Singapore President: भारतवंशी थर्मन शनमुगरत्नम बन सकते हैं सिंगापुर के राष्ट्रपति
सिंगापुर में 13 सितंबर 2023 को राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव होना है। इस चुनाव में भारतीय मूल के नेता व सिंगापुर के पूर्व उप-प्रधानमंत्री थर्मन शनमुगरत्नम ने भी दावेदारी पेश की है। 66 वर्षीय थर्मन साल 2001 से राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
राष्ट्रपति का चुनाव लड़ने के लिए थर्मन ने सभी आधिकारिक और राजनीतिक पदों से भी अपने को अलग कर लिया था। साथ ही उन्होंने पीपुल्स एक्शन पार्टी से भी इस्तीफा दे दिया था।

6 जुलाई 2023 को अपनी आखिरी संसदीय कार्यवाही के दिन सांसदों ने उन्हें विदाई दी। साथ ही दो दशकों से अधिक समय तक सार्वजनिक सेवा में उनके योगदान की सांसदों ने प्रशंसा भी की।
कौन हैं थर्मन शनमुगरत्नम?
25 फरवरी 1957 को सिंगापुर में जन्मे थर्मन सिंगापुर के राजनेता व अर्थशास्त्री हैं। उन्होंने चुनाव लड़ने के लिए वर्तमान में सामाजिक नीतियों के समन्वय मंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया। थर्मन ने लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स (एलएसई) से इकोनॉमिक्स में स्नातक की डिग्री लेने से पहले एंग्लो-चाइनीज स्कूल में पढ़ाई की थी। बाद में उन्होंने कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में मास्टर ऑफ फिलॉसफी की डिग्री प्राप्त की। फिर हार्वर्ड विश्वविद्यालय से लोक प्रशासन में मास्टर की डिग्री प्राप्त की, जहां उन्हें अपने उत्कृष्ट प्रदर्शन और क्षमता के लिए लूसियस एन. लिटाउर फेलो पुरस्कार मिला। यहीं पर उनका जुड़ाव समाजवादी विचारधारा से हुआ।
थर्मन ने अपने करियर की शुरुआत सिंगापुर के मौद्रिक प्राधिकरण (एमएएस) में की। वह इसके मुख्य अर्थशास्त्री भी बने। इसके बाद वह सिंगापुर प्रशासनिक सेवा में शामिल हुए और शिक्षा मंत्रालय में वरिष्ठ उप सचिव के रूप में काम किया। जहां वे अंततः इसके प्रबंध निदेशक बन गये। यहीं से उनकी राजनीतिक करियर की शुरुआत हुई।
उपलब्धियां और राजनीतिक करियर
सिंगापुर संसद की वेबसाइट पर दी गई जानकारी के मुताबिक साल 2001 के आम चुनाव में पीपुल्स एक्शन पार्टी के उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ने के लिए उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद वह चुनाव लड़े और सांसद बने। तब से लेकर अब तक थर्मन, जुरोंग जीआरसी के तमन जुरोंग डिवीजन का प्रतिनिधित्व करने वाले संसद सदस्य थे।
संसद सदस्य रहते वह कई प्रमुख पदों पर रहे। साल 2019 और 2023 के बीच सिंगापुर के वरिष्ठ मंत्री बने। साल 2015 और 2023 के बीच सामाजिक नीतियों के समन्वय मंत्री रहे। साल 2011 और 2023 के बीच सिंगापुर के मौद्रिक प्राधिकरण के अध्यक्ष के रूप में कार्य किया। साल 2019 और 2023 के बीच जीआईसी के उपाध्यक्ष रहे। साल 2011 और 2019 के बीच सिंगापुर के उप-प्रधानमंत्री भी बने। साल 2007 और 2015 के बीच वित्त मंत्री, साल 2003 और 2008 के बीच शिक्षा मंत्री के रूप में भी कार्य किया।
अंतरराष्ट्रीय पदों पर भी किया काम
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की वेबसाइट के मुताबिक साल 2011 में थर्मन को आईएमएफ की नीति सलाहकार समिति में शामिल किया गया। साथ ही अंतरराष्ट्रीय मुद्रा और वित्तीय समिति (आईएमएफसी) के सदस्यों ने थर्मन को अपना अध्यक्ष नियुक्त किया। जहां उन्होंने 2014 तक कार्य किया।
सिंगापुर की स्ट्रेट्स टाइम्स के मुताबिक 1 जनवरी 2017 को थर्मन ने प्रमुख आर्थिक और वित्तीय नीति-निर्माताओं की एक स्वतंत्र वैश्विक परिषद 'ग्रुप ऑफ थर्टी' के अध्यक्ष भी बने। साथ ही अप्रैल 2017 में थर्मन को जी20 द्वारा वैश्विक वित्तीय प्रशासन पर जी20 प्रख्यात व्यक्ति समूह (ईपीजी) की अध्यक्षता के लिए नियुक्त किया गया था।
क्या है थर्मन का भारतीय कनेक्शन?
उपलब्ध जानकारी के मुताबिक थर्मन शनमुगरत्नम का भारत कनेक्शन उनकी तमिल विरासत और भारत के साथ पैतृक संबंधों से है। वह एक भारतीय मूल के परिवार से हैं और उनकी जड़ें तमिलनाडु में हैं। थर्मन के दादा-दादी भारत से सिंगापुर पहुंचे अप्रवासी थे, जो समय के साथ सिंगापुर में ही बस गये थे। उनके माता-पिता ने परिवार की सांस्कृतिक विरासत को जारी रखा।
श्रीलंका के डेली न्यूज के मुताबिक थर्मन के पिता प्रोफेसर के. शनमुगरत्नम थे। जो एक चिकित्सा वैज्ञानिक थे। जिन्हें सिंगापुर में पैथोलॉजी के जनक के रूप में जाना जाता है। जिन्होंने सिंगापुर कैंसर रजिस्ट्री की स्थापना की थी। थर्मन की पत्नी एक मिश्रित चीनी-जापानी मूल की सिंगापुर निवासी है। वह पेश से वकील हैं और उनका जेन युमिको इटोगी है।
सिंगापुर के बहुसांस्कृतिक माहौल में पले-बढ़े थर्मन ने अपनी भारतीय विरासत, रीति-रिवाजों और परंपराओं से गहराई से जुड़े हुए नेता हैं। पिछले कुछ वर्षों में, थर्मन ने कई बार भारत का दौरा किया है और दोनों देशों के बीच संबंधों को मजबूत करने के लिए भारतीय नेताओं और अधिकारियों के साथ बातचीत की है। इस दौरान उनकी मुलाकात पीएम मोदी से भी हुई है।
सिंगापुर में राष्ट्रपति चुनाव के तरीके क्या हैं?
सिंगापुर में हर छह साल में राष्ट्रपति का चुनाव होता है। इस साल वर्तमान राष्ट्रपति हलीमा याकूब का कार्यकाल 13 सितंबर 2023 को खत्म हो जायेगा। इसलिए राष्ट्रपति का चुनाव होना है। इसके लिए कुछ नियम और शर्तें हैं। राष्ट्रपति चुनाव लड़ने वाले संबंधित उम्मीदवार को सिंगापुर का नागरिक होना आवश्यक है। उसकी उम्र 45 से ज्यादा होनी चाहिए। वह सिंगापुर में कम से कम 10 साल से रह रहा हो। नामांकन के दौरान वह किसी भी पार्टी से जुड़ा न हो और उसने सार्वजनिक और निजी सेवा में कम से कम 20 साल तक काम किया हो।
साथ ही सार्वजनिक क्षेत्र की सेवा में उम्मीदवार मंत्री, मुख्य न्यायाधीश, संसद के अध्यक्ष, अटॉर्नी जनरल, लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष, महालेखा परीक्षक, महालेखाकार या स्थायी सचिव के रूप में कम से कम तीन वर्षों तक काम किया हो। निजी क्षेत्र की सेवा में कम से कम 3 वर्षों तक कंपनी के मुख्य कार्यकारी के तौर पर काम किया हो। इस दौरान कंपनी के पास शेयरधारकों की इक्विटी में औसतन 500 मिलियन सिंगापुर डॉलर होना चाहिए। इनके अलावा व्यक्ति के पास राष्ट्रपति पद के कार्यों और कर्तव्यों को प्रभावी ढंग से पूरा करने का भी अनुभव होना चाहिए।
क्या थर्मन जीत सकते हैं चुनाव?
सिंगापुर में वर्तमान में पीपुल्स एक्शन पार्टी की सरकार है। थर्मन शनमुगरत्नम अभी इसी पार्टी से मंत्री पद पर थे। साथ ही उन्होंने राष्ट्रपति पद पर चुनाव लड़ने के लिए प्रधानमंत्री ली क्वान यू से सहमति ले ली है। मतलब तकनीकी रूप से सरकार का समर्थन हैं। सिंगापुर में राष्ट्रपति को मूल रूप से संसद द्वारा ही चुना जाता था। उनकी भूमिका काफी हद तक औपचारिक होती थी। लेकिन 1991 में एक संशोधन के बाद राष्ट्रपति को पॉपुलर वोटों के माध्यम से चुनने का फैसला किया गया। जैसे आज अमेरिका जैसे देशों में होता है।
अब बता दें कि यूएस डिपार्टमेंट ऑफ स्टेट के मुताबिक सिंगापुर की जनसंख्या 5.9 मिलियन (मध्यवर्ष 2022) के करीब थी। जिसमें 9% भारतीय लोग हैं। थर्मन की पत्नी चीनी मूल से संबंधित हैं और सिंगापुर में 74.3% निवासी आबादी जातीय चीनी है। जिनका उनको समर्थन मिलने के पूरे आसार हैं।












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