Sania Mirza: पाकिस्तानी बहू होकर भी सानिया मिर्जा ने हमेशा रखा भारत का मान

भारतीय टेनिस स्टार सानिया मिर्जा ने अंतरराष्ट्रीय टेनिस से सन्यास ले लिया है। साल 2003 में उन्होंने अपने अंतरराष्ट्रीय करियर की शुरुआत की थी।

Sania Mirza always respected India Despite being a Pakistani daughter-in-law

Sania Mirza: सानिया मिर्जा का जन्म 15 नवम्बर 1986 को मुंबई में हुआ। उनकी शुरूआती शिक्षा हैदराबाद के एनएएसआर स्कूल में हुई। इसके बाद उन्होंने हैदराबाद के ही सेंट मैरी कॉलेज से स्नातक की डिग्री हासिल की। चेन्नई स्थित एमजीआर शैक्षिक और अनुसंधान संस्थान विश्वविद्यालय ने उन्हें डॉक्टरेट की मानद उपाधि से नवाजा था। सानिया के पिता इमरान मिर्जा एक खेल संवाददाता थे और मां नसीमा मुंबई में प्रिंटिंग व्यवसाय से जुड़ी एक कंपनी में काम करती थीं। हैदराबाद के निजाम क्लब में सानिया ने 6 साल की उम्र से टेनिस खेलना शुरु किया था। पिता के सहयोग और अपने दृढ़ संकल्प के सहारे टेनिस के खेल में वह आगे बढ़ती चली गई।

शोएब से मुलाकात

सानिया मिर्जा ने अपनी आत्मकथा ऐस अगेंस्ट ऑड्स (Ace against Odds) में लिखा है कि एक लड़की के रूप में मुझे लगता था कि जब मैं तेईस साल की हो जाऊंगी तब मेरी शादी हो जाएगी। मैं काफी रूढ़िवादी लड़की थी, अब भी कई मायनों में हूं। मैंने सोचा था कि शादी के बाद मैं टेनिस खेलना बंद कर दूंगी और सत्ताईस या अट्ठाईस साल की उम्र में बच्चा पैदा करूंगी।"

वे आगे लिखती है, "फिर 2010 की शुरुआत में होबार्ट के खूबसूरत छोटे शहर में मेरा जीवन एक और नाटकीय मोड़ से गुजरा। उस शाम, पिताजी, ट्रेनर और मैं जाने-पहचाने भारतीय रेस्तरां में चले गए, जो द ओल्ड वूलस्टोर होटल से कुछ सौ गज की दूरी पर तट पर स्थित था। उसी दौरान, पाकिस्तान क्रिकेट टीम को ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ एक टेस्ट मैच खेलना था और हमें यह देखकर सुखद आश्चर्य हुआ कि कुछ पाकिस्तानी खिलाड़ी भी उसी रेस्तरां में अपने डिनर का आनंद लेने आ गए।"

बतौर सानिया मिर्जा, "थोड़ी देर बाद पाकिस्तान के पूर्व कप्तान शोएब मलिक एक टेबल की तलाश में उस तरफ आ गए जहां हम बैठे थे। उन्होंने मुझसे नमस्ते कहा और फिर मेरे पिता को सम्मान देने के लिए हमारी टेबल के पास पहुंचे। मैं शोएब से पहले भी मिल चुकी थी। हालांकि, वह मुलाकात बहुत छोटी थी। दरअसल, एक पत्रकार ने हमें कुछ साल पहले नई दिल्ली के एक होटल के जिम में मिलवाया था। तब पाकिस्तान, भारत में एक सीरीज खेल रहा था। एक और मौके पर मैंने उन्हें मोहाली के एक होटल के ब्रेकफास्ट एरिया में देखा था, जहां मैं भारत और पाकिस्तान के बीच वनडे मैच देखने गई थी।"

सानिया मिर्जा आगे लिखती है, "उस रेस्तरां में जब शोएब ने मेरे टेनिस टूर्नामेंट में दिलचस्पी दिखाई तो मैंने उसके लिए कुछ टिकटों की व्यवस्था कर दी। वह अपने दो साथियों के साथ आया था। मैच के बाद, मेरे पिता ने लड़कों को उसी भारतीय रेस्तरां में रात के खाने के लिए आमंत्रित किया। शोएब ने प्रस्ताव स्वीकार कर लिया।"

कैसे हुआ निकाह

शोएब मालिक के साथ निकाह पर सानिया मिर्जा अपनी आत्मकथा में लिखती हैं, "आखिरकार 12 अप्रैल 2010 को मीडिया क्रेज के बीच पाकिस्तान के एक खिलाड़ी ने प्यार की खातिर भारत की एक खिलाड़ी से निकाह कर लिया। अपने जीवन के सबसे बड़े अवसर पर मैं मेरी निजी कार से मेरे घर से होटल ताज कृष्णा तक गई। इस दौरान मीडियाकर्मियों की एक 'सेना' ने मेरा वहां तक पीछा किया, जहां मेहमान पहले से ही निकाह के लिए एकत्र हुए थे। यह एक निजी समारोह था जिसमें मुट्ठीभर करीबी रिश्तेदार एवं दोस्त शामिल थे। किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए मुझे होटल के पीछे सर्विस डोर से यानी किचन एरिया से प्रवेश कराया गया। यह शायद निकाह के इतिहास में पहली बार हुआ था। हालांकि, आखिरकार समारोह खूबसूरती से संपन्न हो गया।"

निकाह के बाद भी बढ़ाया भारत का मान

अब सानिया मिर्जा ने पाकिस्तान के क्रिकेटर से शादी कर ली थी। वैसे सानिया चाहती तो पाकिस्तान की तरफ से भी टेनिस खेलने का मन बना सकती थी। बावजूद इसके, सानिया ने भारतीयता को महत्व दिया और शादी के बाद पाकिस्तान की बहू सानिया मिर्जा ने टेनिस के हर मुकाबले में भारत का ही प्रतिनिधित्व किया।

सानिया अपनी आत्मकथा में लिखती है, "मैंने शादी करने के लिए टेनिस से जबरन ब्रेक लिया था और जब मैंने वापसी का प्रयास किया, तो मैच जीतना मेरी कल्पना से कहीं अधिक कठिन था। लंबे समय तक खेल से दूर रहने के बाद पेशेवर टेनिस की प्रतिस्पर्धी दुनिया में वापसी करना आसान नहीं है। हालांकि, मैं कम से कम कोर्ट पर वापस आकर खुश थी।"

बतौर सानिया, "उस समय मेरी निगाहें नई दिल्ली में अक्टूबर में होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों (सीडब्ल्यूजी) पर टिकी थीं। खेलों में पदक जीतना एक जुनून बन गया था। साथ ही यह पहली बार था कि टेनिस को राष्ट्रमंडल खेलों में शामिल किया जा रहा था। शोएब मुझे चीयर करने के लिए दिल्ली में थे और फैन्स उन्हें व्यक्तिगत रूप से मेरा समर्थन करते हुए देखकर खुश थे।"

निकाह के बाद, सानिया ने हर टेनिस प्रतिस्पर्धा में भारत का ही प्रतिनिधित्व किया। उन पर कई बार पाकिस्तानी होने के आरोप लगे लेकिन उन्होंने उनकी कभी परवाह नहीं की और अपने खेल पर ध्यान दिया। सानिया और शोएब का एक बेटा भी है, जिसका नाम इजहान मिर्जा मलिक है। पाकिस्तानी नागरिक के साथ शादी करने के बाद भी सानिया मिर्जा ने भारत की नागरिकता नहीं छोड़ी। हालांकि, कुछ समय से सानिया मिर्जा और शोएब मलिक के अलग होने के चर्चे हैं लेकिन अभी तक दोनों ने तलाक की अधिकारिक तौर पर घोषणा नहीं की है।

भारत के लिए जीते कई खिताब

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    सानिया मिर्जा ने अपने करियर में 43 डबल्यूटीए खिताब जीते हैं। उन्होंने महिला डबल्स कैटेगरी में तीन ग्रैंड स्लैम भी अपने नाम किए हैं। 2016 में वह ऑस्ट्रेलियन ओपन में भी महिला युगल चैंपियन बनीं थीं। सानिया ने मिक्स्ड डबल्स में भी तीन ग्रैंड स्लैम जीते हैं। 2009 में वह ऑस्ट्रेलियन ओपन में इस श्रेणी में खिताब जीती थीं। सानिया लंबे समय तक महिला युगल रैंकिंग में पहले स्थान पर रहीं। हालांकि, अपने करियर के आखिरी ग्रैंड स्लैम में वह जीत से एक कदम दूर रह गईं थी और फाइनल में हार गईं।

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