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Republic Day: जानिए राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत में अंतर, 'वंदे मातरम' को इसलिए नहीं मिला राष्ट्रगान का दर्जा

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नई दिल्ली। 26 जनवरी को हम अपना 71वां गणतंत्र दिवस मनाने जा रहे हैं। इस मौके पर हर कोई देशभक्ति के रंग में रंगा नजर आता है। अगर बात राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत की करें तो ये किसी भी देश की धरोहर होते हैं, इनसे देश की पहचान जुड़ी होती है। लेकिन अधिकतर लोगों को राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत के बीच का अंतर नहीं पता होता। तो चलिए इन दोनों के बीच का अंतर जानते हैं।

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भारत का राष्ट्रगान-

भारत का राष्ट्रगान 'जन-गण-मन' है। जिसे अनेक अवसरों पर गाया जाता है। इसकी रचना प्रख्यात कवि रविंद्रनाथ टैगोर ने 1911 में की थी। जो मूल रूप से बांग्ला भाषा में लिखा गया है। हालांकि बाद में इसका हिंदी और अंग्रेजी में भी अनुवाद किया गया। संविधान सभा ने 24 जनवरी, 1950 को इसे राष्ट्रगान का दर्जा दिया। 'जन-गण-मन' को पहली बार 27 दिसंबर, 1911 को तत्कालीन कलकत्ता (कोलकाता) में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की बैठक में गाया गया था। राष्ट्रगान को गाने में 52 सेकेंड का समय लगता है।

ये है हमारा राष्ट्रगान-

जन-गण-मन अधिनायक जय हे

भारत भाग्य विधाता।

पंजाब-सिंधु-गुजरात-मराठा

द्राविड़-उत्कल-बंग

विंध्य हिमाचल यमुना गंगा

उच्छल जलधि तरंग

तव शुभ नामे जागे, तव शुभ आशीष मांगे

गाहे तव जय-गाथा।

जन-गण-मंगलदायक जय हे भारत भाग्य विधाता।

जय हे, जय हे, जय हे, जय जय जय जय हे।

ये सावधानी जरूर बरतें-

राष्ट्रगान से कुछ नियम भी जुड़े हुए हैं, जिनका पालन करना देश के हर नागरिक का कर्तव्य बनता है। जब भी कभी राष्ट्रगान बजाया जाता है, तो सभी का कर्तव्य बनता है कि वह इस दौरान अगर कहीं बैठा है तो खड़ा हो जाए। उसे सावधान मुद्रा में रहना चाहिए। नागरिकों से इसके साथ ही ये अपेक्षा भी की जाती है कि वह इसे दोहराएं। बता दें जन-गण-मन में पहले सिंध शब्द था, जिसका संशोधन करके बाद में सिंधु कर दिया गया। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि देश का विभाजन होने के बाद सिंध पाकिस्तान का हिस्सा बन गया था।

भारत का राष्ट्रगीत-

भारत का राष्ट्रगीत 'वंदे मातरम' है। इसकी रचना बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने की थी। उन्होंने साल 1882 में इसकी रचना संस्कृत और बांग्ला मिश्रित भाषा में की थी। ये गीत स्वतंत्रता की लड़ाई में लोगों के लिए प्रेरणा स्रोत बना। इसे भी राष्ट्रगान के बराबर का ही दर्जा प्राप्त है। राष्ट्रगीत को पहली बार साल 1896 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सत्र में गाया गया था। राष्ट्रगीत की अवधि लगभग 52 सेकेंड है।

ये है हमारा राष्ट्रगीत-

वंदे मातरम्, वंदे मातरम्!

सुजलाम्, सुफलाम्, मलयज शीतलाम्,

शस्यश्यामलाम्, मातरम्!

वंदे मातरम्!

शुभ्रज्योत्सनाम् पुलकितयामिनीम्,

फुल्लकुसुमित द्रुमदल शोभिनीम्,

सुहासिनीम् सुमधुर भाषिणीम्,

सुखदाम् वरदाम्, मातरम्!

वंदे मातरम्, वंदे मातरम्॥

क्यों 'वंदे मातरम्' को नहीं मिला राष्ट्रगान का दर्जा?

'वंदे मातरम्' को लेकर काफी समय पहले से ही विवाद चला आ रहा है। इसका चयन राष्ट्रगान के तौर पर हो सकता था, लेकिन कुछ मुसलमानों के विरोध के कारण इसे राष्ट्रगान का दर्जा नहीं मिल सका। ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि इन मुसलमानों का कहना था कि इस गीत में माता रानी की वंदना की गई है और उन्हें राष्ट्र के रूप में देखा गया है, जबकि इस्लाम में किसी व्यक्ति या वस्तु की पूजा करना सही नहीं माना जाता है।

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English summary
republic day know difference between national anthem and national song, why vande mataram not get national anthem status.
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