'मैं सरकारी आतंकवाद,हिंसा का शिकार', हमले के बाद छलका ममता के भतीजे अभिषेक बनर्जी का दर्द, BJP पर संगीन आरोप
Abhishek Banerjee News: पश्चिम बंगाल की राजनीति में चुनावी नतीजों के बाद हिंसा और टकराव का दौर थमता नजर नहीं आ रहा है। इस बार विवाद के केंद्र में हैं तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव और सांसद अभिषेक बनर्जी। दक्षिण 24 परगना के सोनारपुर में उन पर हुए हमले के बाद राज्य की राजनीति में नया भूचाल आ गया है। एक तरफ पुलिस ने कार्रवाई करते हुए पांच लोगों को गिरफ्तार किया है, वहीं दूसरी तरफ अभिषेक बनर्जी और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने इस पूरे घटनाक्रम को राजनीतिक साजिश और राज्य प्रायोजित हिंसा का उदाहरण बताया है।
सबसे ज्यादा चर्चा अभिषेक बनर्जी के उस बयान की हो रही है, जिसमें उन्होंने खुद को "सरकारी आतंकवाद और राजनीतिक हिंसा का शिकार" बताया। उनके आरोपों ने पश्चिम बंगाल में सत्ता और विपक्ष के बीच टकराव को और तेज कर दिया है।

'मैं सरकारी आतंकवाद का शिकार हुआ हूं': हमले के बाद सोशल मीडिया पर छलका अभिषेक का दर्द
अस्पताल के बेड से ही टीएमसी सांसद अभिषेक बनर्जी का गुस्सा और दर्द सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर फूट पड़ा। उन्होंने केंद्र की राजनीति और राज्य की कानून व्यवस्था को आड़े हाथों लेते हुए खुद को एक पीड़ित के रूप में पेश किया। अभिषेक बनर्जी ने अपनी पोस्ट में लिखा,
''पिछले साल मैं 'ऑपरेशन सिंदूर' के तहत सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए पांच देशों की यात्रा की थी और आतंकवाद के खिलाफ देश का पक्ष रखा था। लेकिन आज मैं राजनीतिक हिंसा और उन लोगों द्वारा फैलाए गए सरकारी आतंकवाद का शिकार बनकर खड़ा हूं, जो खुद को राष्ट्रवाद का रक्षक होने का दावा करते हैं। यही आज की BJP की असलियत है। अगर आप उनका समर्थन करते हैं, तो आप देशभक्त हैं। अगर आप उन पर सवाल उठाते हैं, तो आप निशाना बन जाते हैं। अगर आप उनके साथ खड़े होते हैं, तो आपका गुणगान होता है। अगर आप उनके खिलाफ खड़े होते हैं, तो वे आपको चुप कराने की कोशिश करते हैं।''
अभिषेक बनर्जी ने आगे लिखा,
''मैं अपने सिद्धांतों से समझौता करके आराम की जिंदगी जीने के बजाय, लोकतंत्र की रक्षा करते हुए धमकियों का सामना करना ज्यादा पसंद करूंगा। सत्ता तो कुछ समय के लिए होती है। लेकिन जनता की इच्छा हमेशा कायम रहती है। मैं सिर्फ जनता के सामने झुकूंगा, सत्ता में बैठे लोगों के सामने कभी नहीं। हम उन लोगों के खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखेंगे, जो लोकतंत्र को कमजोर करना चाहते हैं और हमारे देश को बांटना चाहते हैं। INDIA एकजुट होकर खड़ा है और हम सब मिलकर यह सुनिश्चित करेंगे कि डर, नफरत, हिंसा और धमकियों की राजनीति हारे, और जनता की आवाज ही जीते।''
अभिषेक बनर्जी ने सत्ता में बैठे लोगों को चेतावनी देते हुए कहा कि ताकत हमेशा के लिए नहीं होती, बल्कि जनता की इच्छा स्थायी होती है। वे केवल जनता के सामने झुकेंगे, सत्ता के अहंकार के सामने कभी नहीं।
विपक्ष के बड़े नेताओं जैसे राहुल गांधी और अखिलेश यादव के समर्थन पर आभार जताते हुए अभिषेक ने आरोप लगाया कि उनकी सुरक्षा हटाना, खुफिया चेतावनियों के बावजूद पुलिस न तैनात करना और हथियारबंद गुंडों को खुली छूट देना कोई लापरवाही नहीं, बल्कि एक सोची-समझी साजिश थी।
राहुल गांधी और अखिलेश यादव को क्या जवाब दिया?
हमले के बाद कई विपक्षी नेताओं ने अभिषेक बनर्जी के प्रति समर्थन जताया। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने भी घटना पर चिंता व्यक्त की। राहुल गांधी को जवाब देते हुए अभिषेक ने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं और संविधान की रक्षा की लड़ाई में विपक्षी दलों की एकता जरूरी है। उन्होंने राहुल गांधी के समर्थन के लिए आभार भी जताया।
समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव को जवाब देते हुए अभिषेक ने और भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि यह किसी भीड़ की अचानक हुई हरकत नहीं थी, बल्कि प्रशासनिक विफलता का परिणाम था। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी सुरक्षा व्यवस्था हटाई गई, पर्याप्त पुलिस बल नहीं लगाया गया और चेतावनी के बावजूद हालात को नियंत्रण में नहीं रखा गया। हालांकि इन आरोपों पर राज्य प्रशासन और भाजपा की ओर से अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।
डॉक्टरों पर दबाव और अस्पताल में धमकी: ममता बनर्जी ने खोले कई राज
हमले के बाद घायल अभिषेक बनर्जी को पहले अपोलो अस्पताल और बाद में बेले व्यू अस्पताल ले जाया गया। उनसे मुलाकात करने के बाद शनिवार रात को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पूर्व सीएम ममता बनर्जी ने सीधे तौर पर पुलिस प्रशासन और बीजेपी नेताओं को कटघरे में खड़ा कर दिया।
हेलमेट ने बचाई जान: ममता बनर्जी ने बड़ा दावा करते हुए कहा कि दक्षिण सोनारपुर में हुआ यह हमला मामूली नहीं था। अगर अभिषेक बनर्जी ने उस वक्त हेलमेट नहीं पहना होता, तो शायद उनकी जान भी जा सकती थी।
अस्पताल प्रबंधन पर दबाव का आरोप: ममता ने बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि दक्षिण कोलकाता के डीसीपी (DCP) और कई बीजेपी नेताओं की तरफ से डॉक्टरों और अस्पताल के मैनेजमेंट को लगातार धमकी भरे फोन आ रहे थे। वे डॉक्टरों पर अभिषेक को जल्द से जल्द अस्पताल से छुट्टी (Discharge) देने का दबाव बना रहे थे।
अब घर पर ही चलेगा इलाज: उन्होंने सवाल उठाया कि अगर अभिषेक की हालत गंभीर नहीं थी तो उन्हें पहले इंटेंसिव थेरेपी यूनिट (ITU) में क्यों रखा गया, और फिर अचानक छुट्टी क्यों दे दी गई? इसी वजह से अब अभिषेक का इलाज अस्पताल के बजाय घर पर ही किया जाएगा, जहां ऑक्सीजन सिलेंडर और अन्य जरूरी मेडिकल उपकरण लगा दिए गए हैं।
क्यों सुलग रहा है सोनारपुर? जानिए इस संवेदनशील इलाके का पूरा सियासी गणित
दक्षिण 24 परगना जिले का सोनारपुर इलाका बंगाल की राजनीति में हमेशा से एक बारूद के ढेर की तरह रहा है, जहां चुनाव के दौरान और उसके बाद टीएमसी और बीजेपी के कार्यकर्ताओं के बीच हिंसक झड़पें आम बात हैं।
इस बार भी विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजे आने के बाद मई महीने में यहां भीषण हिंसा देखने को मिली। इस हिंसा के दौरान सोनारपुर में एक टीएमसी कार्यकर्ता की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी, जिसके बाद इलाके में तनाव चरम पर पहुंच गया था। इसके जवाब में कामराबाद नस्करपाड़ा इलाके में बीजेपी कार्यकर्ता सौमेन दास के घर को भी आग के हवाले कर दिया गया था। इसी हिंसक पृष्ठभूमि के बीच जब अभिषेक बनर्जी पीड़ित परिवारों का हौसला बढ़ाने पहुंचे, तो वे खुद हिंसा की चपेट में आ गए।
सियासी तौर पर देखें तो सोनारपुर दक्षिण विधानसभा सीट से फिलहाल बीजेपी की फायरब्रांड नेता रूपा गांगुली विधायक हैं। उन्होंने 2026 के इस ऐतिहासिक चुनाव में टीएमसी की उम्मीदवार अरुंधति मैत्रा (लवली मैत्रा) को करारी शिकस्त देकर इस गढ़ में कमल खिलाया था।
4 मई का वो ऐतिहासिक दिन: जिसने बदल दी बंगाल की पूरी सियासी तस्वीर
इस पूरे राजनीतिक बवाल की जड़ें 4 मई 2026 को आए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के नतीजों से जुड़ी हुई हैं। इस चुनाव ने बंगाल के इतिहास को पूरी तरह से पलट कर रख दिया था।
- पहली बार पूर्ण बहुमत के साथ बीजेपी सरकार: 294 सीटों वाली बंगाल विधानसभा में बीजेपी ने ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए 208 सीटों पर कब्जा जमाया और राज्य में पहली बार अपनी सरकार बनाई।
- 80 सीटों पर सिमटी टीएमसी: लगातार तीन बार सत्ता में रहने वाली ममता बनर्जी की टीएमसी ताश के पत्तों की तरह ढह गई और महज 80 सीटों पर सिमट कर रह गई।
- गढ़ में ही मिली करारी शिकस्त: सबसे बड़ा झटका अभिषेक बनर्जी को उनके खुद के संसदीय क्षेत्र के तहत आने वाली फालता विधानसभा सीट पर लगा, जहां बीजेपी ने पूरे राज्य में सबसे बड़े अंतर से जीत दर्ज करने का एक नया रिकॉर्ड बना डाला।
- सुवेंदु अधिकारी बने मुख्यमंत्री: इस ऐतिहासिक फेरबदल के बाद सुवेंदु अधिकारी ने पश्चिम बंगाल के पहले बीजेपी मुख्यमंत्री के रूप में कमान संभाली। सत्ता बदलने के बाद से ही पूरे राज्य में राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल चुके हैं और पुलिस अब वीडियो फुटेज के आधार पर छापेमारी कर अभिषेक बनर्जी पर हमला करने वाले 5 आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है।















Click it and Unblock the Notifications