी हिना शहाब निर्दलीय चुनाव लड़ने का ऐलान कर चुकी हैं। जबकि राजद ने इस बार अवध बिहारी चौधरी को अपना प्रत्याशी घोषित किया है।
9 बार सिवान से मुस्लिम उम्मीदवार बना सांसद
वैसे विधानसभा की बात करें तो सिवान लोकसभा के तहत छह विधासनभा क्षेत्र सिवान, जीरादेई, दरौली, रघुनाथपुर, दारौंदा और बड़हरिया शामिल हैं। इसमें 3 सीट पर राजद, 2 सीट पर सीपीआईएम और एक सीट पर बीजेपी का कब्जा है। हालांकि, यहां गौर करने वाली बात ये है कि अब तक इस सीट पर 16 बार चुनाव हो चुके हैं। जिसमें यहां मतदाताओं ने 9 बार मुस्लिम चेहरों पर दांव खेला। जिसमें मोहम्मद यूसुफ और मोहम्मद शहाबुद्दीन सबसे अधिक बार चार-चार बार चुनाव जीते हैं। एक बार अब्दुल गफूर चुने गए।
बाहुबली शहाबुद्दीन का था आतंक
सिवान लोकसभा वो सीट है जहां कभी बाहुबली से सांसद बने शहाबुद्दीन की तूती बोलती थी। शहाबुद्दीन यहां से 1996, 1998, 1999 और 2004 में लगातार चार बार राजद के टिकट पर जीतकर संसद पहुंचे थे। इसके बाद कई आपराधिक मामलों में उन्हें जेल की सजा हुई। तब राजद ने 2009, 2014 और 2019 में उनकी पत्नी हिना शहाब को मैदान में उतारा लेकिन वो शहाबुद्दीन वाला जलवा नहीं बिखेर सकी और तीनों बार उन्हें हार का सामना करना पड़ा। हालांकि, इस बार वो निर्दलीय मैदान में ताल ठोक रही हैं।
सिवान सीट का सियासी इतिहास
आजादी के बाद देश में पहला चुनाव 1951-52 में हुआ लेकिन सिवान लोकसभा सीट 1957 में अस्तित्व में आई। 1957 में यहां हुए सबसे पहले लोकसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार झूलन सिन्हा ने भारतीय जनसंघ के उम्मीदवार शिव कुमार द्विवेदी को 22,704 वोटों के अंतर हराकर सिवान के पहले सांसद बनें।
इसके बाद 1962, 1967, 1971 में कांग्रेस पार्टी के ही मोहम्मद यूसुफ ने यहां से जीत हासिल की। लेकिन, आपातकाल के तुरंत बाद हुए 1977 के चुनाव में यहां से जनता पार्टी के मृत्युंजय प्रसाद सांसद चुने गए। इसके बाद तीन साल बाद 1980 में हुए लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की टिकट पर मोहम्मद यूसुफ फिर से सांसद बने। इसके बाद 1984 में भी कांग्रेस उम्मीदवार अब्दुल गफूर यहां से सांसद बनें। अब्दुल गफूर सिवान क्षेत्र से कांग्रेस पार्टी की ओर सांसद बनने वाले आखिर उम्मीदवार थे। इसके बाद कांग्रेस कभी यहां से अपना खाता नहीं खोल पाई।
1989 में हुई बीजेपी की एंट्री
1989 लोकसभा चुनाव में पहली बार भाजपा की इस सीट पर एंट्री हुई। बोफोर्स घोटाला और बाबरी मस्जिद जैसे मुद्दों को लेकर बीजेपी ने सिवान सीट से जनार्दन तिवारी को मैदान में उतारा। इस चुनाव में जनार्दन तिवारी ने कांग्रेस के अब्दुल गफूर को 1,58,951 वोटों के अंतर से हराकर सांसद बने। इसके दो साल बाद 1991 लोकसभा चुनाव में जनता दल के वृषिण पटेल ने झारखंड पार्टी के उमाशंकर सिंह को 1,45,892 वोटों के अंतर से हराकर संसद पहुंचे।
1996 में शहाबुद्दीन बने सांसद
विधायिकी छोड़ 1996 के लोकसभा चुनाव में सिवान से जनता दल के टिकट पर मोहम्मद शहाबुद्दीन मैदान में उतरे। इस चुनाव में शहाबुद्दीन ने बीजेपी के जर्नादन तिवारी को 1,65,243 वोटों के अंतर से पहली बार संसद पहुंचे। इसके बाद 1998, 1999 और 2004 लोकसभा चुनाव में लगातर जीत दर्ज की। गौर करने वाली बात ये है कि 2004 में शहाबुद्दीन ने जेल में रहकर चुनाव जीता था।
हालांकि, 2009 के लोकसभा चुनाव में एक निर्दलीय उम्मीदवार ओम प्रकाश यादव ने शहाबुद्दीन को शिकस्त दे दी। दरअसल जेल होने की वजह से शहाबुद्दीन ने इस चुनाव में अपनी पत्नी को राजद के टिकट पर उतारा लेकिन निर्दलीय उम्मीदवार ने उन्हें 63,430 वोटों के अंतर से हरा दिया। इसके बाद ओम प्रकाश यादव 2014 के चुनाव में बीजेपी के टिकट पर उतरे और जीतकर संसद पहुंचे। 2019 में यह सीट एनडीए गठबंधन में जद(यू) कोटे में चली गई और जद(यू) की कविता सिंह ने यहां से तीसरी बार हिना शहाब को मात दी।
सिवान का जातीय समीकरण
वैसे सिवान का जातीय समीकरण देखें तो यहां मुस्लिम और यादव का कॉम्बिनेशन है। एक रिपोर्ट के मुताबिक सिवान में करीब 3 लाख मुस्लिम, 2.5 लाख यादव मतदाता है। इसके अलावा 1.25 लाख कुशवाहा और 80 हजार के आसपास साहनी मतदाता भी हैं। वहीं अगड़ी जाति के करीब 4 लाख और 2.5 लाख ईबीसी मतदाता हैं।












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