Sanjay Singh AAP: एक जमीनी नेता का आक्रामक अंदाज

आम आदमी पार्टी के राज्य सभा सदस्य संजय सिंह ने जेल से बाहर आते ही एक नई राजनीतिक लड़ाई छेड़ दी है। कोर्ट के इस निर्देश के बावजूद कि वह शराब घोटाले पर कोई बयान या भाषण नहीं देंगे, संजय सिंह शब्दों को बदलकर ईडी के बहाने शराब घोटाले में हुईं सभी गिरफ्तारियों को मोदी सरकार की तानाशाही कारवाई बता रहे हैं और खुलेआम चुनौती भी दे रहे हैं।

वर्तमान हालात में संजय सिंह आम आदमी पार्टी के शीर्ष नेता की हैसियत में हैं, क्योंकि मुख्य मंत्री अरविंद केजरीवाल, उपमुख्यमंत्री रहे मनीष सिसोदिया और वरिष्ठ नेता, सत्येन्द्र जैन अभी भी जेल में हैं।

Sanjay Singh AAP Aggressive style of a grassroots leader

संजय सिंह को ईडी ने दिल्ली शराब नीति में हुए कथित घोटाले और उससे जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में उनकी संलिप्तता के आरोप में गिरफ्तार किया था। हालाँकि उस पैसे का कोई सुराग नहीं मिला और ना ही कहीं से पैसा बरामद ही हुआ। यही आधार उनकी जमानत का भी बना और ईडी ने उनकी रिहाई का विरोध भी नहीं किया।

राजनीतिक हलकों में यह माना जा रहा है कि संजय सिंह के रिहा होने से अचानक आम आदमी पार्टी में जान आ गई है और अब पार्टी आक्रामक होकर ना सिर्फ अपना बचाव करने की स्थिति में आ गई है, बल्कि वह जवाबी राजनीतिक हमले के लिए भी तैयार है। एक नजर डालते हैं संजय सिंह की पृष्ठभूमि और उनके राजनीतिक पड़ाव पर।

क्या है संजय सिंह का बैकग्राउंड
संजय सिंह का जन्म उत्तर प्रदेश में प्रतापगढ़ जिले के पूरे पांडे गांव में हुआ था। उन्होंने 1990 में उड़ीसा स्कूल ऑफ माइनिंग इंजीनियरिंग से माइनिंग इंजीनियरिंग में डिप्लोमा किया। एक सामाजिक कार्यकर्ता के नाते अपना सार्वजनिक जीवन शुरू करने वाले संजय सिंह ने 20 वर्षों से अधिक समय तक रेहड़ी-पटरी वालों के अधिकारों के लिए अभियान चलाया।

कहा जाता है कि उनके राजनीतिक गुरु समाजवादी नेता रघु ठाकुर थे और उन्हीं के मार्गदर्शन में लोकतांत्रिक समाजवादी पार्टी नामक एक राजनीतिक संगठन के जरिए संजय सिंह सक्रिय राजनीति में आए। उन्होंने अन्ना आंदोलन में भाग लिया और 2012 में आम आदमी पार्टी का संविधान बनाने में भी उन्होंने भूमिका निभाई।

वह टीम अन्ना की कोर कमेटी के सदस्य रहे और इंडिया अगेंस्ट करप्शन आंदोलन के दौरान उन्होंने काफी सक्रिय भूमिका निभाई। वह श्रमदान के द्वारा गोमती नदी को साफ करने के आंदोलन में भी शामिल थे। इसी दौरान उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा स्वच्छ गोमती नदी परियोजना के कुछ भ्रष्टाचार के मामलों को भी उठाया और विरोध प्रदर्शन किया।

विवादों में क्यों हैं संजय सिंह
संजय सिंह को लेकर कई तरह के आरोप भी लगते रहे हैं। उनके बारे में यह भी कहा जाता है कि वह कभी ब्लैक में सिनेमा का टिकट बेचा करते थे। शराब घोटाले में भी उनकी भूमिका को लेकर कहा गया कि 82 लाख रुपये लेकर दिनेश अरोड़ा नाम के एक व्यापारी के बार को एक नए स्थान पर स्थानांतरित कराने में संजय सिंह ने मदद की थी। यह भी कहा जाता है कि दिल्ली उत्पाद शुल्क नीति में निजी कंपनियों को फायदा पहुचाने के लिए जो भ्रष्टाचार के तरीके अपनाए गए थे, उसमें संजय सिंह की भी मंजूरी थी।

इसमें कोई दो राय नहीं कि कथित शराब घोटाले के उजागर होने से केजरीवाल और उनकी पूरी टीम की छवि को धक्का लगा है। एक पार्टी के रूप में आम आदमी पार्टी उसका खामियाजा भुगत भी रही है। केजरीवाल जो भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ाई के नाम पर राजनीति में आए थे अब वही उसे बढ़ावा देने का आरोप झेल रहे हैं। अब संजय सिंह कैसे पार्टी का बचाव करते हैं, यह देखना दिलचस्प होगा। संजय सिंह संसद के अंदर और बाहर लगातार केजरीवाल को पीएम बनने योग्य बताते रहे हैं। अब उन्हीं पर है कि वह केजरीवाल के ईमानदारी वाले टैग को कितना पुनः स्थापित कर पाते हैं।

पार्टी में है महत्वाकांक्षा का टकराव
वैसे आम आदमी पार्टी में महत्वाकांक्षाओं का टकराव शुरू से ही है। पार्टी का शीर्ष नेतृत्व अपनी ही अपेक्षाओं के बोझ से बिखरता भी रहा है। लेकिन संजय सिंह अपना स्थान बनाए हुए हैं। जबकि योगेन्द्र यादव, शाजिया इल्मी, प्रशांत भूषण और आनंद कुमार जैसे संस्थापक सदस्य आम आदमी पार्टी से बाहर कर दिए गए हैं।

संजय सिंह राज्य सभा में एक जुझारू नेता के रूप में खुद को स्थापित कर चुके हैं। संसद सदस्य के रूप में उन्होंने ही राफेल जेट के पुर्जों के निर्माण के लिए 22,000 करोड़ रुपये का अनुबंध अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस डिफेंस को दिलाने का आरोप पीएम मोदी पर लगाया था। उन्होंने इसे एक घोटाले के रूप में उछाला था। इसी तरह संजय सिंह ने मणिपुर मुद्दे पर जबर्दस्त हंगामा खड़ा किया। उन्हें सभापति के निर्देशों का बार-बार उल्लंघन करने के कारण पिछले मानसून सत्र के लिए राज्यसभा से निलंबित भी कर दिया गया।

संसद के भीतर हो या बाहर संजय सिंह हमेशा हमलावर मूड में होते हैं। कई मौकों पर उनकी सरकार के वरिष्ठ मंत्रियों से झड़प हो चुकी है। अप्रैल को राज्यसभा में दिल्ली नगर निगम (संशोधन) विधेयक, 2022 को लेकर गृह मंत्री अमित शाह और आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह के बीच तीखी नोकझोंक देखी गई थी।

तिहाड़ जेल से बाहर आने के बाद संजय सिंह ने जो तेवर दिखाए हैं, उससे लगता है कि आम आदमी पार्टी और बीजेपी के बीच की जंग तेज होने वाली है। जेल से बेल पर छूटने के बाद संजय सिंह का यह बयान कि भाजपा को जवाब देने का समय आ गया है, बहुत कुछ कहता है। संजय सिंह जब जेल से बाहर निकले तो आप कार्यकर्ताओं ने जो जोश दिखाया, उससे भी लगता है कि चुनाव तक माहौल टकराव का ही रहेगा।

इधर भाजपा अरविंद केजरीवाल से इस्तीफा देने के लिए कह रही है, लेकिन संजय सिंह समेत सभी आप के नेता यह दम भर रहे हैं कि सभी केजरीवाल के साथ हैं। संजय सिंह ने कहा भी कि अरविंद केजरीवाल और हमारे नेताओं को सलाखों के पीछे डाल दिया गया है और मुझे विश्वास है कि 'ये जेल के ताले टूटेंगे हमारे सारे नेता छूटेंगे'।

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